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उत्तराखंड में अवैध खनन के खिलाफ विधानसभा गेट पर हरीश रावत का धरना

देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उत्तराखंड विधानसभा गेट के सामने धरना शुरू कर दिया। रावत ने सरकार पर खनन की खुली लूट को छूट देने का आरोप लगाया है। इस दौरान सरकार पर अवैध खनन कराने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की गई। इससे पहले पुलिस ने उनको रोकने का प्रयास किया, लेकिन रावत नहीं रुके। उन्होंने विधानसभा भवन के गेट पर धरना शुरू कर दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट पर जानकारी दी,  राज्य सरकार व शासन की शह में, नदियों में हो रहे अवैध खनन के विरोध में मैं और उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल एवं मेरे साथी जसबीर सिंह रावत विधानसभा गेट की ओर सांकेतिक धरने के लिए जा रहे थे, लेकिन भाजपा इतनी डरी हुई है कि हमें वहां तक जाने भी नहीं दिया जा रहा है जो हमारा लोकतांत्रिक अधिकार है। भाजपा सरकार, पुलिस को आगे कर हमें राजीव नगर डालनवाला में ही रोकने का प्रयास किया गया।
रावत ने सोशल मीडिया पोस्ट पर एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें उनको पुलिस आगे बढ़ने से रोक रही है।
इससे पहले एक और पोस्ट में रावत लिखते हैं- मैं उत्तराखंड के नदियों व गाड़-गधेरों में अंधाधुंध, अवैज्ञानिक तरीके से टूट के तौर पर हो रहे बजरी बोल्डर आदि के खनन से बहुत दु:खी हूँ। यह खुली लूट हो रही है।
वो लिखते हैं, मैं जब मुख्यमंत्री जी को खनन प्रिय कहता था तो मुझे भी इतना एहसास नहीं था कि इतनी खुली लूट की इजाजत या खुली लूट करवाने का काम शासन व्यवस्था कर रही है।

 

मैंने कहा था कि विधानसभा के गेट पर मैं कुछ देर के लिए सांकेतिक धरना/उपवास करूंगा। आज अवसर मिला है मैंने प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि आइये अध्यक्ष जी जो हमने यह घोषणा की थी, एक व्यथित मन ने जो कुछ कहा था इस घोषणा को पूरा कर लेते हैं और एक-एक घंटा विधानसभा के गेट पर जहां तक जाने देंगे, वहीं पर उपवास बैठ जाते हैं और तत्काल बैठ जाते हैं।
अभी भराड़ीसैंण से लौटे हैं तो भराड़ीसैंण की भावना से ओतप्रोत हैं, तो मन में अचानक यह संकल्प उभरा है कि चलो विधानसभा के गेट पर उपवास बैठते हैं।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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