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VIDEO: युवाओं ने की चांदपत्थर के संरक्षण की पहल

डोईवाला। युवाओं के एक दल ने भोगपुर के पास चांदपत्थर के संरक्षण की पहल करते हुए स्वच्छता अभियान शुरू कर दिया। युवाओं का कहना है कि चांद पत्थर को ऐतिहासिक धरोहर का सम्मान देते हुए इसको पर्यटन के मानचित्र पर लाया जाए। उनके प्रयास लगातार जारी रहेंगे और इस क्षेत्र को स्वच्छ बनाने के लिए विभिन्न माध्यमों से जनजागरूकता अभियान चलाएंगे।

चांद पत्थर को हिला तक नहीं पाए थे अंग्रेज

चांदपत्थर के बारे में कहा जाता है कि इस पर अंग्रेजों ने गोलियां चलाई थीं, जिस पर गोलियों के तीन निशान साफ दिखाई देते हैं। राजीव गांधी पंचायत राज संगठन के प्रदेश संयोजक मोहित उनियाल ने बताया कि कुछ दिन पहले चांदपत्थर को देखने पहुंचे थे।
भोगपुर नहर के पास गदेरे में स्थित चांद पत्थर के आसपास काफी गंदगी फैली है और बड़ी बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। इस पर उनके साथियों ने यहां स्वच्छता अभियान चलाने का निर्णय लिया।
उन्होंने बताया कि शुक्रवार सुबह करीब साढ़े छह बजे उनके साथ ग्राम पंचायत सदस्य शुभम कांबोज, छात्र नेता सावन राठौर व आरिफ अली चांद पत्थर पर पहुंचे और आसपास झाड़ियों का कटान किया।

पत्थर के पास फैली गंदगी को हटाया गया। पहले दिन बारिश के मौसम में करीब एक घंटे तक युवाओं ने भोगपुर नहर से लेकर गदेरे में स्थित चांद पत्थर के आसपास स्वच्छता की मुहिम चलाई।
उनियाल के अनुसार, बारिश तेज होने की वजह से अभियान स्थगित करना पड़ा। शनिवार को भी युवा चांद पत्थर पर पहुंचकर स्वच्छता अभियान चलाएंगे।
उनका कहना है कि हम किसी भी कार्य के लिए सरकार से उम्मीद रखते हैं, पर लोगों को स्वयं भी पहल करनी होगी। हमें उन सभी स्थलों एवं विरासतों का सम्मान करना चाहिए, जिनका गौरवशाली अतीत रहा है। इस स्थान को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना होगा। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा।
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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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