AIIMS Rishikesh Youth Wellness Survey 2026: डिजीटल लत से 50 फीसदी से ज्यादा युवाओं की पढ़ाई और डेली लाइफ पर खराब असर

Rajesh Pandey

AIIMS Rishikesh Youth Wellness Survey 2026: ऋषिकेश, 23 मार्च, 2026: एम्स ऋषिकेश के सोशल आउटरीच सेल द्वारा किए गए एक व्यापक क्रॉस-सेक्शनल सर्वेक्षण में युवाओं के स्वास्थ्य को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह के मार्गदर्शन में हुए इस अध्ययन ने स्पष्ट किया है कि युवाओं का कल्याण (Wellness) केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सात परस्पर जुड़े आयामों—भावनात्मक, वित्तीय, डिजिटल, सामाजिक, आध्यात्मिक, बौद्धिक और पर्यावरणीय—का एक जटिल मिश्रण है।

सर्वेक्षण के प्रमुख निष्कर्ष: एक नज़र में

AIIMS Rishikesh Youth Wellness Survey 2026: सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि आधुनिक दौर में युवाओं की जीवनशैली और मानसिक स्थिति पर डिजिटल और वित्तीय दबाव का गहरा प्रभाव है।

1. मानसिक स्वास्थ्य और आत्म-क्षति का जोखिम

अध्ययन में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सबसे गंभीर चेतावनी दी गई है:

23.2% प्रतिभागी लगातार चिंता या घबराहट (Anxiety) का अनुभव करते हैं। 10.8% शैक्षणिक अपेक्षाओं के बोझ से दबाव महसूस करते हैं। जहां 31.8% युवाओं ने आत्म-क्षति (self-harm) के विचार या व्यवहार की जानकारी दी, वहीं 4.3% ने आत्महत्या का प्रयास भी किया है। जो युवा पर्याप्त नींद नहीं लेते या वित्तीय तनाव में हैं, उनमें आत्म-क्षति का जोखिम पांच गुना अधिक पाया गया।

AIIMS Rishikesh Youth Wellness Survey 2026: 45.7% युवाओं ने परिवार या करीबी लोगों के साथ बार-बार गलतफहमियों की बात कही, जो भावनात्मक संतुलन की कमी को दर्शाता है। इस विश्लेषण से पता चला कि कम नींद, कम शारीरिक गतिविधियां, सामाजिक असहजता, शैक्षणिक दबाव और वित्तीय तनाव आदि आत्म-क्षति के विचारों को बढ़ाते हैं। जो युवा लगातार चिंता में रहते हैं, उनमें यह जोखिम लगभग पांच गुना अधिक पाया गया।

सर्वे में शामिल किए गए युवाओं में 58.6% प्रतिभागी निम्न-आय वर्ग से थे, 28.3% युवाओं के भविष्य के निर्णय (जैसे कॅरियर/उच्च शिक्षा) वित्तीय तनाव से प्रभावित हुए। 34.7% प्रतिभागियों ने बताया कि आर्थिक सीमाओं ने उनके व्यक्तिगत लक्ष्यों को बाधित किया है ।

2. डिजिटल लत और शैक्षणिक बाधा

डिजिटल तकनीक का उपयोग युवाओं के लिए वरदान के साथ-साथ एक बड़ी बाधा भी बन रहा है:

  • स्क्रीन टाइम: 28.7% युवा प्रतिदिन 4 घंटे से अधिक समय मनोरंजन (गैर-शैक्षणिक) के लिए स्क्रीन पर बिताते हैं।

  • अवरोध: 51.9% युवाओं ने स्वीकार किया कि डिजिटल लत उनकी पढ़ाई और दिनचर्या को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रही है।

3. सामाजिक अलगाव और वित्तीय दबाव

47.8% को लगता है कि समाज में उनके विचारों को महत्व नहीं दिया जाता। 32.5% सामाजिक समारोहों में असहज महसूस करते हैं । 12.2% युवाओं के पास कोई करीबी मित्र नहीं है, यह दर्शाता है कि सामाजिक उपस्थिति के बावजूद भावनात्मक समर्थन की कमी है।28.3% युवाओं के करियर के फैसले और व्यक्तिगत लक्ष्य वित्तीय सीमाओं के कारण प्रभावित हुए हैं।

4. सकारात्मक संकेत (National Average से बेहतर)

चुनौतियों के बावजूद, ऋषिकेश के युवाओं में कुछ सकारात्मक प्रवृत्तियाँ भी देखी गईं। शराब का सेवन (8.6%) और तंबाकू का उपयोग (5%) राष्ट्रीय औसत से काफी कम पाया गया। 61.2% युवाओं के पास जीवन का स्पष्ट उद्देश्य है और 80.1% में मजबूत आंतरिक विश्वास प्रणाली है। 52.2% को सहयोगी वातावरण मिला, ऐसे युवाओं में आत्म-क्षति का जोखिम काफी कम पाया गया। केवल 62% को पर्याप्त नींद मिलती है। 50.5% नियमित व्यायाम करते हैं। केवल 19.6% पूरे दिन स्वयं को ऊर्जावान महसूस करते हैं। 41.6% को आध्यात्मिक गतिविधियों में अर्थ मिलता है, जबकि 39.7% को कार्यस्थल/शैक्षणिक वातावरण से समर्थन मिलता है।

विशेषज्ञ की राय: “एक ही कहानी के विभिन्न अध्याय”

प्रमुख शोधकर्ता डॉ. संतोष कुमार के अनुसार, “युवा स्वास्थ्य को केवल बीमारी या नशे के चश्मे से देखना गलत है। डेटा साबित करता है कि भावनात्मक तनाव को डिजिटल लत और वित्तीय असुरक्षा से अलग नहीं किया जा सकता। यह सब एक ही कहानी के हिस्से हैं।” यह अध्ययन ऋषिकेश के शैक्षणिक संस्थानों के 15-26 वर्ष आयु वर्ग के 418 युवाओं पर YUWA-JOSH प्रश्नावली के माध्यम से किया गया था।

समाधान की ओर: नेशनल यूथ कॉन्क्लेव (25 मार्च)

इन चुनौतियों पर गहन चर्चा करने के लिए एम्स ऋषिकेश 25 मार्च, 2026 (बुधवार) को “नेशनल यूथ कॉन्क्लेव” का आयोजन कर रहा है। यह मंच विशेषज्ञों और युवाओं को एक साथ लाएगा ताकि:

  • मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सामाजिक कलंक को समाप्त किया जा सके।

  • युवाओं को तनाव प्रबंधन और डिजिटल संतुलन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा सके।

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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