मैंने नहीं, साही ने उजाड़ा खेत

Rajesh Pandey

एक शाम डॉगी बैठा हुआ आराम कर रहा था। तभी एक साही उसके पास आकर बोली, मुझे भूख लगी है, कुछ खाने को दो। डॉगी ने कहा, मेरे पास खाने के लिए कुछ नहीं है। मैं भी सोच रहा हूं, आज रात का खाना कहां से मिलेगा। साही ने कहा, तुम्हें मेरी मदद करनी होगी, जल्दी बताओ, मुझे खाना कहां से मिलेगा। डॉगी से उससे पीछा छुड़ाने के लिए गन्ने के खेत की ओर इशारा करते हुए कह दिया, जाओ वहां खेत से जितना  चाहो, खा लो। ध्यान रखना, गन्ने का तना ही खाना, जड़ मत चट कर जाना। अगर जड़ उखाड़ दी तो दोबारा गन्ना नहीं लगेगा। डॉगी ने साही को गन्ने का जो खेत दिखाया था, वह किसी जज का था। 

साही तुरंत खेत की ओर दौड़ ली और खूब मजे से गन्ने का स्वाद चखा। उसको गन्ने इतने मीठे लगे कि वह दूसरे दिन भी वहां पहुंच गई। इस बार उसने तने के साथ जड़ भी चबा डाली। कुछ दिन में साही ने गन्ने का पूरा खेत उजाड़ दिया। शहर से लौटे जज ने जब अपने खेत की दुर्दशा देखी तो उन्हें बड़ा दुख हुआ। उन्होंने देखा कि यह डॉगी हमेशा यही बैठा रहता है, इससे पूछता हूं कि उनका खेत किसने उजाड़ा। जज ने डॉगी को इशारा करके अपने पास बुलाया और पूछा, सच-सच बताओ, यह खेत किसने उजाड़ा। डॉगी ने बता दिया कि आपका खेत साही ने उजाड़ा है। 

साही को बुलाया गया, तो उसने साफ कह दिया कि मुझे तो खेत में गन्ने खाने के लिए डॉगी ने ही भेजा था। इस पर डॉगी ने कहा, साही मैंने तुम्हें बता दिया था कि तना ही खाना, तुमने तो जड़ें भी चबा डाली हैंं। खेत को नुकसान तो तुमने ही पहुंचाया है। दोनों के बीच बहस होती देखी जज ने कहा, इसका फैसला कोर्ट में होगा कि कौन दोषी है और कौन निर्दोष। अभी तुम दोनों अपने ठिकानों पर जाओ। सर्दियों के दिन थे, कोर्ट से समन आ गए। साही और डॉगी को बुला लिया गया पेशी पर। सुबह-सुबह पेशी पर जाते हुए डॉगी को काफी ठंड लग रही थी। वह कांपता हुआ जज के सामने पेश हुआ। उसे देख साही बोली, जज साहब, देखो डॉगी कैसे कांप रहा है। यह दोषी है, इसलिए डर के मारे कांप रहा है।

वहीं ठंड से बुरे हाल हुए डॉगी अपने पक्ष में कुछ बोलता, उसके दांत किटकिटाने लगे। उसकी आवाज ही नहीं निकल रही थी। साही को मौका मिल गया, वह बोली- जज साहब, डॉगी की आवाज भी नहीं निकल रही है। डॉगी यह सोचकर घबरा रहा है कि आप उसे कहीं ज्यादा सजा न सुना दो। जज ने भी समझा कि दोषी होने की वजह से डॉगी घबरा रहा है। उन्होंने उसे गांव से बाहर चले जाने की सजा सुना दी। डॉगी रोता हुआ गांव से बाहर चला गया। अफ्रीका में रात को ज्यादा भौंकने वाले डॉगी के बारे में कहा जाता है कि ये अपनी बेगुनाही साबित करते हुए कहते हैं कि हम निर्दोष हैं, गन्ने के खेत को साही ने बर्बाद किया था। (अनुवादित- अफ्रीका की कहानी)

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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