देहरादून, 28 जून, 2026: पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण के लिए रायपुर ब्लॉक के शेरकी गांव में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम ‘कबाड़ से जुगाड़’ और ‘बाय-बाय प्लास्टिक’ मुहिम के तहत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और पर्यावरण को प्लास्टिक मुक्त करना है।
यह आयोजन ‘देहरादून युवा नेटवर्क’ के 21 दिवसीय ‘Together for Green Tomorrow Campaign’ का ही एक हिस्सा है। यह अभियान 24 अप्रैल से 14 मई 2026 तक चलाया गया था। इसके अंतर्गत देहरादून युवा नेटवर्क के सदस्यों ने क्षेत्र के दस अलग-अलग स्कूलों में जाकर बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया था। संस्था ने स्कूलों में थैले बांटकर बच्चों से अपने और आसपास के प्लास्टिक रैपर्स व थैलियों को इकट्ठा करने की अपील की गई थी। बच्चों के सामूहिक प्रयास से सभी दस स्कूलों से भारी मात्रा में प्लास्टिक कचरा एकत्र किया गया।
स्कूलों से इकट्ठा इस प्लास्टिक कचरे को ‘हेस्को’ (HESCO) से जुड़े प्लास्टिक प्रबंधन विंग को सौंपा गया। इस कचरे का सदुपयोग करते हुए एक नई तकनीक से टोकरियों का निर्माण किया गया। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वरोजगार को बढ़ावा देने की एक नई राह खुली है।
शेरकी गांव में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में मुख्य विशेषज्ञ संजय बहुगुणा, अध्यक्ष मानवाधिकार संरक्षण एवं ग्रामीण विकास समिति रानीचौरी टिहरी गढ़वाल एवं उद्यमी सुषमा बहुगुणा ने प्रशिक्षण दिया। दोनों विशेषज्ञ लंबे समय से HESCO के सहयोग से ‘कबाड़ से जुगाड़’ मुहिम के जरिए पर्यावरण संरक्षण के कार्य में जुटे हैं। उन्होंने महिलाओं को प्लास्टिक कचरे से आकर्षक और मजबूत टोकरियां बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि कैसे बेकार फेंक दिए जाने वाले प्लास्टिक को एक उपयोगी उत्पाद में बदला जा सकता है।
इस प्रशिक्षण को प्राप्त करने के बाद महिलाएं बेहद उत्साहित दिखीं। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य यही है कि महिलाएं इस हुनर को सीखकर अपने घरों से ही गृह उद्योग या स्वरोजगार शुरू कर सकें। इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि गांव से प्लास्टिक कचरे का भी पूरी तरह से निपटारा हो सकेगा। स्थानीय लोगों ने हेस्को देहरादून युवा नेटवर्क और विशेषज्ञों के इस सामूहिक प्रयास की सराहना की है।



