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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घर जाकर वंदना कटारिया को सम्मानित किया

हरिद्वार। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी वंदना कटारिया के रोशनाबाद, हरिद्वार स्थित आवास पर जाकर उनको टोक्यो ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन पर बधाई दी।

मुख्यमंत्री धामी ने वंदना कटारिया को 25 लाख रुपये का चेक प्रदान किया। उनको तीलू रौतेली पुरस्कार से भी सम्मानित किया। इसके तहत उन्हें 31 हजार रुपये का चेक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।

वंदना कटारिया को महिला सशक्तीकरण के तहत ‘‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान का ब्रांड एम्बेसडर भी बनाया गया है।  

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि वंदना कटारिया ने टोक्यो ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन से प्रदेश का मान-सम्मान बढ़ाया है। उत्तराखंड की बेटी ने एक मैच में हैट्रिक बनाकर अपनी अलग पहचान बनाई।

उन्होंने वंदना को इसी मनोबल से खेलने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि खिलाड़ियों को अधिक से अधिक सुविधाएं मिल सकें, इसके लिए राज्य में नई खेल नीति बनाई जा रही है। उन्होंने वंदना कटारिया के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, यतीश्वरानन्द, विधायक आदेश चौहान, देशराज कर्णवाल, सचिव हरि चन्द्र सेमवाल एवं वंदना कटारिया के परिवारजन उपस्थित थे।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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