By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
Reading: समय पर बारिश नहीं होने पर किसान कृष्णा बोलीं, “अकाल ही तो पड़ेगा, जब इतने मकान बनेंगे”
Share
Notification Show More
Font ResizerAa
NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7
Font ResizerAa
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
  • Advertise
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
- Advertisement -
Ad imageAd image
NEWSLIVE24x7 > Blog > Agriculture > समय पर बारिश नहीं होने पर किसान कृष्णा बोलीं, “अकाल ही तो पड़ेगा, जब इतने मकान बनेंगे”
AgricultureBlog LiveFeaturedfoodNewsUttarakhandVillage Tour

समय पर बारिश नहीं होने पर किसान कृष्णा बोलीं, “अकाल ही तो पड़ेगा, जब इतने मकान बनेंगे”

Rajesh Pandey
Last updated: July 27, 2024 7:13 pm
Rajesh Pandey
2 years ago
Share
उत्तराखंड के देहरादून जिला स्थित पलेड गांव में महिला कृषक कृष्णा देवी।
SHARE

राजेश पांडेय। न्यूज लाइव

पलेड गांव (Paled Village) में कृष्णा देवी, घर के पास के खेत में घुस आए लंगूरों को भगा रही हैं। फसल की सुरक्षा के लिए उनको दिनभर मुस्तैद रहना पड़ता है। उन्होंने खेत में दस दिन पहले मक्का का बीज बोया था, जिसके उगने की उम्मीद कम है, इसकी वजह बारिश नहीं होना और बीज को सूअर, बंदर, लंगूर, खरगोश और अन्य छोटे बड़े जानवरों द्वारा नुकसान पहुंचाना है। यही वजह है कि लोगों ने खेती करना छोड़ दिया है। पलेड गांव उत्तराखंड के देहरादून जिले की लड़वाकोट ग्राम पंचायत का गांव है।

हमने जब उनसे क्लाइमेट चेंज यानी जलवायु परिवर्तन शब्द के बारे में जानकारी चाही तो उनका कहना था कि “यह शब्द उन्होंने सुना है। यह समय पर बारिश नहीं होने को लेकर है।” पलेड गांव में खेती वर्षा पर निर्भर है।

कृष्णा देवी कहती हैं ” समय पर बारिश नहीं होने से खेतीबाड़ी पर बुरा असर पड़ता है। पहाड़ में खेतीबाड़ी और पशुपालन में महिलाएं ही व्यस्त रहती हैं, इसलिए सीधे सीधे यह महिलाओं को प्रभावित करता है। बारिश होने पर पिछले साल इस समय तक खेत में मक्का के पौधे दिखने लग गए थे।”

“मेरा मायका द्वारा गांव में है, लगभग 27 साल पहले शादी होकर पलेड गांव पहुंची। पहले यहां खेती के इतने बुरे हाल नहीं थे। हमने 20 किलो फ्रैंचबीन तक बोई। कोई उजाड़ नहीं थी। पिछले आठ-दस साल से ही जंगली जानवर खेतों को ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं। पहले खेतों में कोई जानवर नहीं आता था। यहां इतने खरगोश हो गए हैं, आप आज मिर्च की पौध लगाओ, दूसरे दिन जाकर देखो, मिर्च दिखेगी नहीं,” 48 साल की कृष्णा देवी बताती हैं।

पलेड गांव की कृष्णा देवी खेत में घुसे जंगली जानवरों को खदेड़ते हुए।

यह पूछे जाने पर शहरों में इमारतें बनने, पेड़ों को काटने, पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने, इमारतें बनाने के लिए पहाड़ों को काटने का असर आप पर भी पड़ रहा है, पर कृष्णा हंसते हुए कहती हैं, “हम इसको अकाल पड़ रहा है,” बोलते हैं। ” आप ही बताओ, अकाल नहीं पड़ेगा, जब इतने घर (मकान), बड़ी बड़ी इमारतें बना दी जाएंगी। पेड़ों को काटा जाएगा।”

कृष्णा देवी, जो 27 साल से पलेड गांव में कृषि कर रही हैं, अपने अनुभव के आधार पर बताती हैं, “अगर ज्यादा बारिश हुई तो अदरक खराब हो जाएगी। पिछली बार, बारिश इतनी पड़ गई कि पूरी अदरक खेतों में ही खराब हो गई। हमें ऐसा चाहिए कि एक बारिश अभी हो जाए और फिर एक हफ्ते बाद फिर हो। खेती के लिए यहां बारिश जरूरी है, क्योंकि यहां की जमीन में मिट्टी कम, पत्थर ज्यादा है। हमने मिर्च की पौध लगाई थी, उनमें फूल आ गए थे, पर बारिश बंद होने पर पौधे सूख गए।”

कृष्णा देवी बताती हैं, “जंगल में चारा पत्ती नहीं मिल रहा, जंगल सूख रहे हैं। जंगल में बकरियां चराने के लिए आने वाले लोग बोलते हैं कि यहां खूब घास होती थी। पर दो-चार साल से जंगलों में घास कम हो गया। यहां लालटेन घास (लैंटाना) बढ़ गया। पहले बकरियां चराने वाले यहां कई दिन रुकते थे, पर अब एक दिन से ज्यादा नहीं रुकते। यह सब बारिश समय पर नहीं होने की वजह से हो रहा है। जब, बारिश समय पर नहीं होगी, तो जंगलों में घास कहां से होगी। पूरी सर्दियों में बारिश नहीं हुई, तो घास सूख गया। बारिश अब पड़ेगी तो कितनी घास हो पाएगी।”

“उनके पास छोटे बड़े मिलाकर चार पशु हैं, पर इनके लिए घास पत्ती जुटाने में काफी समय लगता है। अधिकतर खेत खाली छोड़ दिए गए हैं, इसलिए पशुओं के चारे के लिए खेती पर आश्रित नहीं रह सकते।”

You Might Also Like

पहाड़ के ढलान पर क्रिकेट खेलते बच्चे
लोअर पीसीएस की मुख्य परीक्षा के लिए ये अनिवार्य नियम जान लीजिए
‘स्ट्रोक’ के सही आकलन के लिए नई तकनीक
उत्तराखंडः नायब तहसीलदार सहित Lower PCS के 113 पदों के लिए मांगे ऑनलाइन आवेदन
उत्तराखंड को बेस्ट एडवेंचर टूरिज्म के लिए पहला पुरस्कार
TAGGED:Climate Impacts on AgricultureEffects of climate change on agricultureGlobal Warming and AgricultureHow Does Climate Change Affect Agriculture?How will climate change affect agriculture?Paled Village
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Email Copy Link Print
ByRajesh Pandey
Follow:
newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
Previous Article एक जून से खुलेगा फूलों की घाटी ट्रैक
Next Article यात्रियों को सलाहः रजिस्ट्रेशन कराने के बाद ही यात्रा शुरू करें
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://newslive24x7.com/wp-content/uploads/2026/04/CM-Dhami-4-Year-Journey-2026-2-Min-1.mp4

Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

Prem Nagar Bazar Doiwala Dehradun
Prem Nagar Bazar Doiwala Dehradun Doiwala, PIN- 248140
9760097344
© 2026 News Live 24x7| Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?