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Minor Planet Center: सौर मंडल में घूम रहे पिंडों और मलबे का डेटा इकट्ठा करता है यह सेंटर

Rajesh Pandey
Last updated: March 24, 2026 9:05 pm
Rajesh Pandey
3 weeks ago
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Minor Planet Center: माइनर प्लैनेट सेंटर (Minor Planet Centre – MPC) दुनिया का वह आधिकारिक संगठन है जो सौर मंडल के छोटे पिंडों (Small Bodies) के बारे में सारा डेटा इकट्ठा करता है। इसमें मुख्य रूप से क्षुद्रग्रह (Asteroids), धूमकेतु (Comets) और बौने ग्रह (Dwarf Planets) शामिल हैं।

Minor Planet Center: दुनियाभर के शौकिया और पेशेवर खगोलशास्त्री जब भी किसी नए पत्थर या पिंड को आसमान में देखते हैं, तो वे उसकी रिपोर्ट MPC को भेजते हैं। MPC यह जाँचता है कि क्या यह कोई नई खोज है या पहले से ज्ञात कोई पिंड। नए खोजे गए पिंडों को एक अस्थायी नाम (Designation) भी यही देता है। यह गणितीय गणना करता है कि वह पिंड अंतरिक्ष में किस रास्ते पर चल रहा है और क्या भविष्य में उसके पृथ्वी से टकराने का कोई खतरा है।

यह अमेरिका के मैसाचुसेट्स में स्मिथसोनियन एस्ट्रोफिजिकल ऑब्जर्वेटरी (Smithsonian Astrophysical Observatory) में स्थित है और इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन (IAU) के तत्वावधान में काम करता है।

Minor Planet Center: अगर MPC न हो, तो हमें कभी पता नहीं चलेगा कि अंतरिक्ष में कितने मलबे या पत्थर घूम रहे हैं। यह ‘प्लेनेटरी डिफेंस’ (ग्रहों की सुरक्षा) के लिए बहुत ज़रूरी है क्योंकि यह संभावित रूप से खतरनाक क्षुद्रग्रहों (Potentially Hazardous Asteroids) पर नज़र रखने में मदद करता है।

हाल के समय में वैज्ञानिकों और माइनर प्लैनेट सेंटर (MPC) के लिए सबसे दिलचस्प पिंडों में से एक ‘अपोफिस’ (Apophis) रहा है। जब इसकी खोज हुई थी, तो वैज्ञानिकों को लगा था कि यह 2029 में पृथ्वी से टकरा सकता है। लेकिन अच्छी खबर यह है कि MPC के सटीक डेटा और नई गणनाओं ने अब यह साफ कर दिया है कि अगले 100 सालों तक इससे हमें कोई खतरा नहीं है। 13 अप्रैल, 2029 को यह पृथ्वी के बेहद करीब से गुज़रेगा। यह हमारे संचार उपग्रहों (Communication Satellites) की कक्षा से भी नीचे आ जाएगा। यह इतना करीब होगा कि इसे बिना दूरबीन के नग्न आँखों (Naked eyes) से देखा जा सकेगा। यह लगभग 340-370 मीटर चौड़ा है। अगर तुलना करें, तो यह भारत के ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ से भी काफी बड़ा है।

हाल ही में MPC ने कुछ ऐसे छोटे क्षुद्रग्रहों की पहचान की है जो कुछ समय के लिए पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में फंस जाते हैं और अस्थायी रूप से हमारे चंद्रमा की तरह चक्कर लगाने लगते हैं। इन्हें ‘मिनी मून’ कहा जाता है। हाल ही में 2024 PT5 नाम के एक छोटे पिंड ने कुछ महीनों के लिए पृथ्वी का साथ निभाया था।

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TAGGED:asteroid naming processMinor Planet Center IAUMPC astronomical dataNear-Earth Objects (NEO) databaseorbital calculationsplanetary defenseSmithsonian Astrophysical Observatorysolar system small bodiestracking asteroids and comets
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ByRajesh Pandey
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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