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उत्तराखंड विधानसभा चुनावः सबसे ज्यादा वोटों से जीत, सबसे कम वोटों से हार

रायपुर में भाजपा के उमेश शर्मा काऊ ने कांग्रेस के हीरा सिंह बिष्ट को सबसे अधिक 30,052 वोटों से हराया

देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा 47 और कांग्रेस 19 सीटों पर विजयी हुए। वहीं, राज्य में कुछ सीटें ऐसी भी हैं, जहां प्रत्याशियों ने बहुत कम वोटों के अंतर से जीत हासिल की। वहीं ऐसे प्रत्याशी भी हैं, जिनकी जीत का अंतर 30 हजार वोट पार कर गया।

अल्मोड़ा में कांग्रेस के मनोज तिवारी ने भाजपा के कैलाश शर्मा पर सबसे कम 127 वोट के अंतर से हराया। वहीं, देहरादून जिला की रायपुर सीट पर भाजपा के उमेश शर्मा काऊ ने कांग्रेस प्रत्याशी हीरा सिंह बिष्ट को सबसे अधिक 30,052 वोटों के अंतर से पराजित किया। उमेश शर्मा काऊ ने 2017 के विधानसभा चुनाव में रायपुर सीट पर ही सबसे अधिक 36,771 वोटों से जीत हासिल की थी।

एक हजार वोटों से कम के अंतर से जीते- अल्मोड़ा में कांग्रेस के मनोज तिवारी ने भाजपा के कैलाश शर्मा को सबसे कम 127,  द्वाराहाट में कांग्रेस के मदन सिंह बिष्ट ने भाजपा के अनिल सिंह शाही को 182 वोट,  मंगलौर में बसपा के सरवत करीम अंसारी ने कांग्रेस के काजी मोहम्मद निजामुद्दीन को 598 तथा श्रीनगर में भाजपा के डॉ. धन सिंह रावत ने कांग्रेस के गणेश गोदियाल को 587, टिहरी में भाजपा के किशोर उपाध्याय ने उत्तराखंड जन एकता पार्टी के दिनेश धनै को 951 वोटों के अंतर से हराया।

20 हजार वोटों से ज्यादा के अंतर से जीते- देहरादून जिला की रायपुर सीट पर भाजपा के उमेश शर्मा काऊ ने कांग्रेस के हीरा सिंह बिष्ट को सबसे अधिक 30,052 वोटों, डोईवाला सीट पर भाजपा के बृजमोहन गैरोला ने कांग्रेस के गौरव (गिन्नी) को 29,021, कालाढूंगी में भाजपा के बंशीधर भगत ने कांग्रेस के महेश चंद्र को 23,931 तथा देहरादून कैंट में भाजपा की सविता कपूर ने कांग्रेस के सूर्यकांत धस्माना को 20,938 वोटों के अंतर से हराया।

 

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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