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विधानसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहते त्रिवेंद्र रावत!

हाथ से लिखी चिट्ठी के अनुसार, सरकार बनाने के लिए काम करेंगे त्रिवेंद्र सिंह

देहरादून। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को लेकर एक चिट्ठी सोशल मीडिया में वायरल हो रही है, जिसके अनुसार त्रिवेंद्र स्वयं पार्टी अध्यक्ष से चुनाव नहीं लड़ने का अनुरोध कर रहे हैं। इस चिट्ठी में लिखा है, बदली राजनीतिक परिस्थितियों में, इसके निहितार्थ को समझने की आवश्यकता है। डोईवाला विधानसभा में लगातार सक्रिय रहे त्रिवेंद्र सिंह रावत के सामने ऐसी कौन सी राजनीतिक परिस्थितियां आ गईं, जिनके आधार पर कहा जाने लगा कि त्रिवेंद्र चुनाव नहीं लड़ेंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के लेटर हेड पर हैंड राइटिंग वाली इस चिट्ठी के अनुसार, त्रिवेंद्र भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष  को लिखते हैं, मान्यवर पार्टी ने मुझे देवभूमि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर दिया, यह मेरा परम सौभाग्य था। मैंने भी कोशिश की, कि पवित्रता के साथ राज्यवासियों की समभाव सेवा करूँ औऱ संतुलित विकास की अवधारणा को पूर्ण करूँ।

माननीय प्रधानमंत्री जी का भरपूर सहयोग व आशीर्वाद मुझे व प्रदेशवासियों को मिला, जो अभूतपूर्व था। मैं उनका हृदय की गहराइयों से धन्यवाद करना चाहता हूं। उत्तराखंड वासियों व विशेषकर डोईवाला विधानसभावासियों का ऋण तो कभी चुकाया ही नहीं जा सकता, उनका भी धन्यवाद, कृतज्ञ भाव से करता हूँ । डोईवाला विधानसभा वासियों का आशीर्वाद आगे भी पार्टी को मिलता रहेगा, ऐसा मेरा विश्वास है।

चिट्ठी में आगे लिखा है,  माननीय अध्यक्ष जी, विनम्रभाव से आपसे अनुरोध करना चाहता हूँ कि राज्य में नेतृत्व परिवर्तन हुआ है व युवा नेतृत्व श्री पुष्कर धामी के रूप में मिला है, बदली – राजनीतिक परिस्थितियों में मुझे विधानसभा चुनाव 2022 नहीं लड़ना चाहिए, मैं अपनी भावनाओं से पूर्व में ही अवगत करा चुका हूँ ।

मैं भाजपा का कार्यकर्ता हूँ। राष्ट्रीय सचिव, झारखंड प्रभारी, उत्तर प्रदेश लोकसभा चुनाव 2014 में सहप्रभारी की जिम्मेदारी मैंने निभाई है। महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश में चुनाव अभियानों में काम किया है। वर्तमान में उत्तराखंड राज्य में चुनाव है। श्री धामी के नेतृत्व में पुनः सरकार बने, इसके लिए पूरा समय लगाना चाहता हूं।

इस चिट्ठी में लिखा है, बदली राजनीतिक परिस्थितियों में, इसके निहितार्थ को समझने की आवश्यकता है। डोईवाला विधानसभा में लगातार सक्रिय रहे त्रिवेंद्र सिंह रावत के सामने ऐसी कौन सी राजनीतिक परिस्थितियां आ गईं, जिनके आधार पर कहा जाने लगा कि त्रिवेंद्र चुनाव नहीं लड़ेंगे।

पर, त्रिवेंद्र रावत से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यह जानकारी मिली है कि वो इस बार चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं हैं। हालांकि इस संबंध में त्रिवेंद्र सिंह रावत से बात करने की कोशिश की गई, उनका फोन व्यस्त मिला।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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