तेजी से विकसित हो रहे उत्तराखंड में निवेश की व्यापक संभावनाएंः मुख्यमंत्री

Rajesh Pandey
देहरादून। 12 जनवरी, 2025
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखण्डी सम्मेलन का शुभारंभ किया। विभिन्न देशों में रहने वाले उत्तराखंड के प्रवासियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा, तेजी से विकसित हो रहे उत्तराखंड में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा, साहसिक पर्यटन, पावर जेनरेशन, एरोमेटिक, विनिर्माण, कृषि, उद्यान, हर्बल, आयुष एंड वेलनैस आदि में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। हमने राज्य को निवेश डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने के लिए नीतिगत और ढांचागत दोनों स्तर पर बड़े सुधार किए हैं। काम शुरू करने में आसानी हो, इसके लिए नियमावली में उसके अनुरूप सुधार किए हैं। अपराधमुक्त और भयमुक्त समाज के लिए कई सख्त वैधानिक प्रावधान किए हैं।
राज्य में सड़क, रेल, हवाई अड्डा, रोपवे, संचार नेटवर्क का बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है, जिससे राज्य एक सुरक्षित, सुगम और आकर्षक निवेश स्थल के रूप में भी तेजी से उभर रहा है। नीति आयोग और अन्य राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग संस्थाओं की रैंकिंग भी इसी ओर इशारा करती है।
मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि उत्तराखंड की पलायन जैसी विकट समस्या के समाधान के लिए अपनी मातृभूमि के किसी गांव-कस्बे को गोद लेते हुए उसको विकसित और संरक्षित करने का प्रण लें। उन्होंने कहा कि राज्य को आपकी योग्यता, अनुभव और तकनीकी ज्ञान की बहुत आवश्यकता है और राज्य की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को साकार करने के लिए यह महत्वपूर्ण भी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने प्रवासियों से बेहतर समन्वय बनाने और सहयोग प्रदान करने के लिए प्रवासी प्रकोष्ठ का भी गठन किया है। हम शीघ्र वेंचर फंड का भी प्रावधान करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2025 उत्तराखण्ड के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। इस वर्ष राज्य अपना रजतोत्सव मना रहा है। आगामी 28 जनवरी से राज्य राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी के लिए तैयार है। इसी माह समान नागरिक संहिता कानून लागू करने जा रहे हैं। हाल ही में हमने शीतकालीन पर्यटन की शुरुआत भी की है, जो राज्य की आर्थिकी के लिए गेमचेंजर साबित होगा।
उत्तराखण्ड के प्रवासियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस तरह से उन्होंने भी बचपन में यहां की पगडंडिया नापी हैं। तब के और आज के उत्तराखण्ड में बहुत बड़ा परिवर्तन आया है। तब हमने रोजगार की तलाश में विदेश का रुख किया था। उन्होंने कहा कि आज बदलते उत्तराखण्ड में युवाओं को काम करने के लिए बहुत संभावनाएं हैं। क्योंकि आज उत्तराखण्ड ने बहुत से क्षेत्रों में विकास के बड़े मानक तय किए हैं।
प्रवासी उत्तराखण्डी गिरीश पंत, अनीता शर्मा, देव रतूड़ी, विनोद जेठुडी, ए. के. काला और शैलेश उप्रेती ने अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखण्डी सम्मेलन की पहल के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उत्तराखण्ड सरकार की सराहना करते हुए कहा कि इससे उन्हें अपनी जड़ों से जुड़ने और अपनी माटी के लिए कुछ करने का अवसर मिला है। हम सभी अपने अनुभव, तकनीक और ज्ञान से राज्य सरकार के साथ मिलकर पलायन की इस समस्या का बेहतर समाधान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी प्रवासियों को राज्य के दूरस्थ क्षेत्र का कोई न कोई गांव जरूर गोद लेना चाहिए। अपना गांव तो गोद ले ही सकते हैं। गांव गोद नहीं ले सकते तो कम से कम किसी बच्चे को ही गोद लें।
कई प्रवासियों ने अपनी मातृभाषा में संबोधन किया, जिससे मातृभूमि के प्रति उनका गहरा नाता दिखा।
मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड के विकास में अपना योगदान देने वाले तथा राज्य के गांव को गोद लेने वाले उत्तराखण्ड के प्रवासियों गिरीश पंत, अनीता शर्मा, देव रतूड़ी, विनोद जेठुडी, ए. के. काला और शैलेश उप्रेती को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा ‘हाउस आफ हिमालयाज उत्तराखण्ड ब्रांड’ से विक्रय किए जाने वाले उत्पादों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।
प्रवासी उत्तराखण्डी सम्मेलन में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, विधायक टिहरी किशोर उपाध्याय, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन , पूर्व पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, रंजीत कुमार सिन्हा, विनोद कुमार सुमन, दीपेंद्र चौधरी, आयुक्त गढ़वाल विनय शंकर पांडेय, डीजी सूचना बंशीधर तिवारी सहित संबंधित गणमान्य  उपस्थित थे।
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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