देहरादून जिला के डोईवाला नगर से लगभग आठ किमी. दूर खैरी गांव स्थित वन क्षेत्र में गुर्जर बस्ती है, जिसको खैरीवनबाह क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। यहां सभी परिवार पशुपालन और खेती करते हैं। 1975 के आसपास बसी इस बस्ती में अभी तक बिजली और पानी के कनेक्शन नहीं है। इसकी वजह इस क्षेत्र को वन क्षेत्र में होना बताई जाती है। आइए कुछ फोटोग्राफ के माध्यम से इस क्षेत्र का भ्रमण करते हैं…
[tie_full_img]
देहरादून जिला के डोईवाला से लगभग आठ किमी. दूर है एक बस्ती, जहां हर परिवार पशुपालन करता है। यहां वो लोग हैं, जो पहले वनों में रहते थे। बाद में सरकार से भूमि मिली, जिस पर कच्चे घर बनाए, पर उनको आज 48 साल बाद भी बिजली, पानी के कनेक्शन नहीं मिले। पशुओं को खिलाने के लिए लगाया गया पुआल का ढेर। पुआल धान (चावल) के तनों से बनता है। फोटो- राजेश पांडेय[/tie_full_img]
यह भी पढ़ें- इन परिवारों को बहुत डराती हैं बारिश वाली रातें
यह भी पढ़ें- तक धिना धिनः वाकई कमाल का था यह भ्रमण
[divider style=”solid” top=”20″ bottom=”20″]
[tie_full_img]
बनवाह क्षेत्र की गुर्जर बस्ती में हरेभरे खेतों के बीच एक कच्चा मकान है, जिसमें 50 वर्षीय अब्दुल करीम रहते हैं। उनके घर पर बिजली के लिए सोलर लाइट लगी है। उनके तीन बेटे हैं, जो राजमिस्त्री, जेसीबी चालक और मैकेनिक का काम करते हैं। बेटे झबरावाला में रहते हैं। अब्दुल करीम बताते हैं, उनकी बस्ती में शौचालय नहीं बनाए जा सकते, क्योंकि यहां पक्का निर्माण मना है। यह वन भूमि है, जिस पर वर्षों पहले उनको बसाया गया था। फोटो- शबीर अहमद[/tie_full_img]
[divider style=”solid” top=”20″ bottom=”20″]
[tie_full_img]
बनवाह क्षेत्र की गुर्जर बस्ती में रहने वाले कुत्ते सामान्य तौर पर दिन में यहां पहुंचने वाले लोगों पर हमला नहीं करते। ये यहां खुले घूमते हैं, पर रात को ये गुलदार से भी नहीं डरते। इस डॉगी के बारे में बताया जाता है, यह बस्ती से लेकर सुसवा नदी पर बने रेलवे पुल तक घूमता है। वहां एक बार यह एक गुलदार से भिड़ गया था। फोटो- राजेश पांडेय[/tie_full_img]
[divider style=”solid” top=”20″ bottom=”20″]
[tie_full_img]
बनवाह क्षेत्र की गुर्जर बस्ती में शाम का वक्त है और दिनभर नदी के पास चरने के बाद पशु अपने डेरे में पहुंच गए हैं। शबीर अहमद बताते हैं, पशुओं यहां समूह में रहते हैं, उनको पता है कि इनके समूह में कौन-कौन से पशु हैं। शाम को ये अपने अपने बाड़े के पास खड़े हो जाते हैं। पशुपालन यहां का प्रमुख व्यवसाय है। बस्ती के एक हिस्से में 12 परिवार रहते हैं, जिनके पास दो सौ से अधिक पशु हैं। सबसे बड़ी खासियत यह है कि गुर्जर अपने पशुओं को नहीं बांधते। शाम के बाद ये अपने बाड़े में आ जाते हैं, जिसको लकड़ियों की बल्लियों से घेर दिया जाता है। फोटो- राजेश पांडेय[/tie_full_img]
[divider style=”solid” top=”20″ bottom=”20″]
[tie_full_img]

देहरादून स्थित डोईवाला नगर से लगभग आठ किमी. दूर स्थित खैरीबनवाह क्षेत्र की गुर्जर बस्ती और रेलवे लाइन के बीच एक जलधारा बहती है, जो नलोंवाली देवी मंदिर के आसपास स्थित जल स्रोतों से बनी है। इन दिनों इसमें पानी है, पर गर्मियों में यह सूख जाती है। बरसात में यह भरी रहती है। करीब तीन किमी. चलकर सुसवा नदी में मिल जाती है। जब इस नहर में पानी नहीं होता, तब यहां पशुओं को हैंडपंप चलाकर पानी पिलाया जाता है। फोटो- राजेश पांडेय[/tie_full_img]
[divider style=”solid” top=”20″ bottom=”20″]
[tie_full_img]
देहरादून स्थित डोईवाला नगर से लगभग आठ किमी. दूर स्थित खैरीबनवाह क्षेत्र की गुर्जर बस्ती और रेलवे लाइन के बीच एक जलधारा बहती है, जो नलोंवाली देवी मंदिर के आसपास स्थित जल स्रोतों से बनी है। इन दिनों इसमें पानी है, पर गर्मियों में यह सूख जाती है। बरसात में यह भरी रहती है। करीब तीन किमी. चलकर सुसवा नदी में मिल जाती है। नहर को पार करने के लिए लकड़ियों को बांधकर इस तरह के पुल बनाए गए हैं। जब इस नहर में पानी नहीं होता, तब यहां पशुओं को हैंडपंप चलाकर पानी पिलाया जाता है। फोटो- राजेश पांडेय[/tie_full_img]
[divider style=”solid” top=”20″ bottom=”20″]
[tie_full_img]

देहरादून स्थित डोईवाला नगर से लगभग आठ किमी. दूर स्थित खैरीबनवाह क्षेत्र की गुर्जर बस्ती में पशुपालन के साथ खेती भी की जाती है। इन दिनों यहां गेहूं की फसल लहलहा रही है। पर, सुसवा नदी में बाढ़ खेती को बर्बाद कर देती है। लियाकत अली ने घर के पास सब्जियां उगाई हैं। क्यारियों की निराई गुड़ाई करते लियाकत अली। फोटो- राजेश पांडेय[/tie_full_img][tie_full_img]
[divider style=”solid” top=”20″ bottom=”20″]
[tie_full_img]

देहरादून जिला के डोईवाला से लगभग आठ किमी. दूर है एक बस्ती, जिसे खैरी वनबाह क्षेत्र स्थित गुर्जर बस्ती कहा जाता है। यह बस्ती वर्ष 1975 के आसपास बसाई गई थी। जिसमें आज तक पानी और बिजली के कनेक्शन उपलब्ध नहीं कराए गए। पानी के लिए हैंडपंप लगाए गए हैं। फोटो- राजेश पांडेय[/tie_full_img]
[divider style=”solid” top=”20″ bottom=”20″]
[tie_full_img]
देहरादून स्थित डोईवाला नगर से लगभग आठ किमी. दूर स्थित खैरीबनवाह क्षेत्र की गुर्जर बस्ती के सामने रेलवे लाइन है। यह रेलवे लाइन देहरादून से हरिद्वार को जोड़ती है। हरिद्वार जाती ट्रेन का यह फोटो बस्ती से क्लिक किया गया है। फोटो- राजेश पांडेय[/tie_full_img]
[divider style=”solid” top=”20″ bottom=”20″]
[tie_full_img]
देहरादून स्थित डोईवाला नगर से लगभग आठ किमी. दूर स्थित खैरीबनवाह क्षेत्र है और इससे करीब डेढ़ किमी. आगे है रेलवे ब्रिज, जो सुसवा नदी पर बना है। इस ब्रिज से सुसवा नदी में प्रदूषण की स्थिति साफ पता चलती है। सुसवा नदी देहरादून शहर से मिली गंदगी ढोने वाली बिंदाल, रिस्पना और सपेरा नाला से मिलकर बनती है। मोथरोवाला से शुरू हुआ सुसवा का सफर आखिरकार गंगा नदी तक चल रहा है। फोटो- मोहित उनियाल[/tie_full_img]
[divider style=”solid” top=”20″ bottom=”20″]
[tie_full_img]
देहरादून स्थित डोईवाला नगर से लगभग आठ किमी. दूर स्थित खैरीबनवाह क्षेत्र है और इससे करीब डेढ़ किमी. आगे है रेलवे ब्रिज, जो सुसवा नदी पर बना है। इस ब्रिज से आगे रेलवे लाइन राजाजी राष्ट्रीय पार्क से होकर हरिद्वार की ओर बढ़ती है। यह एलीफेंट कॉरिडोर ( हाथियों का गलियारा) है। यहां सभी ट्रेनों की गति धीमी हो जाती है। फोटो- शबीर[/tie_full_img]
[divider style=”solid” top=”20″ bottom=”20″]
[tie_full_img]
यह हैं सलीम अहमद, जो पशुओं को चराने के बाद घर लौट रहे हैं। सलीम ने पशुओं को हांकने वाली लाठी को कुछ इस अंदाम में थामा है। फोटो- शबीर अहमद [/tie_full_img]
[divider style=”solid” top=”20″ bottom=”20″]
[tie_full_img]
बनवाह गुर्जर बस्ती में विशेष शैली में घर बनाए गए हैं। गारे पत्थर से बनाए गए घर की छत फूस व लकड़ी से बनाई गई है। यहां सभी घर इसी शैली में बनाए गए हैं। ऐसे ही एक घर के सामने से जाते हुए मोहित उनियाल। उनियाल सामाजिक मुद्दों के पैरोकार हैं। फोटो- राजेश पांडेय [/tie_full_img]
[divider style=”solid” top=”20″ bottom=”20″]
[tie_full_img]
खैरी वनबाह गुर्जर बस्ती में यह बालक साइकिल की सवारी कर रहा था, हमने उससे एक फोटो खिंचवाने को कहा, वो मान गया और इस अंदाज में एक फोटो खिंचवाई। यहां रहने वाले बच्चे करीब डेढ़ किमी. दूर स्थित स्कूल जाते हैं। फोटो- राजेश पांडेय [/tie_full_img]
[divider style=”solid” top=”20″ bottom=”20″]
[tie_full_img]
खैरी वनबाह गुर्जर बस्ती वर्ष 1975 में बसी थी, तब से यहां बिजली का कनेक्शन नहीं दिया गया। इसकी वजह इस बस्ती का वन क्षेत्र में होना बताया जाता है। बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था सोलर ऊर्जा से की गई है। स्थानीय निवासी बताते हैं, सोलर लाइट से पंखे नहीं चलते। मौसम खराब होता है तो बैटरी रीचार्ज नहीं हो पाती। एक घर पर लगे सोलर पैनल। फोटो- राजेश पांडेय[/tie_full_img]
[divider style=”solid” top=”20″ bottom=”20″]
[tie_full_img]
खैरी वनबाह क्षेत्र में रुस्तम शाम के वक्त ढेर से पुआल निकाल रहे हैं। कुछ देर में ही पशु चरकर लौटने वाले हैं। सभी पशु अपने बाड़ों के पास पहुंच जाएंगे, तब रुस्तम और अन्य लोग उनको खाने के लिए पुआल देंगे। फोटो- राजेश पांडेय[/tie_full_img]
[divider style=”solid” top=”20″ bottom=”20″]
[tie_full_img]

बनवाह क्षेत्र की गुर्जर बस्ती में शाम का वक्त है और दिनभर नदी के पास चरने के बाद पशु अपने डेरे में पहुंच रहे हैं। पशुपालन यहां का प्रमुख व्यवसाय है। सबसे बड़ी बात यह है कि गुर्जर अपने पशुओं को नहीं बांधते। शाम के बाद ये अपने बाड़े में आ जाते हैं, जिसको लकड़ियों की बल्लियों से घेर दिया जाता है। फोटो- राजेश पांडेय
[divider style=”solid” top=”20″ bottom=”20″][tie_full_img]
[tie_full_img]
देहरादून स्थित डोईवाला नगर से लगभग आठ किमी. दूर स्थित खैरीबनवाह क्षेत्र की गुर्जर बस्ती और रेलवे लाइन के बीच एक जलधारा बहती है, जो नलोंवाली देवी मंदिर के आसपास स्थित जल स्रोतों से बनी है। इन दिनों इसमें पानी है, पर गर्मियों में यह सूख जाती है। बरसात में यह भरी रहती है। करीब तीन किमी. चलकर सुसवा नदी में मिल जाती है। नहर को पार करने के लिए लकड़ियों को बांधकर इस तरह के पुल बनाए गए हैं। जब इस नहर में पानी नहीं होता, तब यहां पशुओं को हैंडपंप चलाकर पानी पिलाया जाता है। फोटो- राजेश पांडेय[/tie_full_img]
[divider style=”solid” top=”20″ bottom=”20″]
[tie_full_img]
खैरी वनबाह क्षेत्र स्थित गुर्जर बस्ती में पशुओं के लिए भूसा और आहार रखने के भंडार, जिनको लकड़ी, फूस और टीन से बनाया गया है। यहां पक्का निर्माण करने की मनाही है।फोटो- राजेश पांडेय [/tie_full_img]
[divider style=”solid” top=”20″ bottom=”20″]
[tie_full_img]
खैरी वनबाह क्षेत्र स्थित गुर्जर बस्ती में पशुओं के बाड़े नहर के पार बनाए गए हैं। फोटो- राजेश पांडेय [/tie_full_img]
[divider style=”solid” top=”20″ bottom=”20″]
[tie_full_img]
खैरी वनबाह क्षेत्र स्थित गुर्जर बस्ती में पशुपालन के साथ खेती भी की जाती है। इन दिनों गेहूं की फसल लहलहा रही है। गेहूं के बीच सरसों भी दिख रही है। फोटो- राजेश पांडेय [/tie_full_img]
[divider style=”solid” top=”20″ bottom=”20″]
[tie_full_img]
खैरी वनबाह क्षेत्र स्थित गुर्जर बस्ती में पशुपालन के साथ कुट्टी यानी चारा काटने की मशीन। यह मशीन जेनरेटर से चलती है। यहां बिजली नहीं। साेलर ऊर्जा से यह मशीन नहीं चल सकती। यहां पशुओं की संख्या अधिक है,इसलिए इस मशीन से चारा काटा जाता है। फोटो- राजेश पांडेय[/tie_full_img]
[divider style=”solid” top=”20″ bottom=”20″]
[tie_full_img]
खैरी वनबाह गुर्जर बस्ती में 65 वर्षीय गुलाम रसूल यहां तब से रह रहे हैं, जब से बस्ती बसाई गई थी। बताते हैं, वो अपने दादाजी और पिताजी के साथ यहां आकर रहने लगे थे। तब उनकी उम्र 17 वर्ष होगी। कहते हैं, मैंने अपनी जिंदगी में बिजली और पानी का कनेक्शन नहीं देखा। बिजली के लिए सोलर लाइट लगाई है, जिससे पंखे नहीं चल पाते। छोटे बच्चों को बहुत परेशानी होती है। पानी के लिए हैंडपंप लगाए हैं। सामने नहर सूख जाती है, तब हैंडपंप चलाकर पशुओं को पानी पिलाते हैं। फोटो- राजेश पांडेय[/tie_full_img]
[divider style=”solid” top=”20″ bottom=”20″]
[tie_full_img]
खैरी वनबाह क्षेत्र स्थित गुर्जर बस्ती के पास ही उन स्रोतों के पास बने लकड़ी के पुल पर बैठे किशोर, जहां से जलधारा निकलती है। यह जलधारा ही गुर्जर बस्ती के पास से होते हुए सुसवा नदी में मिलती है। फोटो- राजेश पांडेय[/tie_full_img]
[divider style=”solid” top=”20″ bottom=”20″]
[tie_full_img]
खैरी निवासी शबीर अहमद पशुपालन के साथ फैब्रीकेशन वर्क करते हैं। शबीर गुर्जर समुदाय के मुद्दों को विभिन्न मंचों पर उठाते हैं। उनका कहना है, गुर्जर युवाओं का अपने पारंपरिक व्यवसाय पशुपालन से मोहभंग हो रहा है। युवा विभिन्न सरकारी एवं निजी सेवाओं में हैं। वो कहते हैं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं का कौशल विकास करना चाहिए। फोटो- राजेश पांडेय[/tie_full_img]
[divider style=”solid” top=”20″ bottom=”20″]
[tie_full_img]
सामाजिक मुद्दों के पैरोकार मोहित उनियाल ने मंगलवार शाम गुर्जर बस्ती में लोगों से मुलाकात की और वहां की दिक्कतों के बारे में बात की। फोटो- राजेश पांडेय[/tie_full_img]



