पृथ्वी की कैसी छवि

Rajesh Pandey

उमेश राय
धरा का धैर्य चुक गया है,
अनाचार असीम जो हो गया है यहाँ…
भोगवादी जीवन ने सारे वन-मधुवन छीन लिए हैं,
काया हो चुकी है छायाविहीन.
मर्यादाएं जब भग्न हो जाती हैं बेतरह,
बेहतरी का प्रकाश तब बन जाता है काश!

फिर,कालिमा का छा जाना तय है,
धरा के आकाश में.
पादप-पेड़ का घटते जाना,
कंक्रीट का बढ़ता फैलाव,
प्लास्टिक का सटीक भय,
शुद्धता का होता ह्रास.

लोभ की मानसिकता में भला का भाव होता ही नहीं,
धन का मन शुभ का सुमन नहीं खिला सकता…
इसीलिए,करुणा-प्रेम-सेवा का अभाव है हर जगह,
शांति,आनंद,सृजन लुप्तप्राय हैं यहाँ.
पृथ्वी का स्त्रीत्व,द्वैतवादी मानस से हताहत है,
क्षत-विक्षत….

प्रेम सौदा नहीं सौदागर!
सर्वस्व समर्पण का यह सुघर-दर.
प्रदूषित हृदय,सुवासित कैसे हो सकता है?
वह तो दुर्गंध को बटोरता – फैलाता है नित-नवीन..

धरा का आधार प्रेम है मनुज!
संवेदनहीन व नेहविहीन जीवन,
जिंदगी को बंदगी से दूर ,
गंदगी से करता है युक्त,
जहाँ जीवन,रिसता है, खिसकता है….
धीरे-धीरे मृत्यु की ओर.

मैं, शव नहीं, शिव का सद्भावी हूँ,
मेरी पृथ्वी! स्त्रीत्व के बहु रूप-रूपाय!
तेरा शुभ से आचमन ही ,
मानवता का है उजला भविष्य …
मैं, यहीं तलाश करता हूँ,
लाश से परे मानवीय आस की.

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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