By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
Reading: दून में सहस्रधारा ही नहीं घुत्तू में भी गंधक जलस्रोत
Share
Notification Show More
Font ResizerAa
NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7
Font ResizerAa
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
  • Advertise
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
- Advertisement -
Ad imageAd image
NEWSLIVE24x7 > Blog > environment > दून में सहस्रधारा ही नहीं घुत्तू में भी गंधक जलस्रोत
environment

दून में सहस्रधारा ही नहीं घुत्तू में भी गंधक जलस्रोत

Rajesh Pandey
Last updated: September 7, 2019 11:25 pm
Rajesh Pandey
10 years ago
Share
SHARE
  • प्रेम पंचोली
  • वैसे तो हिमालय के शिवालिक क्षेत्र में गंधक युक्त पानी के चश्मे (स्रोत) मिलते ही हैं, लेकिन उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी देहरादून में इन चश्मों ने अपनी सुन्दरता से लोगों को आकर्षित किया है। अब हालात इस कदर हैं कि ये गंधकयुक्त पानी के चश्मे प्राकृतिक स्वरूप खोते जा रहे हैं।
    newslive24x7.com/wp-content/uploads/2016/08/PREM-PANCHOLI-PP.jpg
    PREM-PANCHOLI

    भले ही देहरादून से 10 किमी के फासले पर सहस्रधारा पर्यटकों को वर्षभर आमंत्रण क्यों न देता हो पर वर्तमान में सहस्रधारा की ‘गंधकयुक्त जल धारा’ हर साल कम होती जा रही है। सहस्रधारा के अलावा देहरादून से लगभग 30 किमी के फासले पर ‘घुत्तू गंधक पानी’ प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहा है। यह बांदल नदी के जल ग्रहण क्षेत्र में सहस्रधारा से ज्यादा गंधक की मात्रा वाला दूसरा चश्मा है, जो अब तक उपेक्षित है। इसके संरक्षण के लिए कोई कारगर योजना नहीं बनी और न ही इसकी मरम्मत पर कोई काम हुआ। वर्ष 2013 की आपदा और मौसम परिवर्तन के कारण इस चश्मे का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ता ही जा रहा है। इसमें पानी कम होता जा रहा है। यह आपदा और अन्य प्राकृतिक घटनाओं के कारण गाद से भरने लग गया है।

  • ‘घुत्तू गंधक पानी’ तक पहुँचने के लिए प्राकृतिक सौन्दर्य का नजारा पेश आएगा। एक छोटा सा ट्रैकिंग रूट, बांदल नदी का किनारा लोगों को बरबस आकर्षित करते हैं। माल देवता के पास सत्यौ गाड़ और बांदल नदी का संगम भी देखते ही बनता है। सत्यौ गाड़ और बांदल नदी माल देवता के पास संगम के बाद सौंग नदी का रूप ले लेते हैं। सत्यौ गाड़ में गर्मियों में नाममात्र पानी रह जाता है, लेकिन बांदल नदी के कारण माल देवता से आगे सौंग नदी का प्रवाह बना रहता है। अर्थात सौंग नदी में भी गंधक की मात्रा है।    देहरादून से 30 किमी दूर बांदल घाटी में ग्राम पंचायत घुत्तू की सीमा में यह गंधकयुक्त चश्मा पर्यटकों की नजरों से आज भी ओझल है। विडम्बना ही है पर्यटन की अपार संभावनाओं के बाद भी इस तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसके पानी से स्नान करने से त्वचा संबंधी रोगों से मुक्ति मिलती है।
    GHUTTU
    घुत्तू गंधक जलस्रोत, देहरादून

    घुत्तू, द्वारा, तमोली, क्यारा के साथ ही नजदीक के हल्द्वाड़ी, रंगड़गाँव समेत क्षेत्र के तमाम गाँवों के लोग त्वचा संबंधी बीमारियाँ होने पर इसी स्रोत की शरण में जाते हैं। इस चश्मे से गंधकयुक्त पानी निकलने के कारण क्षेत्रवासियों ने इस जगह का नाम ‘गंधक पानी’ ही रख दिया है।मालदेवता से बांदल नदी के किनारे-किनारे 15 किमी की दूरी तय कर इस स्थल तक पहुँचा जा सकता है। परन्तु यह ध्यान रखना होता है कि माल देवता से ‘घूत्तू गंधक पानी’ तक पहुँचने के लिए जाने वाली सड़क थोड़ी सी बारिश होने पर कभी भी नदी में तब्दील हो सकती है। इसलिये ‘घुत्तू गंधक पानी’ तक पहुँचने के लिये पैदल जाना ही ज्यादा सुरक्षित है। यह एक बेहतर ट्रैकिंग रूट भी है। प्राकृतिक नजारों से भरा यह स्थल अभी तक पर्यटकों की निगाह से दूर है।

  • शासन-प्रशासन की ओर से इस दिशा में कोई प्रयास भी होते नजर नहीं आ रहे हैं। रंगड़गाँव के प्रधान भरत सिंह बताते हैं कि इस चश्मे के पानी में सहस्रधारा की अपेक्षा गंधक की मात्रा अधिक है। दो दशक पूर्व पर्यटन विभाग के तत्कालीन महानिदेशक एसएस पांगती ने  इसे पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की बात कही थी, लेकिन यह कोरी साबित हुई। इसके अलावा राज्य बनने के बाद मंत्रियों नवप्रभात और मातबर सिंह कंडारी ने क्षेत्र के लोगों को ऐसा ही भरोसा दिया था, लेकिन अब तक कुछ होता नजर नहीं आ रहा। यदि इस चश्में के संरक्षण पर कार्य नहीं हुआ तो जल्दी ही यह सूखने की कगार पर आ जाएगा।
  • ग्रामीण विक्रम सिंह पंवार का कहना है कि उनके लिए तो यह पानी का चश्मा प्रकृति का दिया हुआ महत्वपूर्ण उपहार है। क्योंकि उनके क्षेत्र में त्वचा जैसी बीमारी इसके कारण पनप नहीं सकती और न ही इस क्षेत्र में त्वचा से संबंधित रोगी हैं। वह कहते हैं इस चश्में का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ता जा रहा है।
    अब इस क्षेत्र में एक तरफ पर्यटकों का आना-जाना और दूसरी तरफ वन कानूनों की सख्ती से भी यह प्राकृतिक जलस्रोत लोगों के अधिकार क्षेत्र से बाहर होने लग गया है। लोग बिना ‘वन विभाग’ की अनुमति के इस क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और दोहन नहीं कर सकते।
  • हाल में हुई भारी बरसात के कारण बांदल नदी का जलस्तर इतना बढ़ गया था कि इस क्षेत्र में जान-माल की तो कोई हानि नहीं हुई, लेकिन प्राकृतिक संसाधन जैसे जलस्रोतों ने अपना रास्ता बदल दिया। जिसकी मार ‘घुत्तू गंधक पानी’ पर भी पड़ी।हालात इस कदर हैं कि न तो लोग इस चश्मे की नियत समय में मरम्मत का काम कर पा रहे हैं और न ही सरकार कोई खास कदम उठा रही है।  कुल मिलाकर वन कानूनों के कारण ‘घुत्तू गंधक पानी’ का चश्मा भविष्य में अपने प्राकृतिक स्वरूप में आएगा कि नहीं,यह अहम सवाल है।

     

     

 

 

You Might Also Like

धूमधाम से मना स्वतंत्रता दिवस समारोह, सीएम ने बताईं उत्तराखंड की उपलब्धियां
भागीरथ मोबाइल एप पर साझा करें संकटग्रस्त जल स्रोतों की जानकारी
गंगा में मिलने वाले 132 नालों को एसटीपी से स्वच्छ किया गयाः सीएम
FDA raids Uttarakhand: ऋषिकेश और हरिद्वार में FDA की छापेमारी, 5 दवा विक्रेता फर्मों के लाइसेंस निरस्त करने की सिफारिश
पौड़ी गढ़वाल के पोखड़ा डिग्री कालेज में नौकरी का अवसर
TAGGED:DehradunGhuttu water sourceNaturalNatureSahashtradharasulfur water source in GhuttuUttarakhand
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Email Copy Link Print
ByRajesh Pandey
Follow:
newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
Previous Article बड़े काम की चीज है ये कढ़ी पत्ता
Next Article वो छोटे–छोटे पौधे
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://newslive24x7.com/wp-content/uploads/2026/04/CM-Dhami-4-Year-Journey-2026-2-Min-1.mp4

Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

Prem Nagar Bazar Doiwala Dehradun
Prem Nagar Bazar Doiwala Dehradun Doiwala, PIN- 248140
9760097344
© 2026 News Live 24x7| Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?