बेस अस्पताल में गंभीर पीलिया और रक्त संक्रमण से पीड़ित नवजात का दो बार रक्त बदलना पड़ा, डॉक्टरों ने बचाया जीवन

Rajesh Pandey

श्रीनगर, गढ़वाल, 02 सितंबर , 2026ः जन्म के बाद पीलिया और शरीर में टूटती रक्त कोशिकाओं व गंभीर रक्त संक्रमण से पीड़ित नवजात के जीवन पर खतरा मंडराने लगा था। हेमवती नंदन बहुगुणा बेस अस्पताल श्रीनगर के बाल रोग विभाग की चिकित्सकीय टीम ने समय पर उपचार और लगातार निगरानी करके नवजात को नया जीवन देने में सफलता हासिल की। गंभीर स्थिति में शिशु का दो बार रक्त बदलना (एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन) पड़ा। बच्चे को दो बार कृत्रिम सांस देने वाली मशीन पर भी रखा गया। अब पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद नवजात को अस्पताल से छुट्टी दी गई है। बच्चे को स्वस्थ देखकर पूरे परिवार ने चिकित्सकों एवं अस्पताल स्टाफ का आभार जताया है।

मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सीएमएस रावत एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एएन पांडेय ने वार्ड में पहुंचकर नवजात के परिजनों से मुलाकात की। बीती 16 अगस्त को बेस अस्पताल श्रीनगर में शिशु का जन्म हुआ था। बच्चे के स्वास्थ्य परीक्षण में सामने आया कि मां का रक्त समूह आरएच नैगेटिव, जबकि बच्चे का रक्त समूह आरएच पॉजिटिव है। दोनों के रक्त समूह में असंगति के कारण नवजात के शरीर में रक्त की लाल कोशिकाएं तेजी से टूटने लगीं। इसके चलते, बच्चे के खून में बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ती गई और पीलिया गंभीर रूप लेने लगा।

चिकित्सकों के अनुसार, मां और बच्चे के रक्त समूह में इस तरह की असंगति को आरएच असंगति कहा जाता है। नवजात में यह स्थिति गंभीर होने पर तत्काल चिकित्सकीय उपचार और लगातार निगरानी की आवश्यकता होती है। बच्चे को बेस अस्पताल के बाल रोग विभाग के नवजात गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती कराया गया।

बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सीएम शर्मा एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंकिता गिरी की देखरेख में नवजात का उपचार शुरू किया गया। डॉक्टरों ने बच्चे की स्थिति पर लगातार नजर रखी। जांच के दौरान बच्चे में गंभीर रक्त संक्रमण की समस्या भी सामने आई, जिससे उसकी स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई।

डॉ. अंकिता गिरी ने बताया, बच्चे का पीलिया लगातार बढ़ रहा था और रक्त की कोशिकाएं तेजी से टूट रही थीं। गंभीर स्थिति को देखते हुए नवजात का दो बार एक्सचेंज ट्रांसफ्यूजन यानी रक्त का आदान-प्रदान किया गया। इसके साथ ही, आईवीआईजी दवा की दो खुराक भी दी गईं।

बच्चे की हालत गंभीर होने पर उसे दो बार कृत्रिम सांस देने वाली मशीन पर रखा गया। चिकित्सकों की लगातार निगरानी और उपचार के बाद धीरे-धीरे बच्चे की स्थिति में सुधार आने लगा।

डॉ. अंकिता गिरी ने बताया कि नवजात में पीलिया का समय रहते उपचार बेहद जरूरी है। यदि खून में बिलीरुबिन की मात्रा बहुत अधिक बढ़ जाए और उसे समय पर नियंत्रित न किया जाए तो बिलीरुबिन दिमाग तक पहुंचकर उसे नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसी स्थिति में बच्चे को गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या होने के साथ ही उसके जीवन पर भी खतरा पैदा हो सकता है।

उन्होंने बताया कि इस नवजात को समय पर अस्पताल लाकर उपचार मिलने से गंभीर स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिली। लगातार उपचार और निगरानी के बाद अब बच्चे की हालत में काफी सुधार हुआ है।

कई दिनों तक चले उपचार के बाद नवजात की हालत में लगातार सुधार हुआ। बच्चे का वजन बढ़ने लगा और उसने मां का दूध भी पीना शुरू कर दिया। स्वास्थ्य में संतोषजनक सुधार के बाद चिकित्सकों ने बच्चे को अस्पताल से छुट्टी दी है। नवजात के परिवार ने बाल रोग विभाग के चिकित्सकों और पूरे अस्पताल स्टाफ की मेहनत एवं तत्परता के लिए उनका आभार जताया।

चिकित्सा सेवा में डिप्टी एमएस डॉ दीपा हटवाल, बाल रोग विभाग के एसआर डॉ. अजय गोस्वामी, जेआर डॉ. महेश, डॉ. धीरज, डॉ. अंजलि एवं डॉ. दानिश सहित नर्सिंग अधिकारियों ने सहयोग दिया।

आरएच नैगेटिव महिलाओं को गर्भावस्था में विशेष सावधानी की सलाह
बाल रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंकिता गिरी ने आरएच नैगेटिव रक्त समूह वाली महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा, ऐसी महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार एंटी-डी का टीका जरूर लगवाना चाहिए। एंटी-डी का टीका आरएच असंगति के कारण भविष्य में होने वाली जटिलताओं के जोखिम को कम करने और नवजात को जन्म के बाद होने वाली गंभीर बीमारी से बचाने में मदद करता है। इसलिए आरएच नैगेटिव रक्त समूह वाली गर्भवती महिलाओं को नियमित जांच कराने के साथ विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह का पालन करना चाहिए।

”बाल रोग विभाग की चिकित्सकीय टीम द्वारा नवजात को नया जीवन देने की बधाई। समय पर उपचार, चिकित्सकों की तत्परता व मेहनत और बेहतर चिकित्सा सेवाओं के चलते अब बेहतर से बेहतर चिकित्सीय उपचार जिला रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी व पौड़ी के दूरदराज दुर्गम स्थान से आए सभी मरीजों को मिल रहा है। बेस अस्पताल में सभी मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल की टीम पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।” डॉ. सीएमएस रावत, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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