कहानीः चूहे की मदद से जान बचाकर भागी बिल्ली

Rajesh Pandey
Short stories

एक बार एक बिल्ली शिकारी के जाल में फंस गई। एक चूहा बिल से बाहर निकलकर जाल तक पहुंच गया। चूहे ने बिल्ली को जाल में फंसा देखा तो निडर होकर जाल के पास ही खेलने लगा। तभी उसने देखा कि एक नेवला वहां पहुंच गया, जो चूहे को खाना चाहता था। पास ही पेड़ पर बैठा उल्लू उन दोनों की तरफ घूर रहा था। उल्लू नेवला और चूहे दोनों को खाना चाहता था।

चूहे ने सोचा कि थोड़ी देर में बिल्ली को शिकारी ले जाएगा। नेवला उस पर झपटने की कोशिश करेगा और उल्लू उन दोनों (नेवला और चूहा) दोनों को अपना भोजन बना लेगा। चूहे ने विचार किया कि क्यों न बिल्ली को बचा लिया जाए। बिल्ली की शह पर वह अपने बिल में पहुंच जाएगा लेकिन इससे पहले बिल्ली से वादा कराना होगा कि वह उसकी जान बचाएगी।

चूहा जाल में फंसी बिल्ली से बोला कि अगर तुम वादा करती हो कि मुझे नेवला और उल्लू से बचाओगी, तो मैं जाल काटकर तुम्हारी जान बचा लूंगा। अगर नहीं, तो थोड़ी देर में शिकारी तुम्हें यहां से उठा ले जाएगा। बिल्ली ने चूहे की बात मान ली। चूहे ने तेज दांतों से धीरे-धीरे जाल को काटना शुरू कर दिया। उसने बिल्ली को आजाद करने से पहले शिकारी के आने का इंतजार किया। शिकारी को आते देखकर ही उसने बिल्ली को आजाद कर दिया। दहशत के मारे बिल्ली ने चूहे की परवाह नहीं की और तेजी से भागने लगी।

चूहा भी अपनी जान बचाने के लिए किसी तरह अपने बिल तक दौड़ लिया। बिल्ली को आजाद देखकर नेवला भी भाग गया। यह नजारा देखकर उल्लू निराश होकर रह गया। उल्लू ने स्वयं से कहा, कोई बात नहीं इस चूहे को तो फिर देख लूंगा। एक दिन बिल्ली ने बिल में बैठे चूहे को आवाज लगाई, दोस्त- बाहर आकर मेरे साथ खेलो। चूहे ने भीतर से ही जवाब दिया। अब तुम मेरी दोस्त नहीं हो। उस समय हमारी दोस्ती एक दूसरे की जान बचाने के लिए हुई थी। अब न तो तुम्हारी जान को कोई खतरा है और न ही मेरी जान को। अगर मैं बाहर आया तो तुम मुझे खा जाओगी।

Share This Article
Follow:
newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *