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देहरादून के बाल चित्रकार शिवांश की पेंटिंग ने जीता बेस्ट एंट्री का ख़िताब

हार्पिक इंडिया व सीएनएन न्यूज 18 ने मिलकर मिशन पानी कला प्रतियोगिता में जीता अवार्ड
देहरादून। हार्पिक इंडिया व सीएनएन न्यूज 18 ने मिलकर मिशन पानी कला प्रतियोगिता का आयोजन किया, जिसमें देशभर से स्कूली विद्यर्थियों ने प्रतिभाग किया। इस अभियान के लिए बच्चों को जल संरक्षण पर पेंटिंग बना कर इंस्टाग्राम टैग से प्रतियोगिता में हिस्सा लेना था।
शिवांश के आर्ट ट्यूटर ऋषिकेश के प्रसिद्ध चित्रकार राजेश चंद्र ने अपने इंस्टाग्राम पर शिवांश की पेंटिंग को साझा किया। सर्वश्रेष्ठ कलाकारी को सीएनएन न्यूज 18 चैनल पर जल संरक्षण चर्चा में दिखाया गया।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत,फ़िल्म अभिनेत्री रवीना टंडन व लोकसभा सांसद बाबुल सुप्रियों की इस चर्चा के बाद होनहार कलाकारों की चित्रकारी दिखाई गई, जिसमें उत्तराखंड देहरादून से शिवांश की पेंटिंग को दिखाया गया, जिसका शीर्षक -जल ही जीवन है।
शिवांश कक्षा सात के विद्यार्थी हैं। शिवांश अपनी माता जी श्रीमती सुमन जी से पेंटिंग सीखते हैं। शिवांश के पिता हंसराज जी, पुलिस मुख्यालय उत्तराखंड में तैनात है।
उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले विश्व समुद्र दिवस के लिए बनाई शिवांश की पेंटिंग को केंद्र सरकार के जल संरक्षण अभियान नमामि गंगे व जल शक्ति मंत्रालय ने भी सोशल मीडिया पर सरहाना कर साझा किया।
उन्होंने मिशन पानी अभियान का आभार व्यक्त करते हुए बताया की इस तरह की प्रतियोगिताओं का आयोजन होना चाहिए, जहां बच्चे अपने कलाकारी के साथ समाज व पर्यावरण के लिए एक एक सन्देश दे सकें।
शिवांश ने अभी एक और पेंटिंग प्रतियोगिता – पर्यावरण संरक्षण में मेरा सहयोग में हिस्सा लिया है, जिसके परिणाम का सभी बहुत बेसब्री से इन्तेजार कर रहे है। सभी ने सपरिवार पहाड़ी कलाकार राजेश चन्द्र का आभार व्यक्त किया है कि वो हर प्रतिभावान बच्चों को इस तरह की प्रतियोगिताओं में शामिल करा कर उनके हुनर को पहचान देते हैं।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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