सपनों के साथ याद बनती सड़कें !

Rajesh Pandey
  • जे. पी. मैठाणी

सड़कें धूल, मिटटी, गारे और फिसलन से भरी
दौड़ती रही – भागती रही – भागती रही और दौड़ती रही ..
समय के साथ और कभी उसको पीछे छोड़ती हुई सड़कें !
सड़कें मंजिलों तक ले जाने का वायदा करती
रास्तों में कभी भटक जाती सड़कें !

ये क्रम कभी छोटा होता कभी बड़ा होता
सड़कें – सपनों के साथ – आपने के साथ ….
गायब हो जाती
फिर छोर से उभर आती क्षितिज की लाइन
और उस पर उभर आती धूमिल होती सड़कें !

जंगलों के बीच -विशाल दिखती शहरों में दुबक जाती सड़कें !
यादों के साथ सपने बनती और सपनों के साथ याद बनती सड़कें !
दोस्तों के साथ – स्मृति और समय के साथ लकीर बनती सड़कें !
बतियाती, फोनियाती ,भटकती और भटकाती – मंजिलों के पास
ले जाती सर्पीली सड़कें !

घरों से पलायित समाज को गाँव की पगडंडियों से जोड़ती सड़कें !
पीढ़ियों के साथ बिताये गए समय की बात सुनाती सड़कें ..
तुम कभी इतनी शांत क्यूँ हो जाती हो और कभी बेहद हल्ले से भरी क्यूँ !
तुम कभी सहमा देती ढलान पर और कभी आगोश में ले लेती !
सड़क तुम एक पूरा मनोविज्ञान हो – लक्ष्य हो – इतिहास हो और भूगोल भी !

तुम्हारी गति से अधिक भागते लोगों और समय को तुम ठोकर देती !
समझ देती हो – सिखाती हो जीवन के पाठ
प्रेम के गीत – खुशियों के मायने और पीछे छूटते समय की याद !

वर्षों से सभ्यता के विकास के साथ – तुम्हारा स्वरुप बदला
पर, सड़क तुम्हारा काम नहीं बदला तुम लोगों को जोड़ती हो
प्रेम उपजाति और पनपाती हो – मित्रों को जोड़ती हो !
सड़क तुम सड़क ही रहना – बदल मत जाना समय के फेर में !
कि,तुम्हारे बिना कई मुसाफिर अपनी मंजिलों तक पहुंचे ही ना..

वर्ष के जाने की पीड़ा के माहौल में – तुम खुशियों की शीत भरे
गीतों की जनक बन जाना
तुम पहाड़ की उष्मा – जंगलों की जीवन रेखा और दोस्तों का प्रेम बन जाना !
तुम भूलना मत तुम सड़क हो …
मानव को उसकी मंजिल तक ले जाने वाली हो तुम
सड़क !

 

Share This Article
Follow:
newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *