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उत्तराखंड में चिह्नित 180 में से 134 जगह पार्किंग के लिए सही पाई गईं

मुख्य सचिव स्तर से पार्किंग परियोजना की प्रगति की समीक्षा प्रत्येक सप्ताह की जाएगी

देहरादून। मुख्य सचिव डॉ. एस. एस. संधु ने गुरुवार को सचिवालय में प्रदेश में प्रस्तावित नए पार्किंग परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। पूर्व में आयोजित बैठक में सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने जनपदों में पार्किंग के लिए जगह चिन्हित कर, फिजिबिलिटी जांच करवाने के निर्देश दिए थे।

इस क्रम में जनपदों से 180 स्थान चिन्हित किए गए थे, जिसमें से 134 को फिजिबिलिटी रिपोर्ट में पार्किंग के लिए उपयुक्त पाया गया है।मुख्य सचिव ने अधिकारियों को सभी पार्किंग के लिए जगह चिन्हीकरण से लेकर संचालन तक के प्रत्येक स्टेप की तिथियां अभी से निर्धारित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव स्तर से पार्किंग परियोजना की प्रगति की समीक्षा प्रत्येक सप्ताह की जाएगी। उन्होंने पार्किंग प्रोजेक्ट्स को उनकी आवश्यकता और महत्व के अनुसार ए और बी कैटेगरी में वर्गीकृत करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि जिन पार्किंग के निर्माण में कोई समस्या नहीं है, उनमें तुरंत कार्य शुरू कर दिया जाए। किसी भी प्रोजेक्ट के लिए बजट की कमी नहीं होने दी जाएगी।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द वर्द्धन एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारी सहित अन्य संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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