- नई दिल्ली में ‘पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन का भविष्य’ विषय पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन, एनजीटी मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च
- दो दिवसीय सम्मेलन में वैश्विक हितधारक एक साथ आकर वैश्विक पर्यावरणीय और जलवायु चुनौतियों पर सहयोगात्मक कार्रवाई पर विचार-विमर्श कर रहे
प्रधानमंत्री ने प्रकृति के साथ राष्ट्र के गहरे ऐतिहासिक जुड़ाव के बारे में बताते हुए इस बात पर बल दिया कि किस प्रकार प्राचीन सांस्कृतिक ज्ञान आधुनिक जलवायु समाधानों में सहायक है और वैश्विक सामूहिक कार्रवाई को प्रेरित कर रहा है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण मिशन को दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण की सराहना की और आयोजकों को बधाई दी।
भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने उद्घाटन भाषण में भारत के दीर्घकालिक पर्यावरण न्यायशास्त्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने दशकों से प्रदूषण मुक्त पर्यावरण के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी है और एहतियाती सिद्धांत, प्रदूषक भुगतान सिद्धांत, पूर्ण दायित्व और सार्वजनिक विश्वास सिद्धांत जैसे सिद्धांत विकसित किए है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि भारतीय जलवायु न्यायशास्त्र ने जलवायु संबंधी अधिकारों को संवैधानिक रूप से अधिक स्पष्ट किया है, यह मानते हुए कि जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव समानता, आजीविका और स्वास्थ्य से संबंधित मौलिक अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने वैश्विक पर्यावरण प्रबंधन को मजबूत करने के लिए सामूहिक न्यायिक बुद्धिमत्ता, वैज्ञानिक ज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का आह्वान किया।
देश में गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोत विद्युत क्षमता का 54.18 प्रतिशत
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं के बारे में बताया कि गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोत अब स्थापित विद्युत क्षमता का 54.18 प्रतिशत हिस्सा हैं। यह 2030 के 50 प्रतिशत के लक्ष्य को निर्धारित समय से नौ वर्ष पहले ही पार कर चुका है। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापित क्षमता में भारत वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है और सौर ऊर्जा के विकास के मामले में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है जो दर्शाता है कि आर्थिक विकास और जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपाय साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।
वन्यजीव और पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण में भारत की उपलब्धियां
- चीता के सफल पुनर्वास कार्यक्रम और गोडावन के संक्षरण, प्रजनन कार्यक्रम से लेकर जंगल, घास के मैदान और आर्द्रभूमि के संरक्षण और पुनर्स्थापन
- भारत का वन और वृक्ष आवरण 8.27 लाख वर्ग किलोमीटर तक पहुंच गया है
- संयुक्त राष्ट्र एफएओ के वैश्विक वन संसाधन आकलन 2025 के अनुसार वार्षिक शुद्ध वन क्षेत्र वृद्धि के मामले में भारत ने वैश्विक स्तर पर अपना तीसरा स्थान बरकरार रखा है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, अंताल्या में होने वाले यूएनएफसीसीसी कॉप 31 को देखते हुए भारत समानता, कार्यान्वयन और कमजोर देशों की जरूरतों पर केंद्रित जलवायु कार्रवाई का समर्थन करना जारी रखेगा। उन्होंने कहा, ऐसे मंच जो विश्वभर के न्यायाधीशों, नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और पेशेवरों को एक साथ लाते हैं, ऐसे समय में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं जब पर्यावरणीय चुनौतियां राष्ट्रीय सीमाओं से परे हैं।
दुनिया के सामने चुनाव विकास और पर्यावरण के बीच नहीं, बल्कि सतत विकास और अस्थिर विकास के बीच है।
भारत के महान्यायवादी आर. वेंकटरमानी ने कहा, कोई भी देश अकेले पर्यावरणीय चुनौती का सामना नहीं कर सकता और वैश्विक कार्रवाई को केवल घोषणाओं तक सीमित न रहकर व्यावहारिक और लागू करने योग्य तंत्रों की ओर बढ़ना होगा।
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि भारत की पहलें न केवल राष्ट्रीय स्तर पर, बल्कि वैश्विक पर्यावरण सहयोग के प्रति भी देश की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। ये पहलें स्वच्छ, हरित, अधिक लचीले और टिकाऊ भारत की व्यापक दृष्टि को प्रतिबिंबित करती हैं। पर्यावरण संरक्षण किसी एक संस्था या क्षेत्र की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह एक सामूहिक राष्ट्रीय और वैश्विक जिम्मेदारी है और पर्यावरण के क्षरण के परिणाम अक्सर उन लोगों पर सबसे अधिक गंभीर रूप से पड़ते हैं जो इसके लिए सबसे कम जिम्मेदार होते हैं।
प्रधानमंत्री ने सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के दौरान राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) मोबाइल एप्लिकेशन भी लॉन्च किया की।
दो दिवसीय सम्मेलन में विश्वभर के 17 देशों के न्यायविद, शिक्षाविद, नीति निर्माता, वैज्ञानिक, पर्यावरण विशेषज्ञ और अन्य हितधारक, साथ ही संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन एक साथ आ रहे हैं। यह आयोजन न्यायिक, वैज्ञानिक, नीतिगत और संस्थागत सर्वोत्तम व्यवस्थाओं पर संवाद और ज्ञान के आदान-प्रदान पर केंद्रित है, साथ ही पर्यावरण और जलवायु संबंधी गंभीर चुनौतियों पर सहयोगात्मक कार्रवाई को प्रोत्साहित करता है। साभार- पीआईबी



