जानिये आपके किचन में है बीमारियों का डेरा

Rajesh Pandey

रसोई, बाथरूम, टायलेट से निकलने वाले पाइपों के बाद पूरे घर में कोलेफॉर्म बैक्टीरिया का दूसरा बड़ा ठिकाना क्या हो सकता है। अगर हम किसी जर्मनी में हुई एक रिसर्च के आधार पर वो वस्तु या स्थान बताएं तो आप चौंकिएगा नहीं। हम बात कर रहे आपकी रसोई में इस्तेमाल होने वाले स्पंज की, जिससे खाने पीने के बर्तन साफ किए जाते हैं। इससे घबराने की नहीं बल्कि सतर्क होने की जरूरत है।

जर्मनी के कई संस्थानों में शोधकर्ताओं ने एक नई स्टडी की। उन्होंने रसोई के स्पंज की बैक्टीरिया फैलाने और इकट्ठा करने की क्षमता की जांच की। यह भी जांच की गई कि ये बैक्टीरिया रोग फैलाने में कितने सक्षम हैं। पॉपुलर साइंस में हाल में ही प्रकाशित रिपोर्ट में फुर्टवैंगन यूनिवर्सिटी के स्टडी ऑथर मार्कस एगर्ट ने कहा कि जांचकर्ताओं के ग्रुप ने जर्मनी के विलिंगन-स्वेनिंगेन क्षेत्र में घरों से इकट्ठा किए किचन स्पंजों का विश्लेषण किया।

शोधकर्ताओं ने उन जीवाणुओं के डीएनए और आरएनए की जांच की, जो सामान्य तौर पर घरों में मौजूद सफाई उपकरणों में डेरा जमाए रहते हैं। वह बताते हैं कि हमने 14 स्पंजों की जांच में 362 तरह के बैक्टीरिया का पता लगाया। स्पंज टिश्यू के प्रति वर्ग सेमीय में 54 बिलियन बैक्टीरिया की मौजूदगी मिली। यानि बैक्टीरिया का घनत्व 54 बिलियन प्रति वर्ग सेमी. रहा, जो मल के नमूने के माइक्रोबियल घनत्व के समान है।

उन्होंने बताया कि स्पंज के एक वर्ग सेमी. पर मौजूद जीवाणुओं की संख्या धरती की कुल आबादी का सात या आठ गुना होती है। अगर हम दो वर्ग सेमी. हिस्से पर रहने वाले जीवाणुओं की संख्या बात करें, तो यह धरती पर अभी तक रहे मनुष्यों की संख्या के बराबर होगी।

स्टडी में पता चला है कि स्पंज में मिले दस में से पांच बैक्टीरिया में रोगजनित हैं। ये इंसानों में संक्रमण फैला सकते हैं। खासकर कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग जैसे बुजुर्ग, बच्चे और रोगियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। रिपोर्ट बताती है कि दस बैक्टीरिया में से दो का रोगजनित क्रिसेबैक्टीरियम होमिनिस और मोराक्सेल ओस्लोंसिस से गहरा जुड़ाव पाया गया। नियमित रूप से साफ होने वाले स्पंज में भी इनका अनुपात ज्यादा मिला।

एगर्ट कहते हैं कि हम मानते हैं कि स्पंज को साफ रखने की सामान्य तकनीक से उसमें मौजूद बैक्टीरिया नहीं मारे जा सकते। स्पंज की सफाई के बाद भी उसमें बैक्टीरिया बच जाते हैं और फिर तेजी से फैलकर इनकी संख्या पहले से ज्यादा हो जाती हैं। यह ठीक उसी तरह से है, जैसे एंटीबायोटिक के इस्तेमाल के बाद शरीर में मौजूद कुछ बैक्टीरिया दवा के खिलाफ अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर जीवित रह सकते हैं।

अभी शोधकर्ताओं को अगले चरण में रसोई स्पंज में मौजूद बैक्टीरिया से वास्तविक रूप से कौन से रोग हो सकते हैं, इसकी जांच करनी है। साथ ही स्पंज की सफाई तकनीकी का पता लगाकर इसके प्रभावों की जांच होनी है। अभी तो यह ही कहा जा सकता है कि रसोई स्पंज को समय भीतर बदल लें और रोगमुक्त रहें।

शोधकर्ताओं की सलाह है कि हर सप्ताह रसोई स्पंज को बदलें। खासकर जब आप किसी ऐसे इलाके में रह या कार्य कर रहे हैं, जहां साफ सफाई का ज्यादा ध्यान रखा जाना चाहिेए। या फिर घर में बच्चे, बुजुर्ग या बीमार व्यक्ति रहते हों। एगर्ट कहते हैं कि रसोई स्पंज से घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन रोगजनित बैक्टीरिया के ठिकाने से सतर्क जरूर रहा जाए।

Share This Article
Follow:
newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *