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देहरादून में हुनर हाट, देशभर से पहुंचे 500 से अधिक हुनरमंद

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं केन्द्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने शुक्रवार को रेसकोर्स देहरादून में हुनर हाट मेले का उद्घाटन किया। हुनर हाट मेले में 30 से अधिक राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों से 500 से अधिक हस्त शिल्पकार एवं हुनरमंद शामिल हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री एवं केन्द्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ने विश्वकर्मा वाटिका एवं विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया। 75वें आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर मुख्यमंत्री एवं केन्द्रीय मंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों को भी सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री धामी ने हुनर हाट मेले का आयोजन देहरादून में कराने पर केन्द्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने देवभूमि उत्तराखंड में विभिन्न राज्यों से आए हुनरमंदों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत की दिशा में हुनर हाट मेले का आयोजन एक सराहनीय प्रयास है।

इससे जहां बाजारों को उत्पाद मिलेगा, वहीं उत्पादों को बाजार मिलेगा। वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देने के लिए भी इस तरह के आयोजन महत्वपूर्ण हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में वन डिस्ट्रिक टू प्रोडक्ट को बढ़ावा दिया जा रहा है।

धामी ने कहा कि उत्तराखंड के जनजातीय क्षेत्रों में अनेक हुनरमंद लोग हैं। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री से अनुरोध किया कि इन हुनरमंद लोगों को उत्पादों के लिए बाजार मिल सके, इसके लिए केन्द्र से कोई योजना बनाई जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सरलीकरण, समाधान एवं निस्तारण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उत्तराखंड पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य है। राज्य में पर्यटन को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। केन्द्र सरकार के सहयोग से राज्य में सड़क, रेल एवं हवाई कनेक्टिविटी तेजी से बढ़ी है।

केन्द्रीय मंत्री नकवी ने कहा कि देशभर में हुनर हाट मेलों का आयोजन किया जा रहा है। 30वां हुनर हाट मेले का आयोजन देहरादून में किया जा रहा है। यह मेला 10 दिन तक चलेगा।

उन्होंने कहा कि हुनर हाट के माध्यम से अभी तक लगभग छह लाख शिल्पकारों एवं कारीगरों को रोजगार के अवसर मिले हैं। इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों के हस्तशिल्प कलाओं को देख सकते हैं।

विभिन्न राज्यों के पकवानों के स्टॉल लगाए गए हैं। हुनरमंद लोग वेस्ट को बेस्ट में बदलकर स्वरोजगार को बढ़ावा दे रहे हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि इस तरह के मेलों के आयोजन से हस्तशिल्प एवं हस्तकला को प्रोत्साहन मिलेगा और हुनरमंदों को एक-दूसरे से अनुभवों को साझा करने का मौका भी मिलेगा।

पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि वोकल फॉर लोकल की दिशा में यह अच्छा प्रयास किया है। प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत की दिशा में विभाग योजनाएं चलाकर लोगों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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