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NEWSLIVE24x7 > Blog > CARE > प्रसव के दौरान महिलाओं और नवजात के साथ व्यवहार पर अध्ययन
CAREFeaturedhealthWomen

प्रसव के दौरान महिलाओं और नवजात के साथ व्यवहार पर अध्ययन

Rajesh Pandey
Last updated: March 24, 2022 10:33 pm
Rajesh Pandey
4 years ago
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डब्लूएचओ (World Health Organization) और एचआरपी ( Human Reproduction Program) का एक विशेष सप्लीमेंट हाल ही में बीएमजे ग्लोबल हेल्थ (BMJ Global Health) में प्रकाशित किया गया है, जो प्रसव के दौरान महिलाओं और उनके नवजात शिशुओं के साथ व्यवहार के बारे में बताता है। बुधवार को जारी की गई रिपोर्ट, Dignity and respect in maternity care, में मातृत्व देखभाल के लिए गरिमा व सम्मान पर बल दिया गया है, साथ ही महिलाओं और उनके नवजात शिशुओं की देखभाल को बेहतर बनाने के लिए मार्गदर्शन किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, अधिक से अधिक साक्ष्य बताते हैं कि दुनियाभर में महिलाओं को प्रसव के दौरान अस्वीकार्य दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है। महिलाओं को हर जगह अपने अधिकारों के उल्लंघन का सामना करना पड़ता है – जिसमें निजता का अधिकार, जानकारी प्रदान किए जाने के बाद प्राप्त सहमति का अधिकार तथा प्रसव के दौरान अपनी पसंद के विश्वसनीय साथी के साथ में होने का अधिकार शामिल है।

Women across the 🌐 face unacceptable mistreatment during #childbirth. Women everywhere face violations of their rights – including rights to:
❌ privacy
❌ informed consent
❌ have a trusted companion of choice throughout childbirth

👉 https://t.co/j3sT6XqxxY pic.twitter.com/BUWfrnrPDg

— World Health Organization (WHO) (@WHO) March 23, 2022

यूएन समाचार में प्रकाशित रिपोर्ट में, यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के हवाले से कहा गया है, गर्भवती महिलाओं, किशोरवय लड़कियों, व्यक्तियों और नवजात शिशुओं के साथ बुरा बर्ताव किए जाने की समस्या, दुनियाभर में व्याप्त है। रिपोर्ट के अनुसार, दुर्व्यवहार की वजह से स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास गंभीर रूप से कम हो सकता है, जिसका अर्थ यह हो सकता है कि महिलाओं के जन्म से पहले, जन्म के दौरान और बाद में सुविधा-आधारित देखभाल तक पहुंचने की संभावना कम होती है। इससे महिलाओं और उनके बच्चों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं और यहां तक ​​कि उनकी जान को भी खतरा हो सकता है।

डब्ल्यूएचओ की वेबसाइट पर डब्ल्यूएचओ और ह्यूमन रिप्रोडक्टिव प्रोग्राम के मेडिकल ऑफिसर ओज़गे टुनकाल्प के हवाले से कहा गया है कि प्रसव और प्रसव के बाद सुविधा आधारित देखभाल में सुधार का अनुभव महिलाओं का विश्वास बढ़ाने के लिए आवश्यक है और साथ ही, यह जन्म के बाद गुणवत्तापूर्ण देखभाल को सुनिश्चित करेगा। प्रसव के दौरान दुर्व्यवहार की घटनाओं पर महिलाओं के अनुभवों को बेहतर ढंग से समझने और उनके लिए सुविधाओं में सुधार के लिए तत्काल अधिक शोध और शोध क्षमता को बढ़ाने की आवश्यकता है। यह भी जानना जरूरी है कि खराब अनुभव उनको कैसे प्रभावित करते हैं।

“जब महिलाओं और उनके बच्चों को सम्मानजनक, गुणवत्तापूर्ण, व्यक्ति-केंद्रित देखभाल प्राप्त होती है, तो वो स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से संपर्क और उन तक पहुंचने की अधिक संभावना रखते हैं और स्वास्थ्य-सुविधा में संभावित रूप से जीवन-रक्षक देखभाल तक पहुंचने की अधिक संभावना होती है।

अध्ययन के अनुसार, मानवाधिकार हनन के गम्भीर मामलों में, प्रसव के दौरान बुनियादी देखभाल और मानवीय बरताव, बिना अवगत कराए सिज़ेरियन सर्जरी के लिए प्रसूति कक्ष में ले जाने और बच्चे के जन्म के बाद धन ऐंठने के लिए कई दिनों तक माताओं को भर्ती रखे जाने समेत अन्य समस्याएं हैं। यूएन समाचार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अध्ययन में ऐसे मामलों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है, जिसमें रसूख़ और धनी परिवारों के लिए नर्सरी में बच्चों की अदला-बदली की गई, प्रसव के दौरान पिटाई और अपमान किया गया और जन्म के बाद नवजात शिशु और माताओं को अलग रखा गया।

अध्ययन बताता है, प्रसव के समय अभिभावकों और नवजात शिशुओं के साथ बुरा बरताव अस्पताल संस्कृति में आम बात है। यह इसलिए भी है, क्योंकि मरीज़ों के अधिकारों और सहानुभूतिपूर्ण देखभाल के कौशल के प्रति समझ की कमी है या जानकारी नहीं है। इन अनुभवों के कारण स्वास्थ्य केंद्रों में भरोसा कम होता है, जिससे प्रसव से पहले, उसके दौरान और उसके बाद स्वास्थ्य केंद्रों में देखभाल के लिए महिलाओं के जाने की संभावना कम हो जाती है। इसके मद्देनज़र महिलाओं व उनके नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य-कल्याण के लिए जोखिम हैं और उनके जीवन के लिए ख़तरा पैदा होने की आशंका बढ़ जाती है।

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TAGGED:BMJ Global HealthDignity and respect in maternity careHuman Reproduction Programmistreatmentpostnatal careRespectful Maternity Careworld health organization
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ByRajesh Pandey
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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