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डीडीहाट सीटः तीस साल पहले कांग्रेस ने गंवाई, 25 साल से भाजपा के पास

उक्रांद नेता काशी सिंह ऐरी तीन बार रहे डीडीहाट सीट पर विधायक

देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पिथौरागढ़ की डीडीहाट सीट से चुनाव लड़ने की चर्चा चल रही है। हालांकि पूर्व सीएम रावत कहां से चुनाव लड़ेंगे, यह तो टिकटों के बंटवारे के बाद ही पता चलेगा। पर, भाजपा के लिए यहां 25 साल से चली आ रही पारी को बरकरार रखने और कांग्रेस के लिए 30 साल पहले गंवाई गई सीट को पाने की चुनौती होगी।

1967 में उत्तर प्रदेश के चौथे विधानसभा चुनाव में अस्तित्व में आई डीडीहाट सीट पर 2022 में 15वां चुनाव है। अभी तक इस सीट पर हुए 14 चुनावों में कांग्रेस और भाजपा पांच-पांच बार काबिज हो चुके हैं। उक्रांद नेता काशी सिंह ऐरी यहां तीन बार विधायक रह चुके हैं। वहीं 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर नारायण सिंह विधायक चुने गए थे।

कांग्रेस नेता गोपाल दत्त ओझा ने यहां से 1967, 1969, 1974 में विजय हासिल की। 1977 में जनता पार्टी की लहर थी और जनता पार्टी के उम्मीदवार नारायण सिंह कुल मतदान के 50.70 फीसदी मत पाकर विजयी हुए थे। इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी चारु चंद्र ओझा दूसरे नंबर पर थे।

1980 में कांग्रेस (आई) प्रत्याशी चारु चंद्र ओझा विधायक चुने गए, उन्होंने भाजपा के नारायण दत्त को हराया।

1991 में कांग्रेस के लीला राम शर्मा ने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के नारायण सिंह को हराया था। 1991 से 2017 तक हुए चुनावों में कांग्रेस यहां से जीत हासिल नहीं कर पाई।

उत्तराखंड क्रांति दल के अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी ने डीडीहाट सीट पर तीन बार जीत हासिल की। ऐरी ने निर्दलीय चुनाव लड़कर 1985 में इस सीट पर कांग्रेस के वर्चस्व को चुनौती दी और विजय हासिल की। उन्होंने कांग्रेस के चारुचंद्र ओझा को हराया था। चारूचंद्र उस समय यहां के विधायक थे। 1989 में निर्दलीय और फिर 1993 में उत्तराखंड क्रांति दल के टिकट पर भी ऐरी डीडीहाट के विधायक चुने गए। 1991 में उनको कांग्रेस के लीलाराम शर्मा ने हराया। इस चुनाव में उक्रांद प्रत्याशी ऐरी तीसरे नंबर रहे थे। दूसरे नंबर भाजपा प्रत्याशी नारायण सिंह रहे। ऐरी 2002 में उत्तराखंड के पहले विधानसभा चुनाव में कनालीछीना सीट पर विधायक निर्वाचित हुए थे।

डीडीहाट सीट पर भाजपा ने लगातार पांच बार के विधायक बिशन सिंह चुफाल को प्रत्याशी घोषित किया है। चुफाल उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। 1996 में निकटतम प्रतिद्वंद्वी उक्रांद नेता काशी सिंह ऐरी को हराकर उत्तर प्रदेश विधानसभा में पहुंचे । इसके बाद उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव में 2002 में यूकेडी के घनश्याम जोशी, 2007 में कांग्रेस की हेमा पंत, 2012 में कांग्रेस की रेवती जोशी और 2017 में निर्दलीय किशन भंडारी को हराया। 2017 में इस सीट पर कांग्रेस के प्रदीप सिंह पाल तीसरे स्थान पर रहे।-          इनपुट- भारत चुनाव आयोग

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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