क्या आपने कभी ऐसी टोपी देखी है

Rajesh Pandey

डोईवाला। क्या आपने कभी ऐसी टोपी देखी है। आप इसे कोई भी नाम दो। मेरे लिए तो यह टोपी है, वो भी जानदार टोपी, सिर को बचाने वाली टोपी, यानी हेलमेट टोपी। आप बताओ, इसमें, मैं कैसा लग रहा हूं। इसको बनाया है भवन निर्माण श्रमिक अवनीश कुमार ने।

कहते हैं आवश्यकता अविष्कार की जननी है। भवन निर्माण श्रमिक अवनीश कुमार ने सीमेंट के खाली बैग से एक ऐसी टोपी बनाई है, जिससे उनके सिर पर बोझ का सीधा असर नहीं पड़ेगा। वो सिर पर ईंटें हों या फिर रेत बजरी से भरा तसला, आसानी से ढो लेते हैं। तभी तो अवनीश बड़े गर्व से कहते हैं, इसे मैंने खुद से सीखा है…।

हमने अवनीश कुमार से कहा, क्या वो हमारे सामने ऐसी टोपी बना सकते हैं। उन्होंने जवाब दिया, बस दो मिनट में बना सकता हूं।

उन्होंने अपने साथियों से सीमेंट के दो खाली बैग्स और लोहे की बारीक तार मंगाए।

बस फिर क्या था, अवनीश ने टोपी बनाना शुरू कर दिया। दो मिनट से भी कम समय में उन्होंने यह टोपी बना दी।

मुस्कुराते हुए बताते हैं, उन्होंने इसे बनाना खुद से सीखा है।इसे लगाने से बोझ रखने से सिर पर जोर नहीं पड़ता। यह बहुत काम की है।

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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