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सीएम की कुछ और घोषणाएं, कोविड काल में योगदान पर कार्मिकों को प्रोत्साहन राशि

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा सदन में शुक्रवार को कुछ और महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। पुलिस, राजस्व और ग्राम्य विकास के कार्मिकों को कोविड काल में योगदान के लिए प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की गई।

मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार,विधायक निधि में वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए की गई एक करोड़ रुपये की कटौती को निर्गत किया जाएगा।

राजकीय डिग्री कालेजों के छात्रों को टैबलेट उपलब्ध कराया जाएगा। इससे लगभग एक लाख छात्र -छात्राएं लाभान्वित होंगे। इसका कुल व्यय भार 100 करोड़ रुपये है।

राज्य में स्थित कैंट बोर्ड में निवास करने वाले भूतपूर्व सैनिकों का भवन कर माफ करने की कार्यवाही की जाएगी।

राज्य में कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों के विकास, पलायन रोकने एवं स्वरोजगार के अवसर पैदा करने हेतु भू-विधियों का अध्ययन करके आवश्यक सुझाव के लिए पूर्व मुख्य सचिव / अध्यक्ष, उत्तराखंड राजस्व परिषद सुभाष कुमार की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है।

पुलिस कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल, सब इंस्पेक्टर व इंस्पेक्टर तथा राजस्व विभाग में   पटवारी / लेखपाल, राजस्व निरीक्षक एवं नायब तहसीलदार, ग्राम्य विकास विभाग में ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी और सहायक विकास अधिकारी को कोविड काल में किए जा रहे सराहनीय कार्यों एवं सेवाओं के लिए दस हजार रुपये की एकमुश्त प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

प्रदेश के सभी विद्यालयों में छात्राओं के लिए अलग से शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

शिवानंद नौटियाल छात्रवृत्ति की राशि को 250 से बढ़ाकर 1500 रुपये करने और इसके लाभान्वितों की संख्या 11 से बढ़ाकर 100 करने की घोषणा की गई।

श्रीदेव सुमन राज्य मेधावी छात्रवृत्ति की राशि को 150 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये करने की भी घोषणा की।

600 अतिरिक्त विद्यालयों में वर्चुअल क्लास की व्यवस्था की जाएगी। अटल उत्कृष्ट विद्यालयों सहित सभी शासकीय विद्यालयों में 1 से 14 सितम्बर 2021 तक प्रवेश पखवाड़ा एवं 15 सितम्बर 2021 को नवप्रवेशित बच्चों के लिए स्वागोत्सव मनाया जाएगा।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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