स्नान के बाद सूर्य को जल अवश्य चढ़ाएं

Rajesh Pandey

धर्मग्रन्थों के अनुसार सूर्य को देवता माना गया है। सुबह स्नान के बाद सूर्य को जल चढ़ाकर ही भोजन किया जाता है। उत्तर भारत में तो छठ पर्व के दिन भगवान सूर्य देव की विधि विधान से पूजा की जाती है और अघ्&य दिया जाता है।शोधकर्ताओं ने भी सूर्योपासना के कई फायदे बताएं हैं।

सूर्य को जल चढ़ाने के लाभ

धार्मिक मतःसूर्य को जल चढ़ाने की परम्परा बहुत पुराने समय से है। शास्त्रों के अनुसार सूर्यदेव को जल चढाने से सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं। मनुष्य पर सूर्य का प्रकोप नहीं होता है। साथ ही उसके राशि दोष ख़त्म हो जाते हैं।
वैज्ञानिक तर्कः वहीं वैज्ञानिकों का मानना है कि सूर्योदय के समय सूर्य की किरणें ज्यादा तेज नहीं होती हैं, जो शरीर के लिए एक औषधि का काम करती हैं। उगते सूर्य को जल चढ़ाते वक्त जल की धार में सूर्य दिखाई देता है। सूर्य की किरणें जल में से छनकर आंखों और शरीर पर पड़ती हैं।जिससे आंखों की रोशनी तेज होती है। इससे पीलिया, क्षय रोग और दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है। सूर्य की किरणों से विटामिन-डी भी मिलता है। सुबह सुबह सूर्य को जल चढाने से शुद्ध ऑक्सीजन भी मिलती है। वहीं स्नान के बाद भोजन को धार्मिक नजरिए से अहम माना गया है। ये परंपरा भी सदियों पुरानी है।

स्नान के बाद ही भोजन करनाः धार्मिक मत ,शास्त्रों के अनुसार बिना स्नान किये भोजन करना निषेध माना गया है। शास्त्रों के अनुसार स्नान करके पवित्र होकर ही भोजन करना चाहिए। बिना स्नान किये भोजन करना पशुओं के समान है इसे अपवित्र माना गया है। ऐसा करने से देवी देवता अप्रसन्न हो जाते है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोणः वैज्ञानिक दृष्टिकोण से स्नान करने से शरीर की गन्दगी निकल जाती है शरीर में नई ताजगी और स्फूर्ति आती है। स्नान करने के बाद स्वभाविक रूप से भूख लगती है। उस समय भोजन करने से भोजन का रस शरीर के लिए पुष्टिवर्धक होता है।

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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