नई दिल्ली, 20 सितंबर, 2026ः राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सिनेमा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिए जाने वाले देश के सबसे प्रतिष्ठित सम्मान हैं। 1954 में शुरू किए गए ये पुरस्कार हर साल सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा प्रदान किए जाते हैं। सात दशकों से अधिक समय से, इन पुरस्कारों ने भारतीय फिल्म निर्माण में असाधारण रचनात्मक और तकनीकी उपलब्धियों को सराहा है। ये पुरस्कार तीन क्षेत्रों को कवर करते हैं — फीचर फिल्में, नॉन-फीचर फिल्में और सिनेमा पर लेखन।
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार वर्ष 2024 में भारतीय सिनेमा की उपलब्धियों को सम्मानित करते हैं। विजेताओं की घोषणा 18 जुलाई 2026 को तीनों जूरी के अध्यक्षों द्वारा की गई थी। भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु 22 सितंबर 2026 को गुजरात के एकता नगर (पूर्व में नाम केवड़िया) में ये पुरस्कार प्रदान करेंगी।
ये पुरस्कार देश भर में फिल्म निर्माण की समृद्ध भाषाई, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय विविधता को दर्शाते हैं। ये बड़े कमर्शियल प्रोडक्शन और छोटी इंडिपेंडेंट फिल्मों को एक ही राष्ट्रीय मंच पर एक साथ लाते हैं। यही व्यापकता इस सम्मान को फिल्म निर्माताओं और दर्शकों दोनों के बीच एक खास पहचान दिलाती है।
संविधान की 8वीं अनुसूची में सूचीबद्ध प्रत्येक भाषा में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार दिया जाता है। अनुसूची के बाहर की भाषाओं में बनी फिल्मों को अलग से विशेष पुरस्कारों के माध्यम से सम्मानित किया जाता है। 72वें संस्करण में, इसी प्रावधान के तहत पुरस्कारों में गढ़वाली भाषा की फिल्म ढोली और तुलु भाषा की फिल्म इम्बू को सम्मानित किया जाएगा। इन प्रत्येक फिल्म को रजत कमल एवं दो-दो लाख रुपये की राशि से सम्मानित किया जाएगा।
| क्या आप जानते हैं? एक प्रमुख नीतिगत पहल के तहत, मंत्रालय ने देश के विभिन्न हिस्सों में इन पुरस्कारों का आयोजन करने का निर्णय लिया है। भविष्य के संस्करण राष्ट्रीय राजधानी से आगे बढ़कर अलग-अलग राज्यों और शहरों तक पहुंचेंगे। एकता नगर में आयोजित यह समारोह देश भर की सिनेमाई प्रतिभाओं को एक मंच पर लाएगा। यह ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत‘ की भावना को साकार करेगा। |
विरासत और विकास — 1954 से अब तक
भारतीय सिनेमा की यात्रा 1913 में दादासाहेब फाल्के की फिल्म राजा हरिश्चंद्र के साथ शुरू हुई थी। 1949 में गठित फ़िल्म इन्क्वायरी कमिटी ने ‘फिल्मों के लिए राज्य पुरस्कारों’ की शुरुआत करने की सिफारिश की थी। इनका गठन भारतीय सिनेमा में कलात्मक और तकनीकी उत्कृष्टता को सम्मानित करने तथा उसे बढ़ावा देने के लिए किया गया था। ये पुरस्कार 1954 में शुरू हुए थे और इसके पहले संस्करण में वर्ष 1953 की फिल्मों को सम्मानित किया गया था।
| राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का पहला संस्करण पहला संस्करण तीन श्रेणियों में आयोजित किया गया था, जिनके नाम हैं — फीचर फिल्में, वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) फिल्में और बाल फिल्में। मराठी फिल्म श्यामची आई ने सर्वश्रेष्ठ अखिल भारतीय फीचर फिल्म के लिए प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल जीता। महाबलीपुरम ने सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री फिल्म के लिए प्रेसिडेंट गोल्ड मेडल जीता, और दो बीघा जमीन को सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट मिला। इस प्रकार केवल सात सम्मानों के साथ हुई एक सहज शुरुआत ने भारतीय सिनेमा के लिए राष्ट्रीय पहचान के सात दशकों का मार्ग प्रशस्त किया। |
भारतीय सिनेमा का नया कैनवास
वर्ष 1967 की फिल्मों के लिए पहली बार कलाकारों और तकनीशियनों के लिए अलग-अलग पुरस्कार शुरू किए गए। उत्तम कुमार और नरगिस को 1968 में पहला सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला। उस समय सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के पुरस्कार को भारत और सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार को उर्वशी कहा जाता था। दादासाहेब फाल्के पुरस्कार की शुरुआत 1969 में हुई और यह सबसे पहले देविका रानी को प्रदान किया गया। जैसे-जैसे भारतीय सिनेमा का दायरा और विस्तार बढ़ता गया, वैसे-वैसे इसमें नई श्रेणियों और तकनीकी विधाओं को लगातार जोड़ा जाता रहा।
| वर्ष | महत्वपूर्ण पड़ाव |
| 1913 | दादासाहेब फाल्के ने फिल्म राजा हरिश्चंद्र का निर्माण पूरा किया, जो भारतीय सिनेमा निर्माण के इतिहास में एक ऐतिहासिक पड़ाव साबित हुआ। |
| 1954 | इन पुरस्कारों की शुरुआत फिल्मों के लिए राज्य पुरस्कार के रूप में की गई। पहला सम्मान वर्ष 1953 में बनी फिल्मों को प्रदान किया गया। |
| 1967-68 | कलाकारों और तकनीशियनों के लिए पुरस्कारों की शुरुआत हुई। उत्तम कुमार और नरगिस ने पहले अभिनय सम्मान अपने नाम किए। |
| 1969 | दादासाहेब फाल्के पुरस्कार की शुरुआत की गई। देविका रानी इसकी पहली विजेता बनीं। |
| 1973 | फिल्म महोत्सव निदेशालय ने इन पुरस्कारों के आयोजन और संचालन की जिम्मेदारी संभाली। |
| 2022 | फिल्म महोत्सव निदेशालय का एनएफडीसी में विलय कर दिया गया, जो वर्तमान में इन पुरस्कारों की आयोजक संस्था है। |
| 2026 | 72वें पुरस्कारों की घोषणा जुलाई में की गई। इस सम्मान समारोह का आयोजन गुजरात के एकता नगर में किया जाएगा। |
उद्देश्य एवं महत्व
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के उद्देश्यों को इसके आधिकारिक नियमों में स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है। ये पुरस्कार कलात्मक, तकनीकी उत्कृष्टता और सामाजिक प्रासंगिकता से परिपूर्ण फिल्मों के निर्माण को प्रोत्साहित करते हैं। ये दर्शकों को देश के विभिन्न क्षेत्रों की संस्कृतियों को समझने और उनकी सराहना करने में मदद करते हैं। ऐसा करके, ये पुरस्कार राष्ट्र की एकता और अखंडता को भी बढ़ावा देते हैं।
इसके अलावा, ये पुरस्कार सिनेमा को एक कला के रूप में समझने, उसके अध्ययन और उसकी सराहना को बढ़ावा देते हैं। सिनेमा पर आधारित पुस्तकें, लेख और समीक्षाएँ इस कला के आलोचनात्मक मूल्यांकन को पाठकों के एक बड़े वर्ग तक पहुँचाती हैं।
यह सम्मान क्यों मायने रखता है
एक राष्ट्रीय पुरस्कार इस बात की पुष्टि करता है कि फिल्म ने राष्ट्र द्वारा निर्धारित उच्चतम मानकों को छुआ है। यह दर्शकों का ध्यान ऐसी रचनाओं की ओर खींचता है, जो केवल सीमित दर्शकों तक ही पहुँच पातीं। यह सम्मान फिल्म निर्माता के साथ हमेशा बना रहता है और उनकी अगली परियोजनाओं के लिए नए रास्ते खोलता है।
पुरस्कारों की संरचना
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का आयोजन तीन प्रमुख वर्गों और एक लाइफटाइम ऑनर के साथ किया जाता है। फीचर फिल्म वर्ग पूर्ण लंबाई की फिल्मों के लिए है। गैर-फीचर फिल्म वर्ग वृत्तचित्रों, लघु फिल्मों, एनीमेशन और अन्य संबद्ध विधाओं के लिए समर्पित है। सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ लेखन वर्ग सर्वश्रेष्ठ पुस्तक और सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक को सम्मानित करता है। वहीं, दादासाहेब फाल्के पुरस्कार भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान के रूप में एक विशेष स्थान रखता है।
| वर्ग | श्रेणियाँ | पदक | नकद पुरस्कार |
| फीचर फिल्म्स | 26 (स्पेशल मेंशन के साथ) | स्वर्ण कमल, रजत कमल | ₹ 3,00,000 और ₹ 2,00,000 |
| गैर-फीचर फिल्म्स | 16 (स्पेशल मेंशन के साथ) | स्वर्ण कमल, रजत कमल | ₹ 3,00,000 और ₹ 2,00,000 |
| सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ लेखन | 2 | स्वर्ण कमल | ₹ 1,00,000 |
| दादासाहेब फाल्के पुरस्कार | 1 | स्वर्ण कमल, शॉल | 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के लिए ₹ 10,00,000 |
फीचर फिल्म वर्ग में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म, सर्वश्रेष्ठ निर्देशन और मुख्य भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के अलावा अन्य श्रेणियाँ शामिल हैं। इसमें सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म, सर्वश्रेष्ठ सिनेमाटोग्राफी, सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन और सर्वश्रेष्ठ कॉस्ट्यूम डिजाइन भी शामिल हैं। गैर-फीचर वर्ग में सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री), सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म (शॉर्ट फिल्म) और सर्वश्रेष्ठ एनीमेशन फिल्म शामिल हैं। इसके अलावा इसमें सर्वश्रेष्ठ कला और संस्कृति फिल्म, सर्वश्रेष्ठ नरेशन या वॉयस ओवर और सर्वश्रेष्ठ पटकथा जैसे अवॉर्ड भी दिए जाते हैं।
| प्रत्येक भाषा को सम्मान संविधान की 8वीं अनुसूची में सूचीबद्ध प्रत्येक भाषा में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार दिया जाता है। अनुसूची के बाहर की भाषाओं में बनी फिल्मों को अलग से विशेष पुरस्कारों के माध्यम से सम्मानित किया जाता है। 72वें संस्करण में, इसी प्रावधान के तहत गढ़वाली भाषा की फिल्म ढोली और तुलु भाषा की फिल्म इम्बू को सम्मानित किया गया। |
पुरस्कार चयन प्रक्रिया
हर साल पिछले कैलेंडर वर्ष में प्रमाणित फिल्मों के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित की जाती हैं। इसके बाद मंत्रालय पुरस्कारों के तीनों वर्गों के लिए अलग-अलग जूरी (निर्णायक मंडल) का गठन करता है। इन जूरी सदस्यों के रूप में सिनेमा, संबद्ध कला रूपों और ह्यूमैनिटीज (मानविकी) के क्षेत्र से जुड़ी प्रतिष्ठित हस्तियों को चुना जाता है।
फीचर फिल्मों के लिए दो-स्तरीय मूल्यांकन
57वें संस्करण से लागू की गई दो-स्तरीय व्यवस्था के तहत फीचर फिल्मों का मूल्यांकन किया जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों से प्राप्त प्रविष्टियों को सबसे पहले पाँच क्षेत्रीय पैनल शॉर्टलिस्ट करते हैं। इसके बाद, एक केंद्रीय पैनल फीचर फिल्म वर्ग में पुरस्कार विजेताओं का अंतिम निर्णय लेता है। नॉन-फीचर फिल्म सेक्शन और सिनेमा पर बेहतरीन लेखन वाले सेक्शन के लिए अलग-अलग जूरी होती हैं। वहीं, दादासाहेब फाल्के पुरस्कार के लिए कोई प्रविष्टियाँ आमंत्रित नहीं की जाती हैं; इसकी प्रक्रिया अलग होती है। प्रतिष्ठित सिनेमा हस्तियों की एक विशेष रूप से गठित समिति इसके विजेता के नाम की सिफारिश करती है।
72वें संस्करण के जूरी सदस्य
श्री जयराज ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के लिए फीचर फिल्म जूरी की अध्यक्षता की। इसी संस्करण के लिए गैर-फीचर फिल्म जूरी की अध्यक्षता श्री असीम सिन्हा ने की। वहीं, सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ लेखन जूरी की अध्यक्षता श्री ए. चंद्रशेखर ने की।
| पात्रता की संक्षिप्त शर्तें फिल्मों को पुरस्कार वर्ष के दौरान सीबीएफसी द्वारा प्रमाणित होना अनिवार्य है और उनमें अंग्रेजी उपशीर्षक होने चाहिए। फीचर फिल्म की अवधि 72 मिनट से अधिक होनी चाहिए। डब की गई, रीमेक बनाई गई या पहले से प्रस्तुत की जा चुकी री-एडिटेड प्रतियाँ इसके लिए पात्र नहीं हैं। |
भारतीय सिनेमा में व्यापक पहचान
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार देश के हर हिस्से में बनने वाली फिल्मों को समान महत्व देते हैं। 72वें संस्करण में मराठी, संथाली, तमिल, मलयालम, तेलुगु और कन्नड़ भाषा की फिल्मों को सम्मानित किया गया। कई अन्य भाषाओं के साथ-साथ तुलु और गढ़वाली फिल्मों को भी इस आयोजन में पहचान मिली। इसके अलावा, इतिहास में पहली बार गैर-फीचर फिल्म वर्ग में किसी संथाली फिल्म को सम्मानित किया गया।
श्री रवि राज मुर्मू द्वारा निर्देशित फिल्म आंगेन ने बेस्ट डेब्यू फिल्म ऑफ ए डायरेक्टर का पुरस्कार जीता। इस प्रकार की पहली ऐतिहासिक पहचान भारतीय सिनेमा के दायरे और मानचित्र को थोड़ा और विस्तृत करती है।
72वाँ संस्करण — प्रमुख आकर्षण
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में वर्ष 2024 के दौरान प्रमाणित भारतीय फिल्मों को शामिल किया गया है। इस संस्करण में आर्टिकल 370 ने सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार जीता। इसी फिल्म के लिए यामी गौतम ने मुख्य भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीता। ममूटी और कार्तिक आर्यन ने मुख्य भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार साझा किया। उन्हें यह सम्मान क्रमशः ब्रमायुगम और चंदू चैंपियन के लिए मिला।
श्री राजकुमार पेरियासामी ने तमिल फिल्म अमरन के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का पुरस्कार जीता। कल्कि 2898 एडी को संपूर्ण मनोरंजन प्रदान करने वाली सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म घोषित किया गया। श्री रणदीप हुड्डा ने स्वातंत्र्य वीर सावरकर के लिए डायरेक्टर की बेस्ट डेब्यू फिल्म का पुरस्कार जीता। भंगार को सर्वश्रेष्ठ गैर-फीचर फिल्म चुना गया, जबकि राम-नामी को सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का पुरस्कार मिला।
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के विजेता
नीचे दी गई तालिका में 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के प्रमुख पुरस्कारों का विवरण दिया गया है। भाषाई पुरस्कार, टेक्निकल क्राफ़्ट और स्पेशल मेंशन संपूर्ण सूची में अलग से दर्ज हैं।
| पुरस्कार | फिल्म (भाषा) | पुरस्कार विजेता |
| सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म | आर्टिकल 370 (हिंदी) | निर्माता: जियो स्टूडियोज और बी62 स्टूडियोज; निर्देशक: आदित्य सुहास जंभाले |
| सर्वश्रेष्ठ निर्देशन | अमरन (तमिल) | राजकुमार पेरियासामी |
| मुख्य भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता | ब्रमायुगम (मलयालम); चंदू चैंपियन (हिंदी) | ममूटी और कार्तिक आर्यन (संयुक्त रूप से) |
| मुख्य भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री | आर्टिकल 370 (हिंदी) | यामी गौतम |
| सहायक भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता | भक्षक (हिंदी) | संजय मिश्रा |
| सहायक भूमिका में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री | महाराजा (तमिल); मिथ्या (कन्नड़) | सच्चाना नामीदास और रोपाश्री वर्काडी (साझा) |
| निर्देशक की सर्वश्रेष्ठ पहली फिल्म | स्वातंत्र्य वीर सावरकर (हिंदी) | रणदीप हुड्डा |
| संपूर्ण मनोरंजन प्रदान करने वाली सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म | कल्कि 2898 एडी (तेलुगु) | निर्माता: वैजयंती मूवीज; निर्देशक: नाग अश्विन सिंगीरेड्डी |
| राष्ट्रीय, सामाजिक और पर्यावरण मूल्यों को बढ़ावा देने वाली सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म | कैप्टन मिलर (तमिल) | निर्माता: सत्य ज्योति फिल्म्स; निर्देशक: अरुण मथेश्वरन |
| सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म | 35 – चिन्ना कथा कादू (तेलुगु) | निर्माता: एस ओरिजिनल्स और वाल्टेयर प्रोडक्शंस; निर्देशक: नंदा किशोर इमानी |
| सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन | आर्टिकल 370 (हिंदी); अमरन (तमिल) | शाश्वत सचदेव (गीत); जी. वी. प्रकाश कुमार (पार्श्व संगीत) |
| सर्वश्रेष्ठ गैर-फीचर फिल्म | भंगार (मराठी और अंग्रेजी) | निर्माता एवं निर्देशक: सुमिरा रॉय |
| निर्देशक की सर्वश्रेष्ठ पहली फिल्म (गैर-फीचर) | आंगेन (संथाली) | निर्देशक: रवि राज मुर्मू |
| सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) | राम-नामी (हिंदी) | निर्माता: बीबीपी स्टूडियो वर्चुअल भारत प्राइवेट लिमिटेड; निर्देशक: भारतबाला गणपति |
| सर्वश्रेष्ठ निर्देशन (गैर-फीचर) | स्टैच्यू ऑफ यूनिटी – एकता का प्रतीक (हिंदी) | आनंद एल. राय |
| सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ पुस्तक | नानिरुवुदे निमगागी नादिरुवुदे ननगागी (कन्नड़)
| लेखक: कंचनूरु प्रदीप कुमार शेट्टी; प्रकाशक: मिरर पुस्तका |
| सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक | हिंदी | संजीव श्रीवास्तव |
पुरस्कार विजेताओं और जूरी (चयन समिति) की पूरी सूची देखें
दादासाहेब फाल्के पुरस्कार
दादासाहेब फाल्के पुरस्कार भारतीय सिनेमा के क्षेत्र में सर्वोच्च सम्मान है। इसकी शुरुआत वर्ष 1969 में की गई थी, जब यह पहली बार देविका रानी को प्रदान किया गया था। यह पुरस्कार दादासाहेब फाल्के की स्मृति में दिया जाता है, जिन्होंने वर्ष 1913 में फिल्म राजा हरिश्चंद्र का निर्देशन किया था। इसके प्राप्तकर्ताओं को भारतीय सिनेमा के विकास और प्रगति में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया जाता है।
| क्या आप जानते हैं? धुंडिराज गोविंद फाल्के (1870-1944), जिन्हें दादासाहेब फाल्के के नाम से जाना जाता है, ने 1913 में भारत की पहली पूर्ण-लंबाई वाली फीचर फिल्म राजा हरिश्चंद्र का निर्देशन किया था। इसके बाद उन्होंने 94 फीचर फिल्मों और 27 लघु फिल्मों का निर्माण किया। भारतीय सिनेमा के पितामह के रूप में सम्मानित दादासाहेब फाल्के की स्मृति में भारत सरकार द्वारा वर्ष 1969 में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार की शुरुआत की गई थी। |
दादासाहेब फाल्के पुरस्कार 2024
वर्ष 2024 का दादासाहेब फाल्के पुरस्कार श्री अनंत नाग को प्रदान किया जाएगा। भारत सरकार ने 16 सितंबर 2026 को इस निर्णय की घोषणा की। उनका जन्म 4 सितंबर 1948 को कर्नाटक में हुआ था और उन्होंने 70 के दशक की शुरुआत में अभिनय की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत कन्नड़ फीचर फिल्म संकल्प से की, जबकि फिल्म अंकुर से उन्होंने हिंदी सिनेमा में पदार्पण किया।
उन्होंने छह भारतीय भाषाओं की 300 से अधिक फिल्मों में विभिन्न प्रकार के किरदारों को जीवंत किया है। उनके काम में बेहद लोकप्रिय टेलीविजन धारावाहिक मालगुडी डेज भी शामिल है। उन्होंने पांच फिल्मफेयर पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए पांच कर्नाटक राज्य पुरस्कार जीते हैं। भारत सरकार ने उन्हें 2025 में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। उनकी सिनेमा की यात्रा पांच दशकों से भी ज़्यादा लंबी है और इसने कलाकारों की कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है।
| हाल के दादासाहेब फाल्के पुरस्कार विजेता श्री मोहनलाल को वर्ष 2023 के लिए दादासाहेब फाल्के पुरस्कार प्राप्त हुआ। श्री मिथुन चक्रवर्ती को वर्ष 2022 का यह पुरस्कार प्रदान किया गया था। श्रीमती वहीदा रहमान को वर्ष 2021 के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। प्रत्येक पुरस्कार संबंधित संस्करण के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में प्रदान किया जाता है। Shri Mohanlal received the Dadasaheb Phalke Award for the year 2023. Shri Mithun Chakraborty received the award for the year 2022. Smt. Waheeda Rehman received the award for the year 2021. Each award is presented at the National Film Awards ceremony of that edition. |
भारतीय सिनेमा: संस्कृति, पहचान और प्रभाव
सिनेमा भारत के सबसे प्रभावशाली कला रूपों और इसकी सबसे शक्तिशाली सांस्कृतिक परिसंपत्तियों में से एक बना हुआ है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय इसे रचनात्मकता, संस्कृति और नवाचार का एक सशक्त माध्यम बताता है। कलात्मक अभिव्यक्ति से परे, यह एक विशाल रचनात्मक अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करता है। भारत का मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र अब दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा क्षेत्र है, जिसे 20 से 25 लाख डिजिटल रचनाकारों और एनीमेशन तथा वीएफएक्स सेवाओं में 40 से 60 प्रतिशत की लागत लाभ का समर्थन प्राप्त है। भारतीय फिल्में देश की सॉफ्ट पावर को वैश्विक दर्शकों तक भी पहुंचाती हैं, जिससे विभिन्न भाषाओं और क्षेत्रों में आजीविका का सृजन करने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूती मिलती है।
भारतीय सिनेमा में निरंतर योगदान
भारतीय सिनेमा आज पहले से कहीं अधिक भाषाओं और प्रारूपों में दर्शकों तक पहुँच रहा है। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार देश में सिनेमाई उत्कृष्टता को मापने का मुख्य मानदंड बने हुए हैं। ये पुरस्कार केवल व्यावसायिक सफलता के बजाय कलात्मक कौशल, साहस और दृष्टिकोण की स्पष्टता का सम्मान करते हैं।
एकता नगर में इसका आयोजन होना इन पुरस्कारों को देश की राजधानी के बाहर के दर्शकों के भी करीब ले जाएगा। भविष्य के संस्करण देश भर के विभिन्न राज्यों और शहरों में आयोजित किए जाएँगे। बड़े स्टूडियो से दूर पनपने वाली सिनेमाई संस्कृतियों को अब एक राष्ट्रीय मंच प्राप्त होगा।
72वां संस्करण इस प्रतिबद्धता को एक से अधिक रूपों में साकार करता दिखता है। पहली बार संथाली भाषा की किसी फिल्म ने सम्मान-सूची में अपना स्थान बनाया है, तो वहीं कन्नड़ सिनेमा के एक दिग्गज अभिनेता को इस क्षेत्र के सर्वोच्च सम्मान से अलंकृत किया गया है। इस तरह, यह पुरस्कार समारोह कला और राष्ट्र, दोनों के प्रति अपने समर्पण को निरंतर निभा रहा है।- साभार- पीआईबी



