Dehradun river pollution Suswa-Ganga: देहरादून, 02 अगस्त, 2026ः देहरादून शहर की दो नदियां, रिस्पना और बिंदाल- शहर का कूड़ा-कचरा और सीवेज बहाकर लाती हैं और आगे चलकर सुसवा नदी बनाती हैं। साथ ही, कुछ आगे टर्नर रोड से आने वाला एक नाला इसमें मिलता है। एक स्टडी Morphometric Analysis of Suswa River Basin Using Geospatial Techniques के अनुसार सुसवा बेसिन का फैलाव मसूरी तक है।
सुसवा टिहरी गढ़वाल से आने वाली सौंग की सहायक नदी है। माजरी और शेरगढ़ क्षेत्र के बीच सौंग और सुसवा का संगम है। इसके बाद सौंग और जाखन नदियां मिलती हैं। जाखन भी टिहरी गढ़वाल से आती है। अंतः में सौंग गोहरी क्षेत्र में गंगा में मिल जाती है।

Dehradun river pollution Suswa-Ganga: यह स्पष्ट है कि देहरादून शहर का अनियमित ड्रेनेज सिस्टम, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट एक नहीं, बल्कि छह नदियों, जिनमें गंगा भी शामिल है, को प्रदूषित करता है। ये नदियां हैं- रिस्पना, जिसको उत्तराखंड सरकार से लेकर जिला प्रशासन ऋषिपर्णा के नाम से पुकारता है। दूसरी नदी है बिंदाल, यह एक बरसाती धारा है, लेकिन वर्षभर इसके प्रवाह क्षेत्र में शहर की गंदगी डंप होती है और तीसरी नदी है सौंग और चौथी नदी जाखन और पांचवी नदी पावन गंगा है। और, छठी नदी खुद सुसवा है। जाहिर है, सुसवा को स्वच्छ करने के लिए रिस्पना और बिंदाल की दशा सुधारने के साथ इसमें गिरने वाले सभी नालों को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से होकर गुजारना होगा।

Dehradun river pollution Suswa-Ganga: सुसवा के बेसिन एरिया की बात करें तो वैज्ञानिक विश्लेषण से पता चलता है कि सुसवा नदी बेसिन का कुल क्षेत्रफल 310.98 वर्ग किलोमीटर है, जो देहरादून शहर के एक बहुत बड़े हिस्से को कवर करता है। इस पूरे बेसिन की सबसे खास बात इसका समृद्ध जल नेटवर्क है, जिसमें मुख्य नदी की छोटी-बड़ी सहायक धाराओं और बरसाती नालों को मिलाकर कुल 1,092 जलधाराएं (Streams) मौजूद हैं।
यदि इन सभी धाराओं की लंबाई को आपस में जोड़ दिया जाए, तो यह 883.12 किलोमीटर लंबा एक विशाल जल-नेटवर्क बनता है। यह नदी तंत्र मसूरी की निचली पहाड़ियों में लगभग 2,278 मीटर की ऊंचाई से शुरू होता है और अपनी यात्रा के दौरान देहरादून शहर की गंदगी को समेटते हुए 405 मीटर की ऊंचाई पर सौंग नदी में मिल जाता है, जो आगे जाकर गंगा नदी की सहायक बनती है।

Dehradun river pollution Suswa-Ganga: सुसवा नदी के गंदे नाले में तब्दील होने की मुख्य वजह देहरादून शहर का अनियोजित विस्तार है। इस नदी बेसिन का ऊपरी आधा हिस्सा सीधे तौर पर देहरादून के मुख्य शहरी क्षेत्र के अंतर्गत आता है। शहर का अधिकांश घरेलू और व्यावसायिक कचरा बिना किसी उपचार के सीधे इसमें मिलता है। इस पूरे नदी तंत्र में प्रदूषण का सबसे भयावह रूप उस स्थान पर देखने को मिलता है, जहां देहरादून की दो प्रमुख नदियां, बिंदाल और रिस्पना, सुसवा नदी में आकर मिलती हैं।

सेटेलाइट मैपिंग और ड्रेनेज डेंसिटी के आंकड़ों के अनुसार, यह संगम स्थल पूरे बेसिन का सबसे गंभीर ‘हाई-रिस्क जोन’ (Peak Pollution Point) बन चुका है। शहर की इन दोनों लाइफ लाइन के जरिए लाखों लीटर अनट्रीटेड सीवेज, प्लास्टिक कचरा और औद्योगिक अपशिष्ट हर दिन सुसवा नदी में मिल रहा है। इस भारी प्रदूषण के कारण नदी का न्यूनतम प्राकृतिक प्रवाह लगभग समाप्त हो गया है और अब इसमें केवल जहरीला गंदा पानी ही बह रहा है।

सुसवा में बहने वाले भारी मात्रा में अनुपचारित सीवेज (गंदे पानी) ने आसपास के पर्यावरण को गंभीर रूप से बाधित किया है और इसके न्यूनतम प्रवाह को काफी कम कर दिया है। कृषि भूमि के लिए पानी के मोड़ (डायवर्सन) या कचरे के बहाव के कारण नदी का प्रवाह कम हो जाता है, जो वनों की कटाई और नदी के पाट पर अतिक्रमण के कारण बाढ़ का रूप ले लेता है, या फिर मानसून और मानसून के बाद के मौसम के दौरान बढ़ जाता है।
सुसवा और सौंग के संगम स्थल पर दोनों नदियों का पानी अलग-अलग दिखता है। प्रदूषित सुसवा, जो कि राजाजी टाइगर रिजर्व के किनारे होते हुए बहती है, के पानी का रंग काला हो चुका है, जबकि सौंग प्रदूषित नदी नहीं है। सुसवा और सौंग शेरगढ़ से लेकर माजरी क्षेत्र के बीच में मिलती हैं। माजरी से आगे इसमें जाखन मिलती है। जाखन भी सुसवा से साफ नदी है। अंतः में गोहरी क्षेत्र में गंगा और सौंग मिलते हैं। सुसवा देहरादून शहर की जो भी गंदगी ढोती है, वो अंत में गंगा में मिल रही है।


