Head and neck cancer awareness: ऋषिकेश, 1 मई, 2026: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश में ‘हेड-नेक कैंसर जागरूकता माह’ के तहत विशेषज्ञों ने इस गंभीर बीमारी के प्रति आमजन को आगाह किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में कुल कैंसर के मामलों में लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी हेड-नेक कैंसर की है, जो इसे देश का सबसे बड़ा कैंसर समूह बनाता है।
Head and neck cancer awareness: विशेषज्ञों के अनुसार हेड-नेक कैंसर मुख्यतः मुंह, गले, स्वरयंत्र, नाक, साइनस और लार ग्रंथियों में विकसित होता है और लगभग 85-90 प्रतिशत स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के रूप में पाया जाता है। यह बीमारी न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि व्यक्ति की बोलने, खाने और सामाजिक जीवन की क्षमता पर भी गहरा असर डालती है।
कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपक सुंदरियाल ने बताया कि हेड-नेक कैंसर के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण जिम्मेदार हैं:
तंबाकू और शराब: इनका सेवन सबसे बड़ा जोखिम है। दोनों का संयुक्त प्रभाव कैंसर के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।
अन्य कारण: मुंह की खराब स्वच्छता (Oral Hygiene), चुभने वाले दांत, वायु प्रदूषण, रसायनयुक्त भोजन, तनाव और अनियमित दिनचर्या।
बीमारी के मुख्य लक्षण
Head and neck cancer awareness: विशेषज्ञों के अनुसार, ये लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:
मुंह में ऐसा छाला जो लंबे समय से न भर रहा हो।
आवाज में भारीपन या बदलाव आना।
गले में लगातार खराश या निगलने में कठिनाई।
गर्दन में किसी भी प्रकार की गांठ या सूजन।
एम्स ऋषिकेश में इस बीमारी के सटीक निदान के लिए बायोप्सी, सीटी स्कैन, एमआरआई और पेट (PET) स्कैन जैसी तकनीकें उपलब्ध हैं। उपचार के तौर पर सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी का उपयोग किया जाता है। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि यदि शुरुआती अवस्था (First Stage) में पता चल जाए, तो मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है।
बचाव के उपाय: जीवनशैली में बदलाव जरूरी
संस्थान की निदेशक प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह ने संदेश दिया कि हेड-नेक कैंसर हमारी जीवनशैली का परिणाम है। इससे बचाव के लिए निम्नलिखित कदम उठाना आवश्यक है:
तंबाकू, धूम्रपान और शराब से पूरी तरह दूरी।
संतुलित आहार और नियमित व्यायाम।
मौखिक स्वच्छता (Oral Hygiene) का विशेष ध्यान रखना।
नियमित स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य शिक्षा को बढ़ावा देना।
सावधान: विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि उपचार के बाद भी यदि मरीज नशा (तंबाकू/शराब) नहीं छोड़ता, तो कैंसर के दोबारा होने की प्रबल संभावना बनी रहती है।
हेड-नेक कैंसर के खिलाफ जागरूकता, संयम और समय पर जांच ही सबसे प्रभावी हथियार हैं। व्यक्तिगत और सामाजिक प्रयासों से इस बीमारी के जोखिम को कम किया जा सकता है।




