Head and neck cancer awareness: एम्स के विशेषज्ञों से जानिए क्या हैं लक्षण और उपचार

Rajesh Pandey

Head and neck cancer awareness: ऋषिकेश, 1 मई, 2026: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश में ‘हेड-नेक कैंसर जागरूकता माह’ के तहत विशेषज्ञों ने इस गंभीर बीमारी के प्रति आमजन को आगाह किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में कुल कैंसर के मामलों में लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी हेड-नेक कैंसर की है, जो इसे देश का सबसे बड़ा कैंसर समूह बनाता है।

कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित सहरावत के अनुसार, इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (ग्लोबोकेन-2022) की रिपोर्ट बताती है कि भारत में ओरल कैविटी (मुंह) का कैंसर पुरुषों में सबसे आम है। चिंताजनक बात यह है कि जो बीमारी पहले 50 वर्ष की आयु के बाद देखी जाती थी, वह अब युवाओं को तेजी से अपनी चपेट में ले रही है।

Head and neck cancer awareness: विशेषज्ञों के अनुसार हेड-नेक कैंसर मुख्यतः मुंह, गले, स्वरयंत्र, नाक, साइनस और लार ग्रंथियों में विकसित होता है और लगभग 85-90 प्रतिशत स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के रूप में पाया जाता है। यह बीमारी न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि व्यक्ति की बोलने, खाने और सामाजिक जीवन की क्षमता पर भी गहरा असर डालती है।

कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपक सुंदरियाल ने बताया कि हेड-नेक कैंसर के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण जिम्मेदार हैं:

  • तंबाकू और शराब: इनका सेवन सबसे बड़ा जोखिम है। दोनों का संयुक्त प्रभाव कैंसर के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।

  • अन्य कारण: मुंह की खराब स्वच्छता (Oral Hygiene), चुभने वाले दांत, वायु प्रदूषण, रसायनयुक्त भोजन, तनाव और अनियमित दिनचर्या।

बीमारी के मुख्य लक्षण

Head and neck cancer awareness: विशेषज्ञों के अनुसार, ये लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:

    1. मुंह में ऐसा छाला जो लंबे समय से न भर रहा हो।

    2. आवाज में भारीपन या बदलाव आना।

    3. गले में लगातार खराश या निगलने में कठिनाई।

    4. गर्दन में किसी भी प्रकार की गांठ या सूजन।

एम्स ऋषिकेश में इस बीमारी के सटीक निदान के लिए बायोप्सी, सीटी स्कैन, एमआरआई और पेट (PET) स्कैन जैसी तकनीकें उपलब्ध हैं। उपचार के तौर पर सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी का उपयोग किया जाता है। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि यदि शुरुआती अवस्था (First Stage) में पता चल जाए, तो मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है।

बचाव के उपाय: जीवनशैली में बदलाव जरूरी

संस्थान की निदेशक प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह ने संदेश दिया कि हेड-नेक कैंसर हमारी जीवनशैली का परिणाम है। इससे बचाव के लिए निम्नलिखित कदम उठाना आवश्यक है:

  • तंबाकू, धूम्रपान और शराब से पूरी तरह दूरी।

  • संतुलित आहार और नियमित व्यायाम।

  • मौखिक स्वच्छता (Oral Hygiene) का विशेष ध्यान रखना।

  • नियमित स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य शिक्षा को बढ़ावा देना।

सावधान: विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि उपचार के बाद भी यदि मरीज नशा (तंबाकू/शराब) नहीं छोड़ता, तो कैंसर के दोबारा होने की प्रबल संभावना बनी रहती है।

हेड-नेक कैंसर के खिलाफ जागरूकता, संयम और समय पर जांच ही सबसे प्रभावी हथियार हैं। व्यक्तिगत और सामाजिक प्रयासों से इस बीमारी के जोखिम को कम किया जा सकता है।

Share This Article
Follow:
newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *