Seed Act 2026 India: घटिया बीज बेचने वालों पर 30 लाख रुपये तक का जुर्माना और कड़ी सजा का प्रावधान प्रस्तावित

Rajesh Pandey
  • नकली बीजों पर होगी सख्त कार्रवाई, परंपरागत बीज प्रणाली रहेगी सुरक्षित: शिवराज सिंह चौहान

  • घटिया बीज बेचने वालों पर 30 लाख रुपये तक का जुर्माना और कड़ी सजा का प्रावधान प्रस्तावित

  • QR कोड और ट्रेसिबिलिटी सिस्टम से बढ़ेगी पारदर्शिता; बीज की पूरी ‘कुंडली’ जान सकेंगे किसान

  • हर बीज कंपनी का पंजीकरण अनिवार्य, अनधिकृत विक्रेताओं पर लगेगी लगाम

Seed Act 2026 India: नई दिल्ली, 16 जनवरी 2026 (PIB): केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज मीडिया से बातचीत में नए सीड एक्ट (Seed Act 2026) की विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने इस विधेयक को किसानों की सुरक्षा, बीजों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक ‘ऐतिहासिक कदम’ बताया।

उन्होंने कहा, 1966 का सीड एक्ट पुराने समय का था जब न तकनीक थी न डेटा। अब हम एक आधुनिक कानून ला रहे हैं, जो ट्रेसिबिलिटी, डिजिटल रिकॉर्ड और जवाबदेही के सिद्धांत पर आधारित है ताकि भविष्य में कोई भी किसान ठगा न जाए

“हर बीज की पूरी कहानी अब किसानों तक पहुँचेगी”

Seed Act 2026 India: केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश में बीजों की ट्रेसिबिलिटी (Traceability) के लिए एक आधुनिक व्यवस्था स्थापित की जा रही है। उन्होंने कहा, “हमने एक ऐसा सिस्टम तैयार किया है जिससे यह पता चल सकेगा कि बीज कहाँ उत्पादित हुआ, किस डीलर ने उसे सप्लाई किया और किसने बेचा।” हर बीज के पैकेट पर QR कोड होगा, जिसे स्कैन कर किसान बीज के स्रोत और शुद्धता की जाँच कर सकेंगे।

केंद्रीय मंत्री चौहान ने स्पष्ट किया कि अब घटिया बीज बेचने वालों की खैर नहीं होगी।

  • जुर्माना: पहले जहाँ जुर्माना मात्र 500 रुपये था, उसे बढ़ाकर अब 30 लाख रुपये तक करने का प्रस्ताव है।

  • सजा: जानबूझकर धोखाधड़ी करने वालों के लिए 3 साल तक की जेल का प्रावधान किया गया है। मंत्री ने कहा, “खराब बीज अब सिस्टम में प्रवेश ही नहीं कर पाएंगे और यदि आए, तो उन्हें तुरंत पकड़कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

परंपरागत बीजों पर कोई पाबंदी नहीं

Seed Act 2026 India: भ्रम को दूर करते हुए कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि नया कानून किसानों की पारंपरिक बीज प्रणाली में हस्तक्षेप नहीं करेगा। किसान अपने बीज बो सकते हैं और आपस में उनका विनिमय (Exchange) कर सकते हैं। गाँवों में प्रचलित ‘सवाया’ या बीज विनिमय की परंपरा पहले की तरह ही सुरक्षित और जारी रहेगी।

कंपनियों का पंजीकरण और ICAR की भूमिका

अब हर बीज कंपनी के लिए पंजीकरण (Registration) अनिवार्य होगा, जिससे अनधिकृत विक्रेताओं को बाजार से बाहर किया जा सके।

  • सार्वजनिक क्षेत्र: ICAR, कृषि विश्वविद्यालय और KVKs को और मजबूत किया जाएगा।

  • विदेशी बीज: विदेश से आने वाले बीजों का कड़ा मूल्यांकन और परीक्षण किया जाएगा।

राज्यों के अधिकार और जागरूकता

कृषि को राज्य का विषय बताते हुए चौहान ने कहा कि राज्य सरकारों के अधिकार यथावत रहेंगे और केंद्र राज्यों के साथ समन्वय कर इसे लागू करेगा। साथ ही, देश के 731 कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के माध्यम से किसानों को जागरूक किया जाएगा।

“हमारा उद्देश्य है कि हर किसान को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित बीज मिले। अच्छी कंपनियों को प्रोत्साहन और धोखेबाजों पर कड़ी कार्रवाई ही इस कानून का मूल मंत्र है।”- शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि मंत्री

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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