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कहानियांः बच्चे सुनेंगे तो बहुत खुश होंगे

ये किसकी पूंछ लगाकर कूद रहे बंदर

अफ्रीका में बिना पूंछ वाला एक जीव पाया जाता है, जिसका नाम डैसी (Dassie) है। इसकी पूंछ क्यों नहीं है, इसका जवाब एक लोककथा से मिलेगा, जो अक्सर सुनाई जाती रही है। बहुत पुरानी बात है, जंगल का राजा शेर ही एक मात्र ऐसा जानवर था, जिसकी पूंछ थी। शेर ने सोचा, क्यों न सभी जानवरों के लिए पूंछ का इंतजाम किया जाए। उसने जानवरों के लिए पूंछ का इंतजाम किया। …आगे पढ़िये

चूहों का पीछा क्यों करती हैं बिल्लियां
क्या आप जानते हैं कि बिल्लियां चूहों का पीछा क्यों करती हैं। इसके पीछे एक चीन की कहानी है। हजारों साल पहले चीन के सम्राट ने 12 साल का राशि चक्र बनाने के लिए जानवरों की दौड़ कराई। दौड़ जीतने वाले 12 जानवरों के नाम से 12 साल का राशि चक्र बनाया जाना था। हर जानवर के नाम पर एक वर्ष का नाम रखा जाना था। दौड़ के लिए सभी जानवरों को आमंत्रित किया गया। …आगे पढ़िये

होशियार गधा और बेवकूफ शेर
गधा एक ऐसा जीव है, जिसे लोग कम अक्ल वाला मानते हैं, लेकिन हम यहां होशियार गधे की कहानी बता रहे हैं, जिसने अपनी बुद्धि का परिचय देते हुए शेर से अपनी जान बचा ली। एक बार गांव के किनारे एक गधा हरी घास चरने में व्यस्त था। उसे मीठी घास इतनी पसंद आ गई कि पता ही नहीं चला कि कब गांव से जंगल में घुस गया। …आगे पढ़िये

पक्षियों की कहानीः मूर्खों को सलाह न दें तो बेहतर
एक जंगल में आम के पेड़ पर कई पक्षी रहते थे। सभी पक्षी अपने छोटे छोटे घोंसलों में खुश थे। बरसात के मौसम की शुरुआत से पहले, जंगल के सभी जानवरों ने अपने घरों की मरम्मत कर ली। पक्षियों ने भी अपने घोंसलो को और अधिक सुरक्षित बना दिया। कई पक्षियों ने टहनियों और पत्तियों से घोंसले मजबूत किए। पक्षियों ने अपने बच्चों के लिए भोजन भी स्टोर कर लिया। …आगे पढ़िये

Rajesh Pandey

उत्तराखंड के देहरादून जिला अंतर्गत डोईवाला नगर पालिका का रहने वाला हूं। 1996 से पत्रकारिता का छात्र हूं। हर दिन कुछ नया सीखने की कोशिश आज भी जारी है। लगभग 20 साल हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। बच्चों सहित हर आयु वर्ग के लिए सौ से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। स्कूलों एवं संस्थाओं के माध्यम से बच्चों के बीच जाकर उनको कहानियां सुनाने का सिलसिला आज भी जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। रुद्रप्रयाग के खड़पतियाखाल स्थित मानव भारती संस्था की पहल सामुदायिक रेडियो ‘रेडियो केदार’ के लिए काम करने के दौरान पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया। सामुदायिक जुड़ाव के लिए गांवों में जाकर लोगों से संवाद करना, विभिन्न मुद्दों पर उनको जागरूक करना, कुछ अपनी कहना और बहुत सारी बातें उनकी सुनना अच्छा लगता है। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम के स्वच्छता का संदेश देने की पहल की। छह माह ढालवाला, जिला टिहरी गढ़वाल स्थित रेडियो ऋषिकेश में सेवाएं प्रदान कीं। बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी संपर्क कर सकते हैं: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला जिला- देहरादून, उत्तराखंड-248140 राजेश पांडेय Email: rajeshpandeydw@gmail.com Phone: +91 9760097344

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