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Reading: Ancient Pottery Math Evidence: 8,000 साल पुरानी मिट्टी की कला में मिला “गणित का सबसे पुराना साक्ष्य”
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Ancient Pottery Math Evidence: 8,000 साल पुरानी मिट्टी की कला में मिला “गणित का सबसे पुराना साक्ष्य”

Rajesh Pandey
Last updated: January 16, 2026 1:04 pm
Rajesh Pandey
3 months ago
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Nax Mallowan excavation at Arpachiyah, Iraq. From the collections of the British Museum and UCL | Credit: Yosef Garfinkel
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Ancient Pottery Math Evidence: Newslive Desk, 16 Jan.2026: आज से हज़ारों साल पहले, जब न कागज़ था, न कलम और न ही संख्याओं (Numbers) का कोई नामोनिशान, तब भी इंसान गणित की जटिल गुत्थियाँ सुलझा रहा था। हाल ही में पुरातत्वविदों ने मेसोपोटामिया की हलाफियन (Halafian) संस्कृति के मिट्टी के बर्तनों पर ऐसी खोज की है, जिसने इतिहास की किताबों को बदलने पर मजबूर कर दिया है।

Contents
ज्यामिति (Geometry) का बेजोड़ नमूनाखेती और समाज का प्रभाव

Ancient Pottery Math Evidence: आमतौर पर माना जाता है कि गणित की शुरुआत लेखन कला (लगभग 3200 ईसा पूर्व) के साथ हुई। लेकिन हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ जेरूसलम के शोधकर्ताओं (प्रो. योसेफ गारफिंकेल और सारा क्रुलविच) ने पाया कि 6200-5500 ईसा पूर्व के दौरान रहने वाले लोग पहले से ही गणित के उस्ताद थे। वे अपनी कला के माध्यम से गणनाएँ करते थे।

हलाफियन संस्कृति के मिट्टी के बर्तनों पर फूलों और पौधों के सुंदर चित्र बने हैं। जब इन चित्रों का बारीकी से अध्ययन किया गया, तो एक अद्भुत पैटर्न सामने आया:

  • दोगुना करने का नियम (Doubling Sequence): इन बर्तनों पर बनी पंखुड़ियों की संख्या बेतरतीब नहीं थी। वे 4, 8, 16, 32 और 64 के क्रम में थीं।

  • गणितीय सोच: यह ठीक वैसा ही क्रम है जिसे आज हम ‘2 की घात’ कहते हैं। 8,000 साल पहले के कलाकार यह जानते थे कि एक संख्या को लगातार दोगुना कैसे किया जाता है।

ज्यामिति (Geometry) का बेजोड़ नमूना

Ancient Pottery Math Evidence: एक गोल कटोरे की घुमावदार सतह पर बिल्कुल बराबर आकार की 64 पंखुड़ियाँ बनाना आज भी एक चुनौती है। इसके लिए हलाफियन कलाकारों को निम्नलिखित बातों का ज्ञान था:

  • सटीक विभाजन (Spatial Division): पूरे घेरे को समान हिस्सों में बांटने की क्षमता।

  • समरूपता (Symmetry): केंद्र बिंदु से हर दिशा में बराबर दूरी और कोण का सटीक अंदाजा।

खेती और समाज का प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि यह गणित केवल शौक के लिए नहीं था। जैसे-जैसे इंसान शिकारी से किसान बना, उसकी ज़रूरतें बदल गईं:

  • जमीन का बँटवारा: खेती के लिए ज़मीन को बराबर हिस्सों में बाँटने के लिए इस ज्यामिति की ज़रूरत पड़ी।

  • समय का हिसाब: फसल चक्र और चंद्रमा की कलाओं को समझने के लिए गणना ज़रूरी थी।

  • साझा संसाधन: गाँव के अनाज को पूरी आबादी में बराबर बांटने के लिए शुरुआती ‘डिवीजन’ (भाग) का जन्म हुआ।

“मिट्टी के ये बर्तन साबित करते हैं कि इंसान पहले गणितज्ञ बना और लेखक बाद में। हमारी सोच का विकास अमूर्त आकृतियों और गणनाओं से हुआ है।” – शोध रिपोर्ट का मुख्य सारांश

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ByRajesh Pandey
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

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