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उत्तराखंड विधानसभा में 2016 से 2021 तक की तदर्थ नियुक्तियां निरस्त, सीएम ने स्पीकर को दी बधाई

उच्च स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने लिया निर्णय

देहरादून। उच्च स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट के बाद विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूड़ी ने विधानसभा में वर्ष 2016 से 2021 तक हुई तदर्थ नियुक्तियों को निरस्त कर दिया। कमेटी की संस्तुतियों के आधार पर स्पीकर ने 2016 में 150, 2020 में छह तथा वर्ष 2021 में की गईं 72 तदर्थ भर्तियों को निरस्त किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा अध्यक्ष के इस निर्णय का स्वागत किया है।

मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण को बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान में सदन और सरकार एकजुट हैं। विधानसभा भर्ती मामले में मुख्यमंत्री ने सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए विधानसभा अध्यक्ष से भर्तियों की जांच करने का आग्रह किया था। विधानसभा अध्यक्ष ने सरकार की मंशा के अनुसार इस पर उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर समयबद्ध तरीके से जांच के निर्देश दिए थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सुशासन की दिशा में कृत संकल्पित होकर काम कर रही है। किसी भी प्रकार से कोई भ्रष्टाचार सहन नहीं किया जाएगा। UKSSSC और अन्य भर्तियों में अनियमितता पाए जाने पर उन्हें पारदर्शिता से आयोजित करने के लिए उत्तराखंड लोक सेवा आयोग को हस्तांतरित किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं के साथ कोई अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। युवा पूरे उत्साह और परिश्रम से परीक्षाओं की तैयारी में जुट जाएं। वर्तमान में 7000 परीक्षाओं की भर्ती प्रक्रिया गतिमान है और 12 हजार पदों पर भर्ती की कार्ययोजना पर भी काम कर रहे हैं।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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