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रक्षाबंधन के लिए राखियां और सजावटी सामान यहां से खरीदें

नई दिल्ली।  ट्राइब्स इंडिया में शानदार दस्तकारी, धातु से बनी सजावटी चीजों और बड़े पैमाने पर जैविक हर्बल उत्पाद उपलब्ध हैं। ये सभी चीजें खुदरा दुकानों और ऑनलाइन ई-वाणिज्य प्लेटफार्मों से खरीदी जा सकती हैं। परिवार वालों और मित्रों के लिए तोहफे खरीदने के लिए ट्राइब्स इंडिया (Tribes India) की एक ही दुकान काफी है, जहां सब-कुछ उपलब्ध है। कहीं और जाने की जरूरत ही नहीं है।

रक्षाबंधन का त्योहार आने वाला है। इसे मद्देनजर रखते हुए ट्राइब्स इंडिया कैटलॉग में एक विशेष राखी फीचर रखा गया है, जहां आकर्षक राखियां उपलब्ध हैं। ये राखियां भारत की विभिन्न जनजातियों द्वारा हस्त-निर्मित हैं।

राखियों के अलावा पूजा की सामग्री भी उपलब्ध है, जैसे तराशी गई धातुओं की पूजा-पेटिकाएं और तोरण। साथ में पुरुषों और महिलाओं के लिये रंग-बिरंगे कुर्ते भी उपलब्ध हैं। महिलाओं के लिए तरह-तरह की स्टाइल वाले जैकेट, साड़ियों की विशाल श्रृंखला, जैसे माहेश्वरी, चंदेरी, बाग, कांथा, भंडारा, टसर, सम्भलपुरी और इकाट परंपराओं वाली साड़ियां, कपड़े और सुंदर स्टोल खरीदे जा सकते हैं। ये सभी सामान ट्राइब्स इंडिया की खुदरा दुकानों और वेबसाइट पर मिल जाएगा।

जनजातीय उत्पादों को बाजार में उतारने और उनके विकास के जरिये जनजातियों की आजीविका को प्रोत्साहन देने तथा उन्हें शक्ति-सम्पन्न बनाने के प्रयास ट्राइफेड लगातार कर रहा है।

वह ट्राइब्स इंडिया नेटवर्क के माध्यम से उत्पादों की विशाल और विविध श्रृंखला को विस्तार दे रहा है।

ट्राइब्स इंडिया की 137 खुदरा दुकानें और ई-वाणिज्य प्लेटफार्म (www.tribesindia.com) हर तरह की जरूरतें पूरी कर रहा है।

जैविक हल्दी, सूखा अमला, जंगलों से जमा किया हुआ शहद, काली मिर्च, रागी, त्रिफला, मूंग दाल,  उड़द दाल, सफेद सेम और दलिया जैसे जैविक उत्पादों के साथ-साथ वर्ली शैली या पत्तचित्र  शैली की चित्रकारी, डोकरा शैली के हाथ से बने आभूषण, पूर्वोत्तर के वानचो  और कोन्याक  जनजातियों के मनके वाले हार, रेशमी और अन्य शानदार लिबास, रंग-बिरंगे गुड्डे-गुड़िया, बच्चों के खिलौने, पारंपरिक बुनी हुई डोंगरिया शॉल और बोडो जनजाति के बुने हुए कपड़े, धातु से बनी चीजें, बांस के उत्पाद, यानी हर तरह की वस्तुयें यहां उपलब्ध हैं, जिन्हें तोहफे के तौर पर खरीदा जा सकता है।

इन वस्तुओं को आकर्षक गिफ्ट-पैक या हैम्पर में रखा जा सकता है, जिसकी व्यवस्था बजट और जरूरतों को ध्यान में रखकर की जा सकती है।

इन गिफ्ट हैम्परों को जैविक, री-साइकिल की हुई सामग्री में पैक किया जाता है। यह टिकाऊ पैकेट होता है, जिसका डिजाइन सुश्री रीना ढाका ने ट्राइब्स इंडिया के लिए तैयार किया है। इन सजावटी हैम्परों में बंधा हुआ उपहार हर अवसर पर आकर्षण का केंद्र बन जाता है।

रक्षाबंधन जैसे प्रेम और सुरक्षा के त्योहार पर उपहार देने के लिए आप अपने सबसे नजदीकी ट्राइब्स इंडिया के शो-रूम या वेबसाइट के जरिए इन उत्पादों को खरीद सकते हैं।

 

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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