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किसानों और छात्र-छात्राओं को मशरूम और मौन पालन का प्रशिक्षण

उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं शोध केंद्र, देहरादून की दो दिवसीय कृषि उद्यमिता कार्यशाला

देहरादून। उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं शोध केंद्र, देहरादून की दो दिवसीय कृषि उद्यमिता कार्यशाला में कृषकों और कृषि विज्ञान के छात्र – छात्राओं को मशरूम उत्पादन और मौनपालन का प्रशिक्षण दिया गया। उनको बताया गया कि किस तरह से मशरूम  व मौन पालन से आय में वृद्धि कर सकते हैं।

प्लांटिका संस्थान, देहरादून में कार्यशाला का आयोजन प्लांटिका संस्थान, देहरादून एवं श्री देवसुमन विश्वविद्यालय, ऋषिकेश के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसमें देहरादून के सिमलास ग्रांट से आए कृषकों और राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए कृषि विज्ञान के छात्र – छात्राओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. अनीता रावत, निदेशक, युसर्क विशेष अतिथि प्रो. जेएस चौहान, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, प्लांटिका के संस्थापक वैज्ञानिक डॉ. अनूप बडोनी तथा कार्यक्रम संयोजक डॉ. पूजा कैंतुरा ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया।

मुख्य अतिथि डॉ. अनीता रावत ने कहा कि कृषकों के लिए मशरूम उत्पादन और मौनपालन आय का अलग स्रोत हो सकता है। अगर खेती के साथ साथ इनका भी उत्पादन करें। सरकार की ऐसी बहुत सी योजनाएं हैं, जिनकी मदद से कृषक लाभ उठा सकते हैं, और कृषि से आय को बढ़ा सकते हैं।

डॉ. जेएस चौहान ने कहा कि कृषि उद्यमिता में बहुत से ऐसे विषय हैं, जैसे कि मछली पालन, मुर्गी पालन आदि से किसान को खेती के साथ साथ काफी अच्छा मुनाफा होगा और मौन पालन करने से उनकी फसलों का उत्पादन तो बढ़ेगा ही, साथ ही शहद एवं मौन पालन से निकलने वाले अन्य उत्पादों से भी आय में वृद्धि कर सकते हैं।

मुख्य वक्ता मेघा सुमन ने कृषकों एवं कृषि विज्ञान के छात्र- छात्राओं को बटन तथा ढींगरी मशरूम उत्पादन तकनीक के बारे में विस्तार से बताया तथा मशरूम के गुणों की जानकारी दी।

वैज्ञानिक अधिकारी आदर्श डंगवाल ने कृषकों एवं छात्र- छात्राओं को औषधीय मशरूम और मशरूम में लगने वाले रोग, कीट पतंगों व उनके रोकथाम के लिए विशेष प्रणाली की जानकारी दी।

कार्यशाला के दूसरे दिन की शुरुआत मौनपालन के साथ हुई, जिसमे डॉ. अनूप बडोनी ने मौन पालन के बारे में विस्तार से बताया। वैज्ञानिक अधिकारी आशीष नेगी व टेक्निकल एसोसिएट चन्दन कुमार ने राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए कृषकों व छात्र-छात्राओं को मौन पालन व मशरूम बेगिंग और मशरूम की बिजाई का हैंड्स ऑन प्रशिक्षण दिया।

कार्यशाला के समापन पर मुख्य अतिथि डॉ. सतपाल सिंह, प्राचार्य, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रायपुर, देहरादून तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. मधु थपलियाल, हेड जूलॉजी, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रायपुर, देहरादून का स्वागत किया गया। प्रतिभागियों को उनका प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इस मौके पर डॉ. निधि रावत, डॉ. दीपाली, एवं डॉ. कनिका आदि उपस्थित रहे।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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