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केके सचदेवा सातवीं बार हनुमंतपुरम विकास मंच के अध्यक्ष

ऋषिकेश। गंगानगर के “हनुमंतपुरम विकास मंच” के चुनाव में केके सचदेवा को सर्वसम्मति से सातवीं बार अध्यक्ष चुना गया।
नवनिर्वाचित अध्यक्ष  सचदेवा ने कहा, मंच विकास, सामाजिक, सांस्कृतिक, सुरक्षा संबंधी विषयों के साथ ही पारस्परिक सौहार्द्र, धार्मिक एवं पर्यावरण संरक्षण के कार्यों के लिए संकल्पबद्ध है।
मंच के अध्यक्ष सचदेवा ने बताया कि मंच का गठन जनवरी 2011 में किया गया था। मंच की वर्तमान कार्यकारिणी का चयन शीघ्र ही किया जाएगा। चुनाव के लिए आयोजित बैठक में उन्होंने पिछले वर्षों के कार्यक्रमों की  जानकारी दी। मंच के कोषाध्यक्ष हरीश गुलाटी ने आय व्यय का लेखा जोखा पेश किया।
बैठक में विभिन्न मुद्दों पर भी विचार विमर्श किया गया। बैठक की अध्यक्षता सचदेवा और संचालन सचिव जितेंद्र रावत ने किया।
बैठक में पूर्व सभासद बृजपाल राणा, पीडी बिजल्वाण,  अतुल गुप्ता, राम रतन शर्मा, चंद्रभान आसूजा, योगेश ब्रेजा, हरीश गुलाटी, जितेंद्र रावत, सागर अरोड़ा, राजेश सूद, सौरभ कालड़ा, प्रदीप बक्शी, राजेंद्र भोला, संजय खरबंदा, लिखवार सिंह नेगी, अरुण चावला, मकान सिंह नेगी, विक्रांत अरोरा, साहिल ग्रोवर, संजीव कालड़ा,  कमल असवाल, भास्कर कुलियाल, राजेंद्र सिंह कृषाली आदि उपस्थित रहे।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन किया। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते थे, जो इन दिनों नहीं चल रहा है। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन किया।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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