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दुनिया में 81 करोड़ से अधिक भूखमरी से जूझ रहे, खाने की बर्बादी रोकना बहुत जरूरी

Rajesh Pandey
Last updated: October 5, 2021 11:28 am
Rajesh Pandey
5 years ago
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संयुक्त राष्ट्र ने सचेत किया है कि भोजन की कमी, भुखमरी और कुपोषण की समस्या से दुनिया का हर देश पीड़ित है, इसलिए भोजन की हानि व बर्बादी रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई की जानी होगी। खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के अनुसार, वर्ष 2019 में उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कुल भोजन का 17 फ़ीसदी हिस्सा फेंक दिया गया और वह बर्बाद हो गया।

क्या आप जानते हैं-

29 सितम्बर, को ‘भोजन की हानि व बर्बादी पर अन्तरराष्ट्रीय जागरूकता दिवस’ मनाया जाता है।

कोविड-19 महामारी के कारण 13 करोड़ से अधिक अतिरिक्त लोगों को भोजन व पोषण असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है।

खाद्य एवं कृषि संगठन की खाद्य एवं पोषण शाखा के आर्थिक व सामाजिक विकास विभाग की उप निदेशक नैन्सी ऐबुर्तो के अनुसार, भोजन की बर्बादी एक वैश्विक समस्या है और यह महज़ धनी देशों तक सीमित नहीं है। खाद्य असुरक्षा, भुखमरी और कुपोषण, विश्व में हर देश को प्रभावित कर रहे हैं और कोई भी देश इससे अछूता नहीं है।

दुनिया में 81 करोड़ से अधिक लोग भूखमरी से पीड़ित हैं, दो अरब लोगों में सूक्ष्म पोषक तत्वों (micronutrient) की कमी है और लाखों बच्चे नाटेपन का शिकार हैं, जो पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पा रहे हैं।

भोजन की बर्बादी को रोकने के लिये देशों को नवाचारी उपाय अपनाने की आवश्यकता है। इसके तहत भोजन ग्रहण करने की अवधि को बढ़ाने के लिए उसकी नई तरह से पैकेजिंग करना, स्मार्टफ़ोन ऐप के ज़रिये उपभोक्ताओं और किसानों को नज़दीक लाना और फ़सल की कटाई व उसे प्लेट तक पहुँचाने के बीच के समय में कमी लाने सहित अन्य उपाय हैं।

भोजन की हानि और बर्बादी में कमी लाकर, कृषि-खाद्य प्रणालियों को बेहतर बनाया जा सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा, संरक्षा व गुणवत्ता हासिल करने में मदद मिलेगी।

इस साल, फलों और सब्ज़ियों के अन्तरराष्ट्रीय वर्ष के दौरान, यूएन एजेंसी ने खाद्य व पोषण सुरक्षा और टिकाऊ विकास लक्ष्य हासिल करने में उनकी भूमिका को रेखांकित किया है।

भोजन की हानि व बर्बादी में कमी लाकर खाद्य प्रणालियों को मज़बूत बनाया जा सकता है और ऐसा करने से, ग्रह के स्वास्थ्य में बेहतरी लाने में भी मदद मिलेगी।

खाद्य प्रणालियों की दक्षता में वृद्धि, और भोजन की हानि व बर्बादी में कमी लाने के लिये नवाचार, टैक्नॉलॉजी व बुनियादी ढाँचे में संसाधन निवेश की आवश्यकता है।

बर्बाद भोजन को कूड़ा-खाद (composting) के रूप में इस्तेमाल करना, उसे कचरा-भराव क्षेत्र (landfill) में ले जाने से बेहतर है। मगर, भोजन की बर्बादी को पहले से ही रोकने के प्रयास करके, पर्यावरण पर इसके असर को कम किया जा सकता है।

साभार- संयुक्त राष्ट्र समाचार

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

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