रिपोर्टः मानव अस्तित्व के लिए बहुत जरूरी है जैवविविधता को बनाए रखना

Rajesh Pandey
इंडिया साइंस वायर
मानव और प्रकृति के बीच एक महत्वपूर्ण और स्थायी संबंध है। मनुष्य ने विकास के नाम पर प्रकृति का दोहन करके वन्यजीवों के साथ-साथ प्रकृति के अस्तित्व के लिए संकट खड़ा कर दिया है। मनुष्य ने इस कथित विकासक्रम में वायु एवं जल को प्रदूषित किया है। इसी तरह, वन-संपदा के अनियंत्रित दोहन ने वन्यजीवों के अस्तित्व पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
इंडिया साइंस वायर में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड की रिपोर्ट लिविंग प्लैनेट के अनुसार प्राकृतिक क्षेत्रों में लगातार बढ़ती मानवीय गतिविधियों के कारण वर्ष 1970 के बाद से अब तक दुनियाभर में जीव-जंतुओं की संख्या में 60 फीसदी कमी आई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वन्य क्षेत्रों में मानवीय गतिविधियां इसी तरह बढ़ती रहीं, तो दुनिया में वन्यजीव अपने अंत की ओर अग्रसर हो जाएंगे।
पर्यावरण में संतुलन बनाए रखने के लिए जैव-विविधता बेहद महत्वपूर्ण है। जैव-विविधता से तात्पर्य विभिन्न प्रकार के जीव−जंतु और पेड़-पौधों की प्रजातियों से है। वैज्ञानिक मानते हैं कि जैव-विविधता की कमी से बाढ़, सूखा और तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ जाता है।
जैव-विविधता से संबंधित विषयों के संदर्भ में जागरूकता विकसित करने के लिए प्रति वर्ष 22 मई को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस की थीम ‘प्रकृति में हमारे समाधान’ है। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा शुरू किए गए इस दिन को ‘विश्व जैव-विविधता संरक्षण दिवस‘ भी कहा जाता है।
वर्ष 1993 में सबसे पहले जैव-विविधता के लिए पहला अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया गया। वर्ष 2000 तक यह दिवस 29 दिसंबर को आयोजित किया जाता था, क्योंकि इस दिन जैव-विविधता पर कन्वेंशन लागू हुआ था। लेकिन, बाद में इसे 29 दिसंबर से शिफ्ट करके 22 मई कर दिया गया।
अंतरराष्ट्रीय जैव-विविधता सम्मेलन, जो एक बहुपक्षीय संधि है, के तहत वर्ष 1992 में ब्राज़ील में हुए संयुक्त राष्ट्र पृथ्वी सम्मेलन के दौरान सहमति बनी थी। इसके तीन प्रमुख लक्ष्य हैं- जैविक विविधता का संरक्षण, प्रकृति का टिकाऊ उपयोग और आनुवांशिकी-विज्ञान से मिलने वाले लाभों का निष्पक्ष व न्यायोचित ढंग से वितरण।
अंतरराष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस का उद्देश्य ऐसे पर्यावरण का निर्माण करना है, जो जैव-विविधता में समृद्ध, टिकाऊ एवं आर्थिक गतिविधियों के लिए अवसर प्रदान कर सके।
इसमें विशेष तौर पर वनों की सुरक्षा, संस्कृति, जीवन के कला शिल्प, संगीत, वस्त्र, भोजन, औषधीय पौधों का महत्व आदि को प्रदर्शित करके जैव-विविधता के महत्व और उसके न होने पर होने वाले खतरों के बारे में जागरूक करने जैसे विषय शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र की प्रोटेक्टेड प्लैनेट रिपोर्ट के अनुसार जैव-विविधता के नजरिये से महत्वपूर्ण एक-तिहाई क्षेत्रों, जैसे- भूमि, अन्तर्देशीय जलक्षेत्र, एवं महासागरों को किसी प्रकार की सुरक्षा प्राप्त नहीं है।
विश्व संरक्षण निगरानी केंद्र (डब्ल्यूसीएमसी) के निदेशक नेविल एश ने कहा है कि सुरक्षा प्राप्त क्षेत्र, जैव-विविधता को लुप्त होने से रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं और हाल के वर्षों में रक्षित व संरक्षित क्षेत्रों के वैश्विक नैटवर्क को मजबूती प्रदान करने में बड़ी प्रगति भी हुई है।
पूरे विश्व में जैव-विविधता संरक्षण मुख्य रूप-से मनुष्य द्वारा जल, जंगल, जमीन एवं महासागरों के प्रति किए जाने वाले व्यवहार पर निर्भर है। पृथ्वी पर अधिकांश जैव-विविधता वन्य क्षेत्रों में फलती-फूलती है। इसीलिए, वनों का संरक्षण कई मायनों में बेहद अहम हो जाता है।
वर्ष 2020 में स्टेट ऑफ द वर्ल्ड फॉरेस्ट रिपोर्ट के अनुसार वनों में विभिन्न वृक्षों की 60 हजार से अधिक प्रजातियां पायी जाती हैं। इसी तरह, 80 प्रतिशत उभयचर प्रजातियां, पक्षियों की 75 फीसदी प्रजातियां, और पृथ्वी के स्तनपायी जीवों की 68 प्रतिशत प्रजातियां पायी जाती हैं। इन प्रजातियों के संरक्षण के लिए प्रभावी प्रयास आवश्यक हैं।
दूसरी तरफ मानवीय गतिविधियों का प्रभाव समुद्री जीव-जन्तुओं पर भी पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार वर्ष 1980 के बाद से समुद्री जल में 10 गुना प्लास्टिक प्रदूषण की बढ़ोतरी देखने को मिली है, जिसके कारण कम से कम 267 समुद्री प्रजातियों के लिए खतरा बढ़ गया है। इन प्रजातियों में करीब 86 फीसदी समुद्री कछुए, 44 फीसदी समुद्री पक्षी और 43 प्रतिशत समुद्री स्तनपायी जीव शामिल हैं।
 Keywords: अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस की थीम, प्रकृति में हमारे समाधान, ‘विश्व जैव-विविधता संरक्षण दिवस’, समुद्र में प्लास्टिक प्रदूषण, वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड,लिविंग प्लैनेट,Theme of International Biodiversity Day, Our Solutions in Nature, ‘World Biodiversity Conservation Day’, Plastic Pollution at Sea, World Wildlife Fund, Living Planet 
Share This Article
Follow:
newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *