Ramsar Sites in India: नई दिल्ली, 1 नवंबर, 2026ः रामसर कन्वेंशन के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों (wetlands) के भारत के नेटवर्क का विस्तार वर्ष 2014 से अब तक लगभग चार गुना हो चुका है। नामित स्थलों की संख्या 26 से बढ़कर 103 तक पहुंच गई है, जो 13.87 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैले हैं। एशिया में प्रथम और विश्व स्तर पर तीसरे स्थान पर स्थित ये इकोसिस्टम जैव विविधता के संरक्षण, बाढ़ के प्रभाव को कम करने, भूजल पुनर्भरण तथा आजीविका को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन्हें अक्सर “पृथ्वी के गुर्दे” (Kidneys of the Earth) कहा जाता है क्योंकि ये जल को प्राकृतिक रूप से शुद्ध करती हैं, तथा “विशाल प्राकृतिक स्पंज” के रूप में बाढ़ के प्रभाव को कम करती हैं।
आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन ) नियम, 2017 के आधार पर भारत सरकार जलीय पारिस्थितिकी प्रणालियों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय योजना (एनपीसीए), अमृत धरोहर, मिष्टी,और मिशन सहभागिता के माध्यम से वैज्ञानिक एवं जनभागीदारी आधारित संरक्षण को बढ़ावा दे रही है, ताकि दीर्घकालिक पारिस्थितिक सुदृढ़ता सुनिश्चित की जा सके।
भारत में रामसर स्थल
Ramsar Sites in India: रामसर कन्वेंशन के अनुसार, “आर्द्रभूमियां दलदल, दलदली भूमि, पीटभूमि या जल वाले ऐसे क्षेत्र हैं, चाहे वे प्राकृतिक हों या कृत्रिम, स्थायी हों या अस्थायी, जिनमें स्थिर या प्रवाहित, मीठा, खारा या लवणीय जल पाया जाता है। इसमें समुद्री जल के वे क्षेत्र भी शामिल हैं, जहाँ निम्न ज्वार के समय जल की गहराई छह मीटर से अधिक नहीं होती।” भूमि और जल को जोड़ने वाली आर्द्रभूमियाँ मीठे जल का भंडारण करती हैं, भूजल का पुनर्भरण करती हैं, बाढ़ के प्रभाव को कम करती हैं तथा मत्स्य पालन और कृषि को बनाए रखती हैं। ये प्रवासी पक्षियों और समृद्ध जैव विविधता को भी आश्रय प्रदान करती हैं, जिससे ये पृथ्वी के सर्वाधिक उत्पादक इकोसिस्टमों में शामिल हैं।
वैश्विक स्तर पर इन प्राकृतिक पर्यावासों का संरक्षण आर्द्रभूमि कन्वेंशन अथवा रामसर कन्वेंशन नामक अंतर-सरकारी संधि के अंतर्गत किया जाता है। इसे 2 फरवरी 1971 को ईरान के रामसर शहर में स्वीकृत किया गया था और इसे वर्ष 1975 में लागू किया गया। अक्टूबर 2026 तक, इसमें 172 संविदाकारी पक्ष शामिल हैं तथा इसके अंतर्गत विश्वभर में 2,536 से अधिक स्थल “रामसर स्थल” के रूप में नामित किए जा चुके हैं। भारत, जहाँ बड़ी संख्या में आर्द्रभूमियाँ मौजूद हैं, 1 फरवरी 1982 को इस कन्वेंशन का पक्षकार बना। तब से देश में रामसर स्थलों के नेटवर्क का निरंतर विस्तार हुआ है।
भारत के प्रथम रामसर स्थलओडिशा की चिल्का झील और राजस्थान के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान को 1 अक्टूबर 1981 को भारत के प्रथम रामसर स्थलों के रूप में नामित किया गया था। सफल पारिस्थितिक पुनर्स्थापन के बाद, चिल्का झील को वर्ष 2002 में मॉन्ट्रेक्स रिकॉर्ड से हटा दिया गया। बाद में, चिल्का विकास प्राधिकरण को रामसर आर्द्रभूमि संरक्षण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मॉन्ट्रेक्स रिकॉर्ड क्या है:मॉन्ट्रेक्स रिकॉर्ड रामसर स्थलों का एक ऐसा रजिस्टर है, जिसमें उन स्थलों को शामिल किया जाता है, जहाँ पारिस्थितिक विशेषताओं में परिवर्तन हो चुका है, हो रहा है या होने की आशंका है। यह उन आर्द्रभूमियों की पहचान करता है, जिन्हें संरक्षण के लिए प्राथमिकता दिए जाने की आवश्यकता है, तथा उनकी निगरानी, सुधारात्मक उपायों और संसाधनों के आवंटन के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है। किसी स्थल को संबंधित देश और प्रासंगिक वैज्ञानिक विशेषज्ञों के परामर्श से इस रिकॉर्ड में शामिल किया जाता है। सफल सुधारात्मक उपायों का दस्तावेजीकरण हो जाने या पारिस्थितिक परिवर्तन का खतरा समाप्त हो जाने पर उस स्थल को मॉन्ट्रेक्स रिकॉर्ड से हटाया जा सकता है। |
Ramsar Sites in India: भारत की रामसर स्थलों की सूची में हाल ही में शामिल किए गए स्थलसुखना आर्द्रभूमि (चंडीगढ़) शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में वर्ष 1958 में बनाया गया एक मानव-निर्मित जलाशय है। यह पलास फिश ईगल, कॉमन पोचार्ड और ब्लैक पोंड टर्टल जैसी लुप्तप्राय प्रजातियों को आश्रय प्रदान करता है। मध्य एशियाई फ्लाईवे से होकर आने वाले प्रवासी पक्षी भोजन प्राप्त करने और शीतकाल बिताने के लिए इस आर्द्रभूमि पर निर्भर रहते हैं। सौज झील (उत्तर प्रदेश) मैनपुरी जिले में स्थित बाढ़ के मैदान की एक उथली झील है, जहाँ 30,000 से अधिक जलीय पक्षी नियमित रूप से आते हैं। यह सारस और वृहद चित्तीदार चील जैसी लुप्तप्राय पक्षी प्रजातियों को घोंसले बनाने तथा भोजन की तलाश करने के लिए उपयुक्त आवास प्रदान करती है। इसके पवित्र कमल और जंगली गन्ने के घने क्षेत्र घोंसले बनाने वाले पक्षियों, मछलियों और उभयचरों को आश्रय प्रदान करते हैं। |
रामसर स्थलों की राज्यवार सूची
नीचे दी गई तालिका में राज्य और केंद्रशासित प्रदेश के अनुसार सभी 103 रामसर स्थलों तथा उनके प्रमुख संरक्षण महत्व का उल्लेख किया गया है।
| राज्य /केंद्रशासित प्रदेश | रामसर स्थल | इसकी क्या विशेषता है | |
| 1 | आंध्र प्रदेश | कोलेरू झील | मीठे पानी की झील; ग्रे पेलिकन और प्रवासी जलपक्षी |
| 2 | अरुणाचल प्रदेश | ग्लॉ झील | पूर्वी हिमालयी झील; 150 से अधिक वृक्ष और ऑर्किड की 49 प्रजातियाँ। |
| 3 | असम | दीपोर बील | ब्रह्मपुत्र की बाढ़भूमि वाला आर्द्रभूमि क्षेत्र; प्रवासी जलपक्षी |
| 4 | बिहार | कंवर झील (काबरताल) | बाढ़भूमि आर्द्रभूमि; प्रवासी जलपक्षी और मछलियाँ |
| 5 | नागी पक्षी अभयारण्य | मानव निर्मित जलाशय; शीतकाल में आने वाले जलपक्षी | |
| 6 | नकटी पक्षी अभयारण्य | मानव निर्मित जलाशय; शीतकाल में आने वाले जलपक्षी | |
| 7 | गोकुल जलाशय | गंगा की विसर्प झील; पक्षी, मत्स्य पालन और बाढ़ के प्रभाव को कम करने में सहायक | |
| 8 | उदयपुर झील | विसर्प झील; शीतकाल में प्रवासी जलपक्षी | |
| 9 | गोगाबिल झील | विसर्प झील; स्थानीय एवं प्रवासी पक्षी | |
| 10 | चंडीगढ़ | सुखना आर्द्रभूमि | वर्षाजल पर निर्भर, शहरी परिधि में स्थित जलाशय; प्रवासी एवं स्थानीय पक्षी |
| 11 | छत्तीसगढ़ | कोपरा जलाशय | जलाशय; स्थानीय एवं प्रवासी जलपक्षी |
| 12 | गोवा | नंदा झील | प्राकृतिक मीठे पानी की झील; शीतकालीन प्रवासी जलपक्षी |
| 13 | गुजरात | नलसरोवर | प्राकृतिक मीठे पानी की झील; सारस एवं अन्य जलपक्षी |
| 14 | वधवाना आर्द्रभूमि | सिंचाई जलाशय; शीतकालीन प्रवासी पक्षी | |
| 15 | थोल झील वन्यजीव अभयारण्य | मानव निर्मित जलाशय; सारस सहित जलपक्षी | |
| 16 | खिजड़िया वन्यजीव अभयारण्य | कच्छ की खाड़ी के निकट तटीय मीठे पानी एवं लवणीय दलदली आर्द्रभूमि; विविध प्रकार के पक्षी। | |
| 17 | छारी ढांड | बन्नी के निकट मौसमी मरुस्थलीय आर्द्रभूमि; सारस एवं फ्लेमिंगो | |
| 18 | हरियाणा
| सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान | स्थानीय एवं प्रवासी जलपक्षी |
| 19 | भिंडावास वन्यजीव अभयारण्य | मानव निर्मित मीठे पानी की आर्द्रभूमि; प्रवासी पक्षी | |
| 20 | हिमाचल प्रदेश
| पोंग बाँध झील | ब्यास जलाशय; शीतकालीन जलपक्षी |
| 21 | चंद्रताल आर्द्रभूमि | उच्च हिमालयी झील; हिम तेंदुए का आवास | |
| 22 | रेणुका आर्द्रभूमि | झरनों से पोषित झील; जलीय एवं वन जैव विविधता | |
| 23 | झारखंड | उधवा झील पक्षी अभयारण्य | गंगा से जुड़ी जुड़वाँ झीलें; प्रवासी एवं स्थानीय जलपक्षी |
| 24 | कर्नाटक | रंगनाथिट्टू पक्षी अभयारण्य | कावेरी नदी के द्वीप; घोंसले बनाने वाले जलपक्षी एवं मगर |
| 25 | अघनाशिनी मुहाना | ज्वारनदमुख एवं मैंग्रोव वन; मत्स्य पालन | |
| 26 | मगड़ी केरे संरक्षण रिज़र्व | मानव निर्मित तालाब; शीतकालीन बार-हेडेड गूज | |
| 27 | अंकसमुद्र पक्षी संरक्षण रिज़र्व | गाँव का सिंचाई तालाब; घोंसले बनाने वाले जलपक्षी | |
| 28 | केरल | अष्टमुडी आर्द्रभूमि | ज्वारनदमुखीय पश्चजल क्षेत्र; मत्स्य पालन एवं मैंग्रोव वन |
| 29 | सस्थमकोट्टा झील | झरनों से पोषित मीठे पानी की झील; पेयजल का स्रोत | |
| 30 | वेम्बनाड-कोल आर्द्रभूमि | दक्षिण-पश्चिमी तट पर सबसे बड़ी खारी आर्द्रभूमि | |
| 31 | मध्य प्रदेश | भोज आर्द्रभूमियाँ | भोपाल की ऊपरी एवं निचली झीलें; जलापूर्ति एवं पक्षी |
| 32 | सिरपुर आर्द्रभूमि | इंदौर में स्थित मानवनिर्मित आर्द्रभूमि; प्रवासी पक्षी | |
| 33 | साख्य सागर | माधव राष्ट्रीय उद्यान में स्थित जलाशय; मगर | |
| 34 | यशवंत सागर | इंदौर के निकट जलाशय; सारस एवं जलापूर्ति | |
| 35 | तवा जलाशय | सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व में स्थित जलाशय; जलीय जीव-जंतु एवं पक्षी जीवन | |
| 36 | महाराष्ट्र | नांदूर मध्यमेश्वर | पक्षी अभयारण्य; प्रवासी जलपक्षी |
| 37 | लोनार झील | उल्कापिंड के प्रभाव से बनी क्रेटर झील; लवणीय-क्षारीय इकोसिस्टम | |
| 38 | ठाणे क्रीक | मैंग्रोव वन; फ्लेमिंगो एवं प्रवासी पक्षी | |
| 39 | मणिपुर | लोकटक झील | तैरते हुए फुमदी द्वीप; संगाई हिरण का आवास |
| 40 | मिजोरम | पाला आर्द्रभूमि | मिजोरम की सबसे बड़ी प्राकृतिक आर्द्रभूमि; हूलॉक गिब्बन |
| 41 | ओडिशा | चिल्का झील | खारे पानी की लैगून; इरावदी डॉल्फ़िन, जलपक्षी एवं मछलियों की 118 प्रजातियाँ |
| 42 | भीतरकनिका मैंग्रोव | मैंग्रोव वन; खारे पानी का मगरमच्छ एवं ऑलिव रिडले कछुआ | |
| 43 | सतकोसिया गॉर्ज | महानदी का नदीय गॉर्ज; घड़ियाल एवं मगर | |
| 44 | ताम्परा झील | मीठे पानी की झील; मछलियाँ एवं जलपक्षी | |
| 45 | हीराकुंड जलाशय | विशाल जलाशय; मछलियाँ एवं जलपक्षी | |
| 46 | अंसुपा झील | महानदी की विसर्प झील; पक्षी एवं मछलियाँ | |
| 47 | पंजाब | हरिके झील | नदी संगम पर स्थित जलाशय; प्रवासी जलपक्षी |
| 48 | कांजली झील | काली बेईं पर बैराज से निर्मित आर्द्रभूमि; जलपक्षी | |
| 49 | रोपड़ झील | सतलुज बैराज जलाशय; जलपक्षी | |
| 50 | ब्यास संरक्षण रिज़र्व | नदी का विस्तार; सिंधु नदी डॉल्फ़िन एवं घड़ियाल | |
| 51 | केशोपुर-मियानी सामुदायिक रिजर्व | सामुदायिक प्रबंधन वाली आर्द्रभूमि; जलपक्षी | |
| 52 | नंगल वन्यजीव अभयारण्य | शिवालिक की तलहटी में स्थित जलाशय; जलपक्षी | |
| 53 | राजस्थान | केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान | जलपक्षी; साइबेरियन क्रेन का ऐतिहासिक शीतकालीन प्रवास स्थल |
| 54 | सांभर झील | विशाल अंतर्देशीय लवणीय झील; फ्लेमिंगो | |
| 55 | मेनार आर्द्रभूमि परिसर | समुदाय द्वारा संरक्षित ग्राम्य आर्द्रभूमियाँ; प्रवासी पक्षी | |
| 56 | खीचन आर्द्रभूमि | शीतकाल में आने वाले डेमोइसेल क्रेन; सामुदायिक संरक्षण | |
| 57 | सिलीसेढ़ झील | अलवर के निकट जलाशय; आर्द्रभूमि जैव विविधता | |
| 58 | सिक्किम | खेचेओपलरी आर्द्रभूमि | पटलभूमि एवं वन से युक्त पवित्र हिमालयी झील |
| 59 | तमिलनाडु | पॉइंट कैलिमेरे वाइल्डलाइफ़ और बर्ड सैंक्चुअरी | तटीय आर्द्रभूमि; फ्लेमिंगो एवं प्रवासी तटीय पक्षी |
| 60 | कूनथनकुलम पक्षी अभयारण्य | दक्षिण भारत का सबसे बड़ा जलपक्षी प्रजनन अभयारण्य | |
| 61 | चित्रांगुडी पक्षी अभयारण्य | जलपक्षियों का प्रजनन एवं शीतकालीन प्रवास स्थल | |
| 62 | कारिकिली पक्षी अभयारण्य | प्रजनन करने वाले जलपक्षी | |
| 63 | पिचावरम मैंग्रोव | भारत के सबसे बड़े मैंग्रोव वनों में से एक; मछलियों की नर्सरी | |
| 64 | पल्लिकरणई दलदलीय आरक्षित वन | शहरी दलदल; बाढ़ बफर और पक्षी | |
| 65 | मन्नार की खाड़ी समुद्री जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र | प्रवाल भित्तियाँ एवं डुगोंग | |
| 66 | वेंबन्नूर आर्द्रभूमि परिसर | मानव निर्मित सिंचाई तालाब; जलपक्षी | |
| 67 | वेलोडे पक्षी अभयारण्य | जलपक्षी | |
| 68 | उधयमार्थंदपुरम पक्षी अभयारण्य | प्रवासी जलपक्षी | |
| 69 | वेदांथंगल पक्षी अभयारण्य | भारत के सबसे पुराने पक्षी संरक्षित क्षेत्रों में से एक; बगुलों का प्रजनन स्थल | |
| 70 | सुचिंद्रम थेरूर आर्द्रभूमि परिसर | सिंचाई तालाब; प्रवासी पक्षी | |
| 71 | वडुवुर पक्षी अभयारण्य | शीतकालीन जलपक्षी | |
| 72 | कंजीरनकुलम पक्षी अभयारण्य | घोंसले बनाने वाले बगुले एवं चित्रित सारस | |
| 73 | करैवेट्टी पक्षी अभयारण्य | विशाल अंतर्देशीय मीठे पानी की झील; घोंसले बनाने वाले जलपक्षी | |
| 74 | लॉन्गवुड शोला आरक्षित वन | नीलगिरि के शोला वन; स्थानिक पक्षी | |
| 75 | कझुवेली पक्षी अभयारण्य | खारे पानी की तटीय झील; प्रवासी पक्षी | |
| 76 | नंजयरायन पक्षी अभयारण्य | झील; स्थानीय एवं प्रवासी पक्षी | |
| 77 | सक्करकोट्टई पक्षी अभयारण्य | प्रवासी जलपक्षी | |
| 78 | थेरथंगल पक्षी अभयारण्य | घोंसले बनाने वाले जलपक्षी | |
| 79 | त्रिपुरा | रुद्रसागर झील | जलाशयी झील; मछलियाँ एवं थ्री सट्राइप्ड रूफ टर्टल |
| 80 | उत्तर प्रदेश | ऊपरी गंगा नदी (बृजघाट से नरौरा) | गंगा नदी की डॉल्फ़िन, घड़ियाल एवं कछुए |
| 81 | नवाबगंज पक्षी अभ्यारण्य | प्रवासी जलपक्षी | |
| 82 | सरसई नवार झील | सारस का आवास | |
| 83 | सांडी पक्षी अभ्यारण्य | मीठे पानी का दलदली क्षेत्र; जलपक्षी एवं सारस | |
| 84 | समसपुर पक्षी अभयारण्य | जलपक्षी | |
| 85 | पार्वती अर्गा पक्षी अभयारण्य | जुड़वाँ विसर्प झीलें; जलपक्षी एवं गिद्ध | |
| 86 | समन पक्षी अभयारण्य | विसर्प झील; शीतकालीन जलपक्षी | |
| 87 | सुर सरोवर | आगरा के निकट मानव निर्मित जलाशय; जलपक्षी | |
| 88 | हैदरपुर आर्द्रभूमि | गंगा की बाढ़भूमि; घड़ियाल, दलदली हिरण एवं जलपक्षी | |
| 89 | बखिरा वन्यजीव अभयारण्य | पूर्वी उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी प्राकृतिक बाढ़भूमि आर्द्रभूमि | |
| 90 | पटना पक्षी अभ्यारण्य | जलपक्षी | |
| 91 | शेखा झील पक्षी अभ्यारण्य | शीतकाल में आने वाले बार-हेडेड गूज एवं चित्रित सारस | |
| 92 | जय प्रकाश नारायण पक्षी अभ्यारण्य (सुरहा ताल) | समृद्ध पक्षी विविधता; प्रवासी एवं स्थानीय पक्षी | |
| 93 | सौज झील | उथली, बारहमासी बाढ़भूमि आर्द्रभूमि; प्रवासी एवं स्थानीय जलपक्षी | |
| 94 | उत्तराखंड | आसन संरक्षण रिज़र्व | आसन यमुना संगम; प्रवासी जलपक्षी |
| 95 | पश्चिम बंगाल
| पूर्वी कोलकाता आर्द्रभूमियाँ | अपशिष्ट जल पर आधारित मत्स्य पालन एवं कृषि |
| 96 | सुंदरबन आर्द्रभूमि | मैंग्रोव वन; रॉयल बंगाल टाइगर | |
| 97 | जम्मू – कश्मीर (केंद्र शासित प्रदेश) | वुलर झील | मीठे पानी की विशाल झील; मत्स्य पालन |
| 78 | सुरिनसर मानसर झीलें | मीठे पानी की जुड़वाँ झीलें | |
| 99 | होकेरा आर्द्रभूमि | नरकुल के झुरमुट; सफेद आंखों वाला पोचार्ड | |
| 100 | हाइगम आर्द्रभूमि संरक्षण रिज़र्व | बाढ़ के जल को अवशोषित करने वाला बेसिन; जलपक्षी | |
| 101 | शालबुग आर्द्रभूमि संरक्षण रिज़र्व | जलपक्षी | |
| 102 | लद्दाख (केंद्र शासित प्रदेश) | त्सोमोरिरी | ऊंचाई वाली झील; काली गर्दन वाला क्रेन और बार-हेडेड गूज़ |
| 103 | त्सो कार आर्द्रभूमि परिसर | ऊंचाई वाली झीलें; काली गर्दन वाले क्रेन का प्रजनन |
अंतर्राष्ट्रीय महत्व के मानदंड (Criteria for Designation)किसी स्थल को रामसर स्थल घोषित करने के लिए निर्धारित 9 कड़े मानदंडों में से कम से कम एक को पूरा करना अनिवार्य होता है:





