Can dogs read human facial expressions: इंसान गुस्से में है या खुश है, चेहरा देखकर पढ़ सकते हैं डॉग्स

Rajesh Pandey
न्यूजलाइव  डेस्क
Can dogs read human facial expressions:कुत्तों को इंसानों का सबसे अच्छा और वफादार दोस्त माना जाता है। अक्सर डॉग लवर्स यह महसूस करते हैं कि जब वे उदास, गुस्से में या खुश होते हैं, तो उनका पालतू कुत्ता इसे तुरंत भांप लेता है। अब तक वैज्ञानिक मानते थे कि कुत्ते इंसान की शारीरिक भाषा (Body Language), आवाज के लहजे या गंध (Smell) से इन बातों को पकड़ते हैं। लेकिन, हाल ही में जर्नल iScience में प्रकाशित एक नए न्यूरोइमेजिंग शोध ने यह साबित कर दिया है कि कुत्ते बिना किसी आवाज, गंध या बॉडी लैंग्वेज के—सिर्फ इंसान का चेहरा देखकर ही अलग-अलग नकारात्मक भावनाओं (जैसे उदासी, गुस्सा और डर) के बीच अंतर पहचान सकते हैं।

शोध कैसे किया गया? (Brain Scan Study)

Can dogs read human facial expressions: यह अध्ययन ऑस्ट्रिया की यूनिवर्सिटी ऑफ विएना (University of Vienna) के न्यूरोसाइंस शोधकर्ताओं (डॉ. लॉरा कुआया और डॉ. राउल हर्नांडेज़-पेरेज़) के नेतृत्व में किया गया:
  • प्रशिक्षित कुत्ते: शोधकर्ताओं ने 14 पारिवारिक कुत्तों (जिनमें बॉर्डर कोली और गोल्डन रिट्रीवर शामिल थे) को बिना हिले-डुले fMRI (Magnetic Resonance Imaging) मशीन के अंदर लेटने के लिए विशेष ट्रेनिंग दी।
  • चेहरे के भाव दिखाना: स्कैनर के अंदर इन कुत्तों को अनजान इंसानों के चेहरे की अलग-अलग तस्वीरें दिखाई गईं—जैसे खुश, न्यूट्रल (सामान्य), उदास, गुस्से वाले और डरे हुए चेहरे।
  • मस्तिष्क की प्रतिक्रिया: तस्वीरें देखते समय वैज्ञानिकों ने कुत्तों के मस्तिष्क के सक्रिय क्षेत्रों और न्यूरल पैटर्न्स को ट्रैक किया।

मुख्य निष्कर्ष: कुत्तों का दिमाग चेहरों को कैसे समझता है?

भावना (चेहरे के भाव)कुत्ते के दिमाग में क्या देखा गया?
खुश चेहरा (Happy Face)मस्तिष्क के ‘रिवॉर्ड सेंटर’ (Reward Region) में तेज गतिविधि देखी गई, जो सामान्य (न्यूट्रल) चेहरों की तुलना में काफी अधिक थी।
नकारात्मक भावनाएं (Sad vs Angry vs Fearful)पहली बार यह प्रमाण मिला कि कुत्तों का दिमाग गुस्से या उदासी वाले चेहरे और डरे हुए चेहरे को देखने पर अलग-अलग ब्रेन एक्टिविटी पैटर्न बनाता है।

इस खोज का महत्व क्या है?

  1. सकारात्मक और नकारात्मक से आगे की समझ: पहले के अध्ययनों से यह तो पता था कि कुत्ते ‘अच्छे’ और ‘बुरे’ भाव में फर्क कर लेते हैं। लेकिन यह पहला अध्ययन है जो दिखाता है कि वे दो अलग-अलग नकारात्मक भावों (उदासी बनाम डर) के अंतर को भी प्रोसेस कर सकते हैं।
  2. मानव-श्वान संबंध का विकास (Evolutionary Bond): हजारों सालों से इंसानों के साथ रहते हुए कुत्तों के दिमाग ने इंसानी चेहरे के सूक्ष्म हाव-भाव को डिकोड करने की असाधारण क्षमता विकसित कर ली है।
  3. अजनबियों के चेहरे को भी पहचानना: परीक्षण में अनजान इंसानों की तस्वीरें इस्तेमाल की गई थीं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह क्षमता केवल अपने मालिक तक सीमित नहीं है, बल्कि इंसानी चेहरों के प्रति एक सामान्य संज्ञानात्मक कौशल (Cognitive skill) है।

संदर्भ (References)

  1. मूल शोध पत्र: Raúl Hernández-Pérez, Laura V. Cuaya, et al. (2026). Dog brain representations of human facial expressions: Encoding happiness and differentiating specific negative expressions. iScience (Cell Press). doi:10.1016/j.isci.2026.116900
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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