सितंबर के प्रथम सप्ताह के बाद नई व्यवस्था से शुरू होगा संचालन
62 मरीजों को पहले की तरह मिलेगी बेहतर और गुणवत्तापूर्ण डायलिसिस सुविधा
आयुष्मान कार्ड से पात्र मरीजों को निःशुल्क मिलती रहेगी डायलिसिस सेवा
मशीनों के रखरखाव से लेकर मेडिकल और नर्सिंग स्टाफ की व्यवस्था भी फाउंडेशन करेगा
Shrinagar Base Hospital Hans Foundation Dialysis MOU: श्रीनगर, गढ़वाल, 13 अगस्त, 2026ः राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के बेस चिकित्सालय की डायलिसिस यूनिट का संचालन हंस फाउंडेशन के अधीन रहेगा। इस संबंध में अस्पताल प्रशासन और हंस फाउंडेशन के बीच समझौता (एमओयू) हुआ है।
Shrinagar Base Hospital Hans Foundation Dialysis MOU: सितम्बर के प्रथम सप्ताह में बाद हंस फाउंडेशन डायलिसिस यूनिट का पूर्ण रूप से संचालन अपने अधीन शुरू कर देगा। यह एमओयू तीन वर्ष के लिए किया गया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद डायलिसिस मरीजों को पूर्व की भांति व्यवस्थित, गुणवत्तापूर्ण और बेहतर सुविधाएं मिलती रहेंगी।
Shrinagar Base Hospital Hans Foundation Dialysis MOU:बेस चिकित्सालय की डायलिसिस यूनिट में वर्तमान में कुल 10 बेड हैं। यहां विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले करीब 62 मरीज नियमित रूप से डायलिसिस कराते हैं। यूनिट में एक माह में लगभग 513 से अधिक डायलिसिस किए जाते हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में मरीजों को मिलने वाली इस महत्वपूर्ण चिकित्सा सुविधा के संचालन की जिम्मेदारी हंस फाउंडेशन को दी गई है।
एमओयू से पहले हंस फाउंडेशन की दो सदस्यीय टीम में शामिल वरिष्ठ परियोजना प्रबंधक अमर सिंह और सहायक कार्यक्रम प्रबंधक वरुना सिंह ने राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सीएमएस रावत और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एएन पांडेय के साथ डायलिसिस यूनिट का निरीक्षण किया।
नई व्यवस्था के तहत डायलिसिस यूनिट के संचालन के साथ-साथ डायलिसिस मशीनों के नियमित रखरखाव, कन्जयूमेबल, तकनीकी जांच और समय-समय पर फिटनेस परीक्षण की जिम्मेदारी के साथ-साथ मानव शक्ति भी हंस फाउंडेशन निभाएगा।
यूनिट में नेफ्रोलाजिस्ट, मेडिकल आफिसर, डायलिसिस टेक्नीशियन, नर्सिंग स्टाफ, वार्ड असिस्टेंट, हाउस कीपिंग स्टाफ, एडमिनिस्ट्रेटर की तैनाती फाउंडेशन करेगा। इससे मशीनों की कार्यक्षमता बनाए रखने के साथ मरीजों को निर्बाध डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
डायलिसिस यूनिट के हंस फाउंडेशन के अधीन जाने के बाद मरीजों को मिलने वाली सुविधा के शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। आयुष्मान कार्ड के माध्यम से पात्र मरीजों को डायलिसिस की निःशुल्क सुविधा मिलती रहेगी। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीजों को नियमित व बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य है।
बेस अस्पताल की डायलिसिस यूनिट को हंस फाउंडेशन के अधीन संचालित करने की कवायद पूर्व चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के कार्यकाल में शुरू हुई थी। इस दिशा में लगातार प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। वर्तमान में चिकित्सा शिक्षा एवं चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के कार्यकाल में यह प्रक्रिया एमओयू तक पहुंची और अब जल्द ही यूनिट का संचालन हंस फाउंडेशन द्वारा अपने अधीन शुरू किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान डायलिसिस यूनिट के नर्सिंग इंचार्ज मोहर सिंह, नर्सिंग अधिकारी जितेंद्र सिंह, रेनूका, नीलम, नैन्सी, अनिता, नरेश भट्ट सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने भी किया सहयोग
डायलिसिस यूनिट को हंस फाउंडेशन के अधीन दिए जाने की प्रक्रिया में चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना की ओर से भी विभिन्न पहलुओं पर कार्य किया गया। विभागीय स्तर पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी किए जाने के बाद अब अस्पताल प्रशासन और हंस फाउंडेशन के बीच समझौता हुआ है।
“वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय आयुर्विज्ञान शोध संस्थान के अधीन बेस चिकित्सालय की डायलिसिस यूनिट को हंस फाउंडेशन के अधीन संचालन किए जाने के संबंध में एमओयू हो गया है। हंस फाउंडेशन के साथ तीन साल का एमओयू किया गया है। मरीजों को पूर्व की भाति ही नियमित व बेहतर डायलिसिस सुविधा उपलब्ध हो, इसी उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। डायलिसिस यूनिट हंस फाउंडेशन के अधीन होने से मरीजों के शुल्क में कोई फर्क नहीं पड़ेगा और आयुष्मान कार्ड के माध्यम से डायलिसिस की सुविधा निशुल्क उपलब्ध रहेगी। मरीजों को बेहतर सुविधा देना अस्पताल प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता में है।” –डॉ सीएमएस रावत, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर।
बेस अस्पताल श्रीनगर की डायलिसिस यूनिट का संचालन हंस फाउंडेशन को सौंपना मरीजों के हित में बड़ा कदम है। इससे पहाड़ के मरीजों को बेहतर डायलिसिस सुविधा स्थानीय स्तर पर मिल सकेगी। सरकार का लक्ष्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत करना है। हंस फाउंडेशन के सहयोग से यूनिट की सेवाओं में और सुधार होगा। गढ़वाल के मरीजों को उपचार के लिए दूर-दराज नहीं जाना पड़ेगा। सरकार गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। – सुबोध उनियाल, चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री उत्तराखंड



