Monsoon Vegetable Storage Tips: बरसात के मौसम में फलों और सब्जियों को सड़ने से कैसे बचाएं? कृषि विज्ञान केंद्र, देहरादून ने जारी की एडवायजरी

Rajesh Pandey

Monsoon Vegetable Storage Tips: देहरादून, 07 जुलाई, 2026ः बरसात का मौसम अपने साथ हरियाली और ताजगी लेकर आता है, लेकिन इस मौसम में फल एवं सब्जियां जल्दी खराब होने की समस्या भी काफी बढ़ जाती है। अधिक नमी, तापमान में उतार-चढ़ाव और सूक्ष्मजीवों की सक्रियता के कारण इस मौसम में खाद्य पदार्थों का सुरक्षित रख-रखाव एक बड़ी चुनौती बन जाता है।

विशेषकर पालक, मेथी, धनिया और सरसों जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां पानी की अधिक मात्रा होने के कारण जल्दी पीली पड़ने लगती हैं और उन पर फफूंदी (फंगस) का प्रकोप बढ़ जाता है। इस समस्या को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), देहरादून के विशेषज्ञों ने कुछ बेहतरीन और व्यावहारिक तकनीकें साझा की हैं, जिन्हें अपनाकर मौसमी फलों और सब्जियों को लंबे समय तक ताजा और सुरक्षित रखा जा सकता है।

भंडारण से पहले बरतें ये सावधानियां (स्वच्छता नियम)

Monsoon Vegetable Storage Tips: विशेषज्ञों के अनुसार, फल और सब्जियां खरीदते समय हमेशा उनकी गुणवत्ता पर ध्यान दें। हमेशा ताजे, बिना कटे-फटे और बेदाग उत्पाद ही चुनें। घर लाने के बाद इन्हें साफ पानी से अच्छी तरह धो लें ताकि सतह पर मौजूद गंदगी और जीवाणु हट सकें, लेकिन भंडारण (स्टोरेज) से पहले इन्हें पूरी तरह सुखाना बेहद आवश्यक है।

फल-सब्जियों को सुरक्षित रखने की 4 मुख्य तकनीकें

1. ठंडा भंडारण (रेफ्रिजरेशन): सेब, नाशपाती, प्लम और अंगूर जैसे फलों को फ्रिज में रखने से उनकी शेल्फ लाइफ काफी बढ़ जाती है।

2. सुखाकर रखना (डिहाइड्रेशन): कद्दू, सेम, मेथी और पुदीना जैसी सब्जियों को काटकर धूप में सुखाया जा सकता है। उत्तराखंड के जौनसार-बावर और गढ़वाल क्षेत्रों में पारंपरिक रूप से सूखी सब्जी बनाने की यह परंपरा आज भी काफी लोकप्रिय है।

3. अचार एवं मुरब्बा बनाना: कच्चे आम, नींबू, हरी मिर्च और करेले का अचार डालकर तथा खुमानी, सेब और आम का मुरब्बा बनाकर इन्हें महीनों तक खराब होने से बचाया जा सकता है।

4. फ्रीजिंग तकनीक: मटर और बीन्स जैसी सब्जियों को ‘ब्लांचिंग’ (हल्का उबालने) के बाद फ्रीजर में स्टोर किया जा सकता है, जिससे उनका पोषण तत्व सुरक्षित रहता है।

Monsoon Vegetable Storage Tips: अलग-अलग सब्जियों के लिए खास स्टोरेज टिप्स

जड़ वाली सब्जियां (आलू, प्याज, लहसुन): आलू और प्याज को कभी भी एक साथ न रखें, क्योंकि आलू की नमी से प्याज जल्दी सड़ सकता है। इन्हें फ्रिज में रखने के बजाय घर के किसी सूखे, ठंडे और हवादार स्थान पर प्लास्टिक की थैलियों के बजाय खुली या बांस की जालीदार टोकरियों में रखें।

हरी पत्तेदार सब्जियां: बरसात में इन्हें धोकर सीधे स्टोर न करें। पहले इन्हें अच्छी तरह सुखा लें, फिर एक एयरटाइट डिब्बे में नीचे टिश्यू पेपर बिछाकर रखें। टिश्यू पेपर अतिरिक्त नमी सोख लेता है और पत्तियां हरी बनी रहती हैं।

भिंडी और टमाटर: भिंडी नमी के संपर्क में आते ही चिपचिपी हो जाती है, इसलिए इसे धोकर फ्रिज में न रखें; बल्कि पेपर बैग या सूती कपड़े में लपेटकर रखें। टमाटर पर नमी के कारण काले धब्बे पड़ सकते हैं, इसलिए केवल पूरी तरह पके टमाटर ही फ्रिज में रखें और कच्चे टमाटरों को कमरे के तापमान पर ही पकने दें।

खीरा और ककड़ी: इनमें पानी की मात्रा अधिक होती है जिससे ये जल्दी गलने लगते हैं। इन्हें सूखे कपड़े से पोंछकर फ्रिज के निचले हिस्से (क्रिस्पर ड्रॉअर) में रखना चाहिए।

फूलगोभी, पत्तागोभी और मशरूम: गोभी की परतों के बीच नमी जमा होने से फफूंदी लग सकती है, इसलिए इन्हें बिना धोए छेद वाले बैग (वेंटिलेटेड बैग) में रखें। मशरूम को प्लास्टिक कंटेनर के बजाय पेपर बैग में रखना बेहतर होता है।

स्मार्ट स्टोरेज कंटेनर का उपयोग है फायदेमंद

आजकल बाजार में नमी और वेंटिलेशन नियंत्रण प्रणाली वाले आधुनिक ‘स्मार्ट स्टोरेज कंटेनर’ उपलब्ध हैं। ये कंटेनर फल-सब्जियों से निकलने वाली एथिलिन गैस और आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) के स्तर को संतुलित रखते हैं। ऐसे डिब्बों का उपयोग करने से न केवल भोजन की बर्बादी (वेस्टेज) रुकती है, बल्कि उनकी ताजगी भी बरकरार रहती है।

विशेषज्ञों की सलाह: कृषि विज्ञान केंद्र, देहरादून के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान और गृहणियां इन छोटी-छोटी लेकिन महत्वपूर्ण वैज्ञानिक तकनीकों को दैनिक जीवन में अपनाएं, तो खाद्य पदार्थों की बर्बादी को न्यूनतम किया जा सकता है, जिससे घरेलू बजट में सुधार होगा और किसानों की आय में भी वृद्धि संभव है।

विशेषज्ञों की सलाह

फल या सब्जी का नामस्टोरेज का प्रकार (जैसे फ्रिज, हवादार जगह)विशेष संरक्षण तकनीक (जैसे सुखाना, अचार)तैयारी का तरीका (जैसे धोना, सुखाना, ब्लांचिंग)पैकेजिंग का माध्यम (जैसे पेपर बैग, एयरटाइट डिब्बा)शेल्फ लाइफ बढ़ाने के टिप्ससावधानी और चेतावनी
हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, मेथी, धनिया)फ्रिज (एयरटाइट डिब्बा)सुखाना (डिहाइड्रेशन)धोना और अच्छी तरह सुखानाटिश्यू पेपर के साथ एयरटाइट डिब्बाडिब्बे के नीचे टिश्यू पेपर बिछाएं ताकि अतिरिक्त नमी सोख ली जाएबरसात में इन्हें धोकर सीधे स्टोर न करें, वरना फफूंदी लग सकती है
भिंडीफ्रिजलागू नहींधोना और पोंछनापेपर बैग या सूती कपड़ानमी से बचाने के लिए सूती कपड़े में लपेटकर रखेंभिंडी नमी के संपर्क में आते ही चिपचिपी हो जाती है
मटर और बीन्सफ्रीजरफ्रीजिंग तकनीकब्लांचिंग (हल्का उबालना)एयरटाइट डिब्बा या फ्रीजर बैगब्लांचिंग से पोषण तत्व सुरक्षित रहते हैं
फूलगोभी और पत्तागोभीफ्रिजलागू नहींबिना धोए स्टोर करेंछेद वाले बैग (वेंटिलेटेड बैग)वेंटिलेशन के लिए छेद वाले बैग का उपयोग करेंपरतों के बीच नमी जमा होने से फफूंदी लग सकती है
मशरूमफ्रिजलागू नहींपेपर बैगप्लास्टिक कंटेनर के बजाय पेपर बैग का उपयोग करेंप्लास्टिक में रखने से जल्दी खराब हो सकते हैं
टमाटरफ्रिज (पके हुए) / कमरे का तापमान (कच्चे)लागू नहींसफाईकच्चे टमाटरों को कमरे के तापमान पर पकने देंनमी के कारण काले धब्बे पड़ सकते हैं
आलू और प्याजसूखा, ठंडा और हवादार स्थानलागू नहींसफाईखुली या बांस की जालीदार टोकरियांप्लास्टिक की थैलियों के बजाय जालीदार टोकरियों का उपयोग करेंआलू और प्याज को एक साथ न रखें; आलू की नमी से प्याज सड़ सकता है
आम, नींबू, मिर्च, करेलाकमरे का तापमान / ठंडी जगहअचार एवं मुरब्बा बनानाकाटना और सामग्री मिलानाकांच के जार/डिब्बेमहीनों तक सुरक्षित रखने के लिए मुरब्बा या अचार बनाएं
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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