New Director IISWC Dehradun: देहरादून, 07 मई, 2026ः भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (ICAR-IISWC) के नवनियुक्त निदेशक डॉ. भगवती प्रसाद भट्ट ने कार्यभार संभाल लिया है। गुरुवार को कौलागढ़ स्थित संस्थान परिसर में पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं साझा कीं। उनका कहना है, संस्थान में चल रहे नवीन शोध और अध्ययनों का सीधा लाभ प्रदेश के किसानों, बागवानों और आम जनमानस तक पहुंचाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार और जल संपदा का संरक्षण कर प्रदेशवासियों को आर्थिक रूप से संपन्न बनाने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य किया जाएगा।
New Director IISWC Dehradun: निदेशक डॉ. भट्ट ने वर्तमान चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन ने जीवन और आजीविका के सामने कई गंभीर संकट खड़े कर दिए हैं। उत्तराखंड के संदर्भ में उन्होंने बताया, बारिश के पैटर्न और समयावधि में जबरदस्त बदलाव आया है। अब कम समय में अत्यधिक वर्षा (Cloudburst जैसी स्थितियां) हो रही है, जबकि रिमझिम बारिश का दौर कम हुआ है। मूसलाधार बारिश के कारण मिट्टी का कटाव और पानी का बहाव बढ़ा है, जिससे भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। खेती और बागवानी की मिट्टी की उर्वरकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, जिसे सुधारने के लिए संस्थान राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करेगा।
New Director IISWC Dehradun: संस्थान के लक्ष्यों को साझा करते हुए डॉ. भट्ट ने कहा कि हमारा उद्देश्य टिकाऊ विकास (Sustainable Development) सुनिश्चित करना है। तकनीक और नवीन शोध के माध्यम से किसानों के उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाकर उनकी आय में इजाफा किया जाएगा। खराब हो चुकी भूमि को फिर से उत्पादक और लाभकारी बनाने पर काम चल रहा है। पलायन रोकने और ‘रिवर्स माइग्रेशन’ को बढ़ावा देने के लिए संस्थान उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है जहाँ खेती बंद हो गई है और ‘लैंड यूज’ बदलने से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। वहीं, इस गंभीर समस्या को रोकने के लिए भी संस्थान प्रदेश सरकार के साथ समन्वय कर प्रभावी कदम उठा रहा है।
इस अवसर पर संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिकों डॉ. चरण सिंह, डॉ. डी.वी. सिंह, डॉ. जगमोहन सिंह तोमर, डॉ. बांके बिहारी, डॉ. उदय मंडल और इंजीनियर अमित चौहान ने भी अपने विभागों की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की विस्तृत जानकारी साझा की।




