बालिका ने कहा, इंगलिश मीडियम स्कूल से बारहवीं करनी है और एनडीए में जाना चाहती हूं
Hardworking student gets scholarship: देहरादून, 2 मई, 2026ः “सर मैं स्कूल पैदल आऊंगी जाऊंगी, स्कूल के बाद किसी दुकान में काम करुंगी और रात को पढ़ाई करुंगी। पर, आप मुझे स्कूल में एडमिशन दे दो, मुझे इंगलिश मीडियम स्कूल से बारहवीं करनी है और एनडीए में जाना चाहती हूं।”
हाईस्कूल में बिहार बोर्ड से 80 फीसदी मार्क्स लाने वाली यह मेधावी बिटिया हर्रावाला क्षेत्र स्थित अपने घर से लगभग पांच किमी. पैदल चलकर सीबीएसई संबद्ध अंग्रेजी माध्यम स्कूल में अकेली पहुंची। सोशल मीडिया पर स्कूल के निदेशक इस बालिका के बारे में जिक्र करते हैं। इस बालिका के आग्रह पर प्रिंसिपल ने उनसे संपर्क किया और बताया कि बालिका को संसाधनों की कमी की वजह से स्कॉलरशिप की आवश्यकता है। बालिका का मैथ साइंस का रिटन टेस्ट लिया गया तो उसने अच्छे मार्क्स स्कोर किए हैं।
Hardworking student gets scholarship: स्कूल निदेशक लिखते हैं, हमारे हाईस्कूल के 38 बच्चों ने 90+स्कोर किया है। 49 बच्चों ने 80+स्कोर किया है, अपने स्कूल के बच्चों को पीसीएम देना संभव नहीं है। इस बालिका की काबिलियत को देखते हुए उसे गाइड करने के लिए उससे बात की।
जिक्र करते हैं, “पिछले 15-20 साल में इतनी छोटी उम्र के जुझारू, स्पष्ट व दृढ़निश्चय वाले बच्चे से नहीं मिला था। इसकी मां उसके नाना के घर पर रहकर तीन बच्चों को अकेले पालती है, प्राइवेट कम्पनी में दस हजार रुपये की नौकरी करती है। उसमें कुछ भी बनावटीपन नहीं था। वह चार पांच प्राइवेट स्कूल में पहले ही जा चुकी थी, जहां से निराशा हाथ लगी।”
Hardworking student gets scholarship: “वह इंग्लिश मीडियम से 12वीं करने और एनडीए की तैयारी करने के लिए दृढ़संकल्प थी। स्कूल में आरटीई के 46 बच्चों के अतिरिक्त 26 बच्चे फ्री स्कॉलरशिप में पढ़ते हैं। इन बच्चों में अकाल मृत्यु को प्राप्त अभिभावकों के बच्चे, गंभीर रोग से ग्रसित अभिभावकों के बच्चे, टीचर्स व नॉन टीचिंग स्टाफ के बच्चे शामिल हैं।”
उन्होंने उस बालिका से कहा, “बेटी हम अगर तुम्हारी कुछ फीस माफ भी करें, तब भी तुम बस व ट्यूशन फीस की व्यवस्था कैसे कर पाओगी।”
उसका जवाब था, “सर मैं पैदल आऊंगी- जाऊंगी, स्कूल के बाद किसी दुकान में काम करुंगी और रात को पढ़ाई करुंगी।”
उसकी इस बात ने स्कूल निदेशक को झकझोर दिया। कहते हैं, “स्कूल की भी अपनी सीमाएं हैं। उसके जीवन के संघर्ष ने हमें सोचने को विवश कर दिया कि हमारे यहां आर्थिक परेशानी के कारण फ्री स्कॉलरशिप में पढ़ने वाले कई बच्चे बाहर बुलेट पर घूमते हैं। पढ़ने में मेहनती नहीं हैं। अनुशासन का उल्लंघन करते हैं। फ्री स्कॉलरशिप को अपना अधिकार समझते हैं।”
बताते हैं, “इस बच्ची को हमने स्कूल की तरफ से बुक्स कॉपी, यूनिफॉर्म फ्री में दिलवाए। स्कूल बस की ट्रांसपोर्ट फ्री कर दी। मंथली फीस में भी कुछ छूट दी गई है। हम सब फ्री कर सकते थे, लेकिनइससे इस बच्ची का driving force इसके जीवन का संघर्ष खत्म हो जाता। इसके जीवन के संघर्ष को बनाए रखने के लिए स्कूल की तरफ आने जाने के लिए साइकिल भी देने वाले हैं।”
“हमने अब यह भी तय किया है कि स्कूल से स्कॉलरशिप प्राप्त करने वाला स्टूडेंट अगर 70% से कम अंक लाता है तो उसकी स्कॉलरशिप समाप्त कर दी जाएगी। ताकि स्कूल के संसाधन का सदुपयोग हो और वास्तविक पात्रता रखने वाले को यह सुविधा प्राप्त हो।”




