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अपने तौलिया के बारे में जान लीजिये ये बातें

आप रोजाना टीवी या न्यूजपेपर में नहाने के साबुनों के विज्ञापन देखते हैं। हर कोई अपनी खासियत बताने के लिए विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये बहा रहा है। क्या आपको मालूम है कि साबुन कोई सा हो, शरीर से कीटाणुओं और बैक्टीरिया को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकता। नहाने के बाद शरीर को पोंछने के लिए इस्तेमाल टॉवेल पर ये कीटाणु चिपक जाते हैं।

अगर घर में एक ही टॉवेल कई लोग इस्तेमाल कर रहे हैं तो तय मानिये एक दूसरे के शरीर के कीटाणु और बैक्टीरिया टॉवेल के जरिये ट्रांसफर हो जाते हैं। एक व्यक्ति -एक टॉवेल का नियम फॉलो नहीं किए जाने की वजह से एक्जिमा, फंगल इन्फेक्शन और त्वचा संबंधी रोग होने की आशंका रहती है। एक बात और ध्यान देने की है कि गीले टॉवेल से त्वचा पर संक्रमण का खतरा ज्यादा बढ़ सकता है। गीले टॉवेल को दोबारा यूज करने से पहले धूप में सुखाया जाए, नहीं तो खुजली की समस्या हो सकती है। जरूर पढ़ें-  घुटने के दर्द के कारण और निवारण

हम आपको बताते हैं कि टॉवेल के इस्तेमाल में क्या सावधानियां बरती जानी चाहिए। तौलिया को रोजाना या एक दिन छोड़कर धो लिया जाए तो बेहतर होगा। तौलिया को दोबारा इस्तेमाल करने से पहले धूप में अच्छी तरह सुखा लेना चाहिए, क्योंकि धूप में सुखाने से बैक्टीरिया और कीटाणु या तो मर जाते हैं या निष्क्रिय हो जाते हैं, जिससे रोग का संकट कम हो सकता है। इस बात पर खासतौर पर ध्यान दीजिए कि आपकी नहाने के बाद शरीर पोंछने, टॉयलेट के बाद हाथ पोंछने, मुंह पोंछने की तौलिया अलग-अलग हों तो ज्यादा बेहतर होगा। टॉवेल को कभी भी नमी वाली जगह पर सूखने के लिए न डालें। नमी में बैक्टीरिया पनपने की ज्यादा आशंका होती है।  जरूर पढ़ें- लिवर के लिए खतरनाक हो सकता है रात में काम

नहाने के बाद टॉवेल से शरीर को हमेशा चेहरे से पैरों की ओर पोंछे, ताकि बैक्टीरिया चेहरे और मुंह के संपर्क में कम से कम आएं। तौलिया को कभी भी अंडरगारमेंट्स के साथ न धोया जाए। छोटे बच्चों की तौलिया अलग ही रखें तथा इसको एंटी जर्म लिक्विड मिलाकर धोएं तो ज्यादा बेहतर होगा। जरूर पढ़ें- वजन घटाना है तो यह बात जानिए

Rajesh Pandey

newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344

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