देहरादून, 13 सितंबर, 2026: एम्पावर सोसाइटी (Empower Society) ने देहरादून जिले के कालसी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले व्यास नहरी गांव और कालसी में सर्वांगीण विकास, क्षमता निर्माण और आजीविका संवर्द्धन को लेकर महिलाओं एवं बालिकाओं के साथ विस्तृत कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में संस्था की प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर तूलिका गर्ग ने क्षमता विकास और निर्णय लेने की शक्ति से जुड़ी गतिविधियों पर विस्तार से संवाद किया। इस दौरान महिलाओं से उनके उन सपनों के बारे में जाना गया, जो उनकी प्राथमिकता में हैं। साथ ही, आजीविका संबंधी गतिविधियों और कौशल विकास पर भी चर्चा की गई। यह कार्यशाला पारंपरिक बैठकों से हटकर महिलाओं की क्षमताओं और उनकी स्वतंत्र पहचान पर संवाद का एक प्रमुख केंद्र रही।
प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर तूलिका गर्ग ने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को पारंपरिक घरेलू सीमाओं तक सीमित न रखकर उनको अपनी स्वतंत्र और सशक्त पहचान का अहसास कराना था। चर्चा के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि महिलाओं की सबसे बड़ी ताकत उनकी अपनी क्षमताएं और उनका अनूठा व्यक्तित्व है। महिलाएं अपने परिवार की नींव की तरह होती हैं। सत्र के दौरान यह बात प्रमुखता से सामने आई कि महिलाओं को अपने अधिकारों, विचारों और निर्णयों पर बात करनी चाहिए। यह रेखांकित किया गया कि एक परिवार और पूरे समाज की नींव को मजबूत करने में महिलाओं की भूमिका सर्वोपरि होती है।
कार्यशाला के दौरान, महिलाओं के सामने जीवन की विभिन्न वास्तविक और कठिन परिस्थितियों (जैसे—बच्चों की शिक्षा, घर की मरम्मत और आजीविका के साधन) को रखकर एक संवादात्मक सत्र चलाया गया। इसके माध्यम से प्रतिभागियों ने सीखा कि संकट के समय किस प्रकार ‘मध्यम मार्ग’ अपनाकर दीर्घकालिक और संतुलित निर्णय लिए जाएं। साथ ही, घरेलू जिम्मेदारियों के साथ-साथ आजीविका संबंधी चुनौतियों का सामना करने और आपसी सहयोग से समस्याओं का समाधान निकालने पर भी चर्चा हुई।

एम्पावर सोसाइटी की वैली कोऑर्डिनेटर सीमा ने कार्यशालाओं में महिलाओं से विभिन्न सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों के प्रति जागरूक रहने की अपील की। आर्थिक रूप से स्वतंत्र और आत्मनिर्भर होने के लिए महिलाओं को स्व-निर्भरता के विभिन्न तरीकों से अवगत कराया गया।
स्वयं सहायता समूहों (SHG) की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। महिलाओं को प्रेरित किया गया कि दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं लघु उद्योग शुरू करें। इस दौरान कालसी में महिलाओं के समूह ने बताया कि उनका समूह सिलाई केंद्र संचालित कर रहा है और सिलाई-कढ़ाई का कार्य भी करता है। इसके अलावा, समूह पापड़, अचार और साबुन बनाने जैसे पारंपरिक व आधुनिक लघु व्यवसाय भी संचालित करते हैं। महिलाओं ने उत्पादों की मार्केटिंग में आने वाली समस्याओं के बारे में भी बताया। कार्यशाला में महिलाओं को यह समझाया गया कि वे त्योहारों और विशेष अवसरों के अनुसार बाजार की मांग को समझकर अपनी साल भर की कार्ययोजना (Yearly Action Plan) कैसे तैयार करें, ताकि उनकी आमदनी लगातार बनी रहे।
व्यास नहरी गांव की कार्यशाला में ‘नशे की समस्या’ को समाज के लिए एक गंभीर चुनौती के रूप में चिन्हित किया गया। महिलाओं ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि नशा किस प्रकार परिवारों को आर्थिक और मानसिक रूप से खोखला कर रहा है, जिसका सीधा बुरा प्रभाव बच्चों पर पड़ रहा है। कार्यशाला में यह संकल्प लिया गया कि महिलाओं को एकजुट होकर नशे के खिलाफ आवाज उठानी होगी, नशा मुक्ति केंद्रों का सहयोग लेना होगा और पीड़ित परिवारों को इस कुसंगति से बचाना होगा।
कार्यशाला में महिलाओं ने कहा कि बच्चों को सही संस्कार देने और उन्हें समाज में एक जिम्मेदार नागरिक बनाने में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। बच्चों को शुरुआती उम्र से ही अच्छे-बुरे की समझ देने, उन्हें छोटे स्तर के निर्णयों में शामिल करने और नशे तथा बुरी संगत के दुष्प्रभावों से अवगत कराने पर विशेष बल दिया गया। इसके साथ ही, बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देने पर भी सहमति बनी।
कार्यशाला के अंत में महिलाओं ने अपने जीवन के नए सपनों, लक्ष्यों और अनुभवों को एक-दूसरे के साथ साझा किया। “सोच बदलो, जिंदगी बदलो” के संदेश के साथ संपन्न हुई इन कार्यशालाओं के माध्यम से एम्पावर सोसाइटी ने ग्रामीण स्तर पर महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी, सामाजिक रूप से जागरूक बनने की दिशा में एक सराहनीय पहल की है।
व्यास नहरी में आयोजित कार्यशाला में जैनब, साखिया, सलमा, हीना, तनीशा, सकिना, दिलशाना, साक्षी, पायल तोमर, फलक मलिक, शबनम, सारदा, शबाना, रेशमा, सीमा, कालसी की कार्यशाला में प्रियंका, वंशिका, अंजू, अनिता, रीना, सानिया, अमिशा, कविता, अंशिका, निशा, वीणा देवी, शर्मिला, अवन्तिका, आंचल वर्मा, विनीता, मनीषा, सपना, प्रीति तोमर, ममता, कविता, काजल, आरती, मनिता आदि उपस्थित रहे।



