Math learning disability brain research: स्टैनफोर्ड, कैलिफोर्निया, 07 मार्च 2026ः माता-पिता और शिक्षक इस उलझन में रहते हैं कि कुछ बच्चे गणित में स्वाभाविक रूप से अच्छे क्यों होते हैं, जबकि अन्य समान रूप से प्रयास के बाद भी पीछे रह जाते हैं। स्टैनफोर्ड मेडिसिन के एक नए शोध ने अब इस पहेली को सुलझा लिया है। अत्याधुनिक ब्रेन इमेजिंग (fMRI) का उपयोग करते हुए, वैज्ञानिकों ने पाया है कि गणित में कमजोरी का संबंध केवल बुद्धिमत्ता से नहीं, बल्कि मस्तिष्क की एक विशेष कार्यप्रणाली से है।
Math learning disability brain research: जर्नल ऑफ न्यूरोसाइंस में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, जिन बच्चों को गणित सीखने में कठिनाई (Math Learning Disability – MLD) होती है, उनका मस्तिष्क अपनी गलतियों को पहचानने और उन पर प्रतिक्रिया देने में अलग तरह से व्यवहार करता है।
Math learning disability brain research: शोध के मुख्य लेखक डॉ. विनोद मेनन और डॉ. ह्येसांग चांग ने पाया कि सामान्य बच्चों का मस्तिष्क गलती करने के बाद तुरंत “सावधान” हो जाता है और अगली बार ज्यादा सोच-समझकर उत्तर देता है। लेकिन जिन बच्चों को गणित में समस्या थी, उनके मस्तिष्क में यह “एरर-मॉनिटरिंग” सिग्नल (गलती पकड़ने वाला संकेत) सक्रिय नहीं हुआ।
ब्रेन स्कैन में दो मुख्य क्षेत्रों में अंतर स्पष्ट रूप से देखा गया:
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मिडल फ्रंटल गाइरस (Middle Frontal Gyrus): यह हिस्सा एकाग्रता और आवेग नियंत्रण (Impulse Control) के लिए जिम्मेदार है। गणित में कमजोर बच्चों में इस क्षेत्र की सक्रियता काफी कम पाई गई।
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एंटीरियर सिंगुलेट कॉर्टेक्स (ACC): इसे मस्तिष्क का “गलती पकड़ने वाला डिटेक्टर” कहा जाता है। यह हमें बताता है कि हमने कहीं चूक की है और अब हमें रुककर सोचने की जरूरत है। गणित में संघर्ष करने वाले बच्चों में यह हिस्सा शांत रहता है, जिससे वे अपनी गलतियों से नहीं सीख पाते।
इस शोध में एक चौंकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया कि ये बच्चे मात्रा (Quantity) को तो अच्छे से समझते हैं, लेकिन प्रतीकों (Symbols) में उलझ जाते हैं।
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बिंदुओं का खेल: जब बच्चों को डॉट्स (बिंदु) दिखाकर पूछा गया कि कौन सा समूह बड़ा है, तो सभी बच्चों ने समान प्रदर्शन किया।
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अंकों का खेल: जैसे ही स्क्रीन पर “4” या “9” जैसे अंक आए, गणित में कमजोर बच्चों के मस्तिष्क ने संघर्ष करना शुरू कर दिया।
इसका मतलब है कि चुनौती मात्रा को समझने में नहीं, बल्कि अमूर्त अंकों (Abstract Numbers) को उनके वास्तविक मूल्य के साथ जोड़ने में है।
सीखने और सिखाने के तरीके में बदलाव
यह खोज बताती है कि केवल अभ्यास बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। हमें बच्चों को “मेटाकॉग्निशन” (अपनी सोच के बारे में सोचना) सिखाना होगा।
| विशेषता | सामान्य बच्चे | गणित में कमजोर बच्चे |
| गलती पर प्रतिक्रिया | काम की गति धीमी कर देते हैं | उसी गति से चलते रहते हैं |
| प्रतीकों का प्रसंस्करण | मजबूत न्यूरल सक्रियता | फ्रंटल क्षेत्रों में कम सक्रियता |
| रणनीति बदलना | कठिनाई के अनुसार बदलाव | बदलाव करने में संघर्ष |
अच्छी खबर यह है कि मस्तिष्क लचीला (Neuroplastic) है। शोध बताते हैं कि सही प्रकार की ट्यूशन और विशेष अभ्यासों के जरिए मस्तिष्क के इन हिस्सों को “रीवायर” किया जा सकता है। समय के साथ, बच्चा अपनी गलतियों को पहचानना और अंकों को समझना सीख सकता है।













