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Uttarakhand: काली हल्दी की खेती फायदा देगी, पर ध्यान रखना इस बात का

Rajesh Pandey
Last updated: June 1, 2024 8:16 pm
Rajesh Pandey
2 years ago
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देहरादून के एक गांव में काली हल्दी दिखाते किसान: फोटो- सार्थक पांडेय
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डोईवाला। न्यूज लाइव

देहरादून के शेरगढ़ गांव में 73 साल के वरिष्ठ पत्रकार जीतमणि पैन्यूली दो साल से काली हल्दी की खेती (Kali Haldi Farming) कर रहे हैं। पिछली बार उन्होंने पांच बीघा में लगभग 70 कुंतल काली हल्दी का उत्पादन किया था। मार्केटिंग नहीं होने की वजह से पिछली बार उगाई काली हल्दी को बाजार नहीं मिल पाया। इस बार उन्होंने मात्र ढाई बीघा में ही काली हल्दी बोई। मेघालय के लाकोडोंग से बीज मंगाया था,जो शानदार गुणवत्ता का बताया जाता है।

जीतमणि पैन्यूली बताते हैं, “हमारी एक गलती रही, हम मार्केटिंग के बारे में ज्यादा खास जानकारी नहीं रख पाए। हम चाहते हैं कि, जो गलतियां हमने कीं, उनको दूसरे किसान न करें। इस बार हमने काली हल्दी का बीज बोने में भी कुछ गलतियां कीं, जिस वजह से उत्पादन कम मिला।”

“हमने सरकार को प्रस्ताव दिया था कि किसानों, उद्योगों और विभाग के बीच समन्वय बनाएं, ताकि उद्योग अपने उत्पादन के लिए जरूरी उत्पाद किसानों से उगवाएं, इससे किसानों की आय बढ़ेगी। पर, हमने उम्मीद नहीं खोई है, काली हल्दी वास्तव में राज्य के पर्वतीय इलाकों के किसानों की स्थिति में सुधारने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।”

वो बताते हैं, “यह आपको लागत का लगभग दोगुना उत्पादन देने वाली खेती है। एक बीघा में यदि 80 हजार से एक लाख रुपये तक की लागत आती है, तो आपको उत्पादन से लगभग दो से ढाई लाख रुपया मिलने की संभावना है। यदि मार्केट अच्छा मिल गया तो यह कापी फायदे का सौदा है।”

उनका कहना है, “उत्तराखंड के अफसर चाहें तो काली हल्दी राज्य से पलायन को काफी हद तक रोकने में कारगर हो सकती है। जरूरत है, उद्योगों और किसानों के बीच समन्वय एवं व्यापारिक संबंध बनाने की है। कफ सिरप सहित दवाइयों, मसालों में काली हल्दी गुणकारी एवं औषधीय महत्व की है।”

 

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ByRajesh Pandey
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

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