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बिजली उपभोक्ताओं को अधिकार बताएगी अोली की किताब

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देहरादून। बिजली उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक कराने के लिए युवा मनीष अोली की  “विद्युत उपभोक्ताओं की समस्याएं एवं समाधान” पुस्तक बाजार में उपलब्ध है। पुस्तक के लेखक मनीष ओली विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच के सदस्य हैं। ढाई सौ पेज की इस किताब की कीमत मात्र 30 रुपये है। शनिवार को देहरादून स्थित बीजापुर अतिथि गृह में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पुस्तक का विमाेचन करते हुए इसे जनजागरूकता का बेहतरीन प्रयास बताया।उन्होंने इसे उपभोक्ताओं के साथ ही बिजली विभाग के कर्मचारियों के लिए भी उपयोगी बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकतर विद्युत उपभोक्ताओं को नियमों की जानकारी नहीं है। ऐसे में यदि एक पुस्तक में उपभोक्ता से संबंधित समस्त जानकारियां एक साथ उपलब्ध हों तो वह काफी फायदेमंद है। पुस्तक के लेखक मनीष ओली ने कहा कि पुस्तक आम आदमी की भाषा में लिखी गई है। कार्यक्रम का संचालन प्रो. राम विनय ने किया। इस दौरान अवस्थापना विकास परिषद के उपाध्यक्ष भीमलाल आर्य, जयसिंह रावत, अविकल थपलियाल, अनूप गैरोला, जितेन्द्र अंथवाल, हिमांशु बहुगुणा, शशि शेखर आदि उपस्थित रहे।
छूट में पुस्तक देने की तारीफ
देहरादून। 250 पेज की पुस्तक को मात्र 30 रुपए में उपलब्ध कराने की पहल को मुख्यमंत्री समेत सभी ने सराहा। लेखक मनीष ओली ने कहा कि यदि कुछ संस्थाएं लागत मूल्य में पुस्तकों की खरीद करने के लिए सामने आती हैं तो हम प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में भी न्यूनतम मूल्य में पुस्तक उपलब्ध करा सकेंगे।
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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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